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‘शरीयत के कानून में दखल मंजूर नहीं’
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Sat, 16 Dec 2017 01:53 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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मुस्लिमों के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार तीन तलाक के मसले पर कानून पारित करने की तरफ आगे बढ़ गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को तीन तलाक पर कानून बनाकर संसद में पेश करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। इसकी जानकारी होते ही संभल में तीखा विरोध उभरा है।
स्थानीय उलेमाओं ने एक बार फिर कहा कि शरीयत के कानून में किसी तरह की मदाखलत मंजूर नहीं है। तमाम कानून पहले से पारित हैं जिन पर अमल नहीं हुआ। यह कानून ही इसी तरह से रह जाएगा। सच्चा मुसलमान वही है जो शरीयत पर अमल फरमाएगा। वहीं कुछ उलमाओं ने कहा कि तीन तलाक का मुद्दा छेड़ कर केंद्र सरकार में सत्तारूढ़ बीजेपी सियासी लाभ लेना चाहती है. यह कोई मुसलमानों या हिंदुओं को राहत देने का मसला नहीं है बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू मतों को लामबंद करने का मसला है।
इसे मुसलमान और हिंदू दोनों समझ रहे हैं। वहीं मौलाना तौहीद आलम कासमी ने कहा कि हम इस मसले पर केंद्र सरकार का पुरजोर विरोध करते हैं। कानून के दायरे में रहकर केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ धरना प्रदर्शन करेंगे। ज्ञापन देंगे।
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तीन तलाक के पीछे है भाजपा की सियासत
कानून तो पहले भी पारित होते रहे हैं। लोगों ने उन्हें माना भी है और नहीं भी। कानून का काम लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। जहां तक तीन तलाक पर बनने जा रहे कानून का सवाल है, उसमें तो मैं यही कहूंगा कि इसका मुस्लिम महिलाओं के हित से कोई लेना देना नहीं है। यह राजनीतिक मुद्दा है। भाजपा हिंदू मतों को अपने हक में बनाए रखने के लिए सत्ता तंत्र के माध्यम से यह पूरी कवायद कर रही है।
मौलाना सुलेमान अशरफ, इमामे ईदगाह।
सच्चा मुसलमान तो शरीयत पर ही चलेगा
केंद्र सरकार के प्रस्तावित कानून से सुन्नी समुदाय सहमत नहीं है। दिल की बात पूछी जाए तो यही है कि हम शरीयत में किसी तरह की दखलंदाजी पसंद नहीं करते। सच्चा मुसलमान शरीयत पर ही चलेगा। जहां तक केंद्र सरकार के विरोध का सवाल है इस मसले में दीनी तंजीमों और बड़े उलेमाओं के आह्वान और आग्रह पर आगे कदम बढ़ाएंगे।
मौलाना आलम रजा खां नूरी, मुफ्ती ए आजम सिरसी।
कानून सामने आएगा तब देखेंगे कि क्या करना है, विरोध जारी है
जब कानून बनकर सामने आएगा तब देखेंगे कि हमें क्या करना है फिलहाल तो विरोध जारी है। विरोध बंद नहीं होगा। जहां तक कैबिनेट का प्रस्ताव पारित होने का सवाल है- हम एक बार फिर यही कहेंगे कि केंद्र सरकार को चाहिए था कि वह सुन्नी मुसलमानों से बात करती। मुसलमानों के परामर्श के बगैर किसी तरह का कानून मुस्लिम समाज के लिए पारित किया जाना उचित नहीं है।
मौलाना नफीस अख्तर, संभल।
मोदी सरकार का यह कानून संविधान के खिलाफ
यह कानून शरीयत के खिलाफ बन रहा है। इसे मुसलमान कैसे सहन करेंगे। मोदी सरकार जो कानून ला रही है। यह कानून, संविधान में दी गई मजहबी आजादी के खिलाफ है। तीन तलाक हमारे मजहब का मसला है इसमें कोई दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मौलाना तौहीद आलम कासमी, संभल।
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स्थानीय उलेमाओं ने एक बार फिर कहा कि शरीयत के कानून में किसी तरह की मदाखलत मंजूर नहीं है। तमाम कानून पहले से पारित हैं जिन पर अमल नहीं हुआ। यह कानून ही इसी तरह से रह जाएगा। सच्चा मुसलमान वही है जो शरीयत पर अमल फरमाएगा। वहीं कुछ उलमाओं ने कहा कि तीन तलाक का मुद्दा छेड़ कर केंद्र सरकार में सत्तारूढ़ बीजेपी सियासी लाभ लेना चाहती है. यह कोई मुसलमानों या हिंदुओं को राहत देने का मसला नहीं है बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू मतों को लामबंद करने का मसला है।
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इसे मुसलमान और हिंदू दोनों समझ रहे हैं। वहीं मौलाना तौहीद आलम कासमी ने कहा कि हम इस मसले पर केंद्र सरकार का पुरजोर विरोध करते हैं। कानून के दायरे में रहकर केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ धरना प्रदर्शन करेंगे। ज्ञापन देंगे।
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तीन तलाक के पीछे है भाजपा की सियासत
कानून तो पहले भी पारित होते रहे हैं। लोगों ने उन्हें माना भी है और नहीं भी। कानून का काम लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। जहां तक तीन तलाक पर बनने जा रहे कानून का सवाल है, उसमें तो मैं यही कहूंगा कि इसका मुस्लिम महिलाओं के हित से कोई लेना देना नहीं है। यह राजनीतिक मुद्दा है। भाजपा हिंदू मतों को अपने हक में बनाए रखने के लिए सत्ता तंत्र के माध्यम से यह पूरी कवायद कर रही है।
मौलाना सुलेमान अशरफ, इमामे ईदगाह।
सच्चा मुसलमान तो शरीयत पर ही चलेगा
केंद्र सरकार के प्रस्तावित कानून से सुन्नी समुदाय सहमत नहीं है। दिल की बात पूछी जाए तो यही है कि हम शरीयत में किसी तरह की दखलंदाजी पसंद नहीं करते। सच्चा मुसलमान शरीयत पर ही चलेगा। जहां तक केंद्र सरकार के विरोध का सवाल है इस मसले में दीनी तंजीमों और बड़े उलेमाओं के आह्वान और आग्रह पर आगे कदम बढ़ाएंगे।
मौलाना आलम रजा खां नूरी, मुफ्ती ए आजम सिरसी।
कानून सामने आएगा तब देखेंगे कि क्या करना है, विरोध जारी है
जब कानून बनकर सामने आएगा तब देखेंगे कि हमें क्या करना है फिलहाल तो विरोध जारी है। विरोध बंद नहीं होगा। जहां तक कैबिनेट का प्रस्ताव पारित होने का सवाल है- हम एक बार फिर यही कहेंगे कि केंद्र सरकार को चाहिए था कि वह सुन्नी मुसलमानों से बात करती। मुसलमानों के परामर्श के बगैर किसी तरह का कानून मुस्लिम समाज के लिए पारित किया जाना उचित नहीं है।
मौलाना नफीस अख्तर, संभल।
मोदी सरकार का यह कानून संविधान के खिलाफ
यह कानून शरीयत के खिलाफ बन रहा है। इसे मुसलमान कैसे सहन करेंगे। मोदी सरकार जो कानून ला रही है। यह कानून, संविधान में दी गई मजहबी आजादी के खिलाफ है। तीन तलाक हमारे मजहब का मसला है इसमें कोई दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मौलाना तौहीद आलम कासमी, संभल।