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Sambhal News: बीमा कंपनी को क्लेम देने के आदेश
Fri, 29 Mar 2024 02:54 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Fri, 29 Mar 2024 02:54 AM IST
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चंदौसी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने वादी की बेटी के इलाज में खर्च हुई धनराशि का भुगतान बीमा कंपनी को करने के आदेश दिए हैं।
चंदौसी आवास विकास कॉलोनी निवासी तरुण श्रीवास्तव ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में एक मुकदमा स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी के विरुद्ध दायर किया। जिसमें बताया कि उन्होंने अपने परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस कराया था। पॉलिसी के दौरान उनकी बेटी खुशी श्रीवास्तव का स्वास्थ्य खराब हो गया। जिसे मुरादाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। बेटी के इलाज में 34581 रुपये का खर्च आया। परिवादी ने उसके बिल सत्यापित कराकर बीमा कंपनी के कार्यालय में क्लेम पाने के लिए जमा कराए।
आरोप है कि बीमा कंपनी ने सात अगस्त 2023 को क्लेम देने से इन्कार कर दिया। साथ ही कहा कि इस बीमारी में भर्ती होने की कोई आवश्यकता नहीं थी। जिसके बाद परिवादी तरुण श्रीवास्तव उपभोक्ता फोरम में पहुंचे। यहां आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए परिवादी की बेटी के इलाज में खर्च हुई धनराशि का सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान दो माह के अंदर बीमा कंपनी को देने के आदेश दिए। साथ ही परिवादी को 10 हजार रुपये मानसिक कष्ट और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में देने के निर्देश दिए हैं।
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चंदौसी आवास विकास कॉलोनी निवासी तरुण श्रीवास्तव ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में एक मुकदमा स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी के विरुद्ध दायर किया। जिसमें बताया कि उन्होंने अपने परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस कराया था। पॉलिसी के दौरान उनकी बेटी खुशी श्रीवास्तव का स्वास्थ्य खराब हो गया। जिसे मुरादाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। बेटी के इलाज में 34581 रुपये का खर्च आया। परिवादी ने उसके बिल सत्यापित कराकर बीमा कंपनी के कार्यालय में क्लेम पाने के लिए जमा कराए।
आरोप है कि बीमा कंपनी ने सात अगस्त 2023 को क्लेम देने से इन्कार कर दिया। साथ ही कहा कि इस बीमारी में भर्ती होने की कोई आवश्यकता नहीं थी। जिसके बाद परिवादी तरुण श्रीवास्तव उपभोक्ता फोरम में पहुंचे। यहां आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए परिवादी की बेटी के इलाज में खर्च हुई धनराशि का सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान दो माह के अंदर बीमा कंपनी को देने के आदेश दिए। साथ ही परिवादी को 10 हजार रुपये मानसिक कष्ट और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में देने के निर्देश दिए हैं।
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