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Sambhal News: हत्या के प्रयास के मामले में एक को उम्रकैद, 15 हजार जुर्माना
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चंदौसी। न्यायालय ने चंदौसी कोतवाली क्षेत्र के वर्ष 2014 में हुए एक हत्या के प्रयास के मामले में एक दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मुकदमे की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय में हुई।
जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि वादी सुरेश पुत्र छदम्मी लाल ने कोतवाली चंदौसी पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें बताया कि उसका भाई सोनू निवासी मोहल्ला हनुमानगढ़ी, मोहल्ले के ही सुमित शर्मा और हिमांशु शर्मा के साथ चंदौसी में बर्तनों की दुकान पर मजदूरी करता था। 19 फरवरी 2014 को दोनों लोग उसके भाई सोनू को घर से बुला कर ले गए।
शाम को जब सोनू घर वापस नहीं आया तो तलाश किया। अगले दिन 20 फरवरी को करीब 10 बजे सोनू घायल अवस्था में गांव बेहतरी व तारापुर के जंगल में मरघट में पड़ा मिला। उसी गर्दन और अन्य जगहों पर चाकू के घाव थे। पुलिस ने बेहोशी की हालत में सोनू को अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने सुमित और हिमांशु निवासी मोहल्ला हनुमानगढ़ी के विरुद्ध जानलेवा हमले के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया और विवेचना शुरू कर दी।
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विवेचना के बाद पुलिस ने साक्ष्यों को जुटा कर 21 अगस्त 2014 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। मुकदमे की सुनवाई जनपद न्यायाधीश दुर्ग नारायण सिंह के न्यायालय में हुई।
न्यायालय ने हिमांशु शर्मा को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 15 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।
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जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि वादी सुरेश पुत्र छदम्मी लाल ने कोतवाली चंदौसी पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें बताया कि उसका भाई सोनू निवासी मोहल्ला हनुमानगढ़ी, मोहल्ले के ही सुमित शर्मा और हिमांशु शर्मा के साथ चंदौसी में बर्तनों की दुकान पर मजदूरी करता था। 19 फरवरी 2014 को दोनों लोग उसके भाई सोनू को घर से बुला कर ले गए।
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शाम को जब सोनू घर वापस नहीं आया तो तलाश किया। अगले दिन 20 फरवरी को करीब 10 बजे सोनू घायल अवस्था में गांव बेहतरी व तारापुर के जंगल में मरघट में पड़ा मिला। उसी गर्दन और अन्य जगहों पर चाकू के घाव थे। पुलिस ने बेहोशी की हालत में सोनू को अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने सुमित और हिमांशु निवासी मोहल्ला हनुमानगढ़ी के विरुद्ध जानलेवा हमले के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया और विवेचना शुरू कर दी।
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विवेचना के बाद पुलिस ने साक्ष्यों को जुटा कर 21 अगस्त 2014 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। मुकदमे की सुनवाई जनपद न्यायाधीश दुर्ग नारायण सिंह के न्यायालय में हुई।
न्यायालय ने हिमांशु शर्मा को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 15 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।