फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sambhal News ›   notebandi dijal ko paisa nhin, khud hl men jute kisan

नोटबंदी : डीजल को पैसा और बैल पास नहीं, खुद हल में जुते किसान

Thu, 01 Dec 2016 01:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल Updated Thu, 01 Dec 2016 01:24 AM IST
विज्ञापन
बैंक में लाइन लगाने के बाद भी कैश न मिलने से गुस्सा लोग अब हाईवे जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन करने लगे हैं। केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की जा रही है। रामपुर के बिलासपुर  की ओबीसी की शाखा में कैश न मिलने से नाराज लोगों ने नैनीताल हाईवे पर हंगामा किया जिससे करीब डेढ़ घंटे तक जाम लगा रहा।
विज्ञापन


अमरोहा में यूनियन बैंक में लाइन लगने के बाद खत्म हुए कैश से गुस्साए लोगों ने बिजनौर रोड पर जाम लगा दिया। कैलसा में प्रथमा बैंक के उपभोक्ताओं ने भी अमरोहा-कांठ रोड पर जाम लगाया। ढबारसी में कैश न होने पर लोगों ने दोपहर एक बजे तक प्रथमा बैंक की शाखा नहीं खुलने दी। संभल। संभल में भी नगदी नहीं मिलने से आक्रोशित लोगों ने बुुुधवार को सिरसी की प्रथमा बैंक शाखा के सामने संभल-मुरादाबाद मार्ग पर जाम लगा दिया। 
विज्ञापन



जेब खाली है और भविष्य दांव पर है। पशु पाले नहीं है और ट्रैक्टर में डीजल डालने को करेंसी नहीं है। अपने ही खाते से बैंक रुपये नहीं निकाल पा रहे हैं। ऐसे भी खेतों में फसलों की बुआई तो जरूरी है, नहीं तो भविष्य ही चौपट हो जाएगा। लेकिन अन्नदाता हिम्मत नहीं हार रहे हैं। किसान खुद की हल में जुत रहे हैं। पटेले पर बच्चों को बैठाकर काम चलाया जा रहा है। कई खेतों में यह नजारा आम है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सहकारी समितियां पुराने नोट पर खाद नहीं दे रहीं, नए नोट बैंक नहीं दे रहे हैं। खाली जेब किसान आखिर क्या करें। लेकिन फिर भी फसलों की बुआई तो करनी ही है, ऐसे में किसी तरह बीज की व्यवस्था कर ली और रासायनिक खाद के स्थान पर गोबर आदि की कंपोस्ट खाद डालकर काम चलाया जा रहा है।


इन दिनों यह नजारा आम है कि खेतों में लोग गोबर की खाद डाल रहे हैं। दूसरी ओर बनियाखेड़ा गांव में किसान शमीम ने खेत तैयार कराकर गेहूं बो दिए लेकिन उन पर पटेला लगाने के लिए ट्रैक्टर वाले को बुलाया, तो उसने डीजल के लिए नई करेंसी मांगी। नई करेंसी नहीं थी तो शमीम घर गया और अपने परिवार के दो तीन लोगों को बुलाकर लाया और बैलों के स्थान पर खुद ही जुट गया और पटेला में रस्सी बांधकर खींचने लगा। क्योंकि पटेला नहीं लगने पर बोया गया गेहूं चिड़ियां खा सकती थी। कुछ ऐसे ही फार्मूले किसान आमतौर पर आजमाने लगे हैं। 

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed