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Sambhal News: बाईपास पर नहीं लगे संकेतक, कोहरे में बढ़ा हादसे का खतरा
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संभल। कोहरे के दौरान हादसों का खतरा बना रहता है। तीन दिन से लगातार कोहरा छा रहा है और दृश्यता भी शून्य बनी हुई है। इससे वाहन चालक भी परेशान हो रहे हैं। जिन संकेतक की मदद से वाहन चालक अपना सफर तय करते हैं वह पूरी तरह दुरूस्त नहीं है। इससे खतरा ज्यादा बढ़ गया है। संभल में असमोली बाईपास और चंदौसी बाईपास पर तीव्र मोड़ हैं लेकिन इन मोड़ पर संकेतक नहीं है। इन संकेतक के नहीं होने से मोड़ का अंदाजा नहीं हो पा रहा। ज्यादातर चालक इन दोनों बाईपास से जा नहीं रहे हैं। जो नए लोग वाहन लेकर आ रहे हैं उन्हें काफी दुश्वारी उठानी पड़ रही है।
संभल में असमोली बाईपास पांच किलोमीटर और चंदौसी बाईपास 3.5 किलोमीटर लंबा है। इन दोनों ही बाईपास मार्ग पर 20 से ज्यादा मोड़ हैं। इसमें ज्यादातर तीव्र मोड़ हैं। इन मोड़ पर संकेतक जो लगे थे वह टूट गए हैं और उनके स्टैंड ही खड़े हैं। पीली और सफेद पट्टी भी धुंधली हो चुकी है। फुटपाथ जहां होना चाहिए था वहां झाड़िया हैं। इससे मोड़ को देखना ज्यादा मुश्किल हो जाता है। कोहरे के दौरान लगातार खतरा बना हुआ है। वाहन चालक भी रात के समय इन बाईपास से जाने से डर रहे हैं। क्योंकि मोड़ पर हुई चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
चंदौसी बाईपास पर तो स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। क्योंकि मार्ग के दोनों और खाई नुमा गड्ढे बन गए हैं। यदि कोहरे में नजर चूकी तो कोई भी वाहन पलट जाएगा। लोकनिर्माण विभाग के एक्सईएन का कहना है कि इन दोनों बाईपास पर मरम्मत का कार्य कराया जाना है। बजट मिल चुका है। और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
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कोहरे के आने से पहले क्यों नहीं चेतते जिम्मेदार, अब काम हुआ है शुरू
संभल-मुरादाबाद मार्ग पर लेयर डाली जा रही है। लेयर का कार्य तो पूरा हो गया लेकिन सफेद पट्टी, रिफ्लेक्टर और संकेतक गायब हैं। जबकि रात के समय भारी वाहन बड़ी संख्या में गुजरते हैं। ऐसे में सफेद पट्टी नहीं होने से वाहन चालकों का सफर ज्यादा परेशानी से भरा है। डिवाइडर जो बने हैं वह छोटे हैं और उन पर जो रिफ्लेक्टर लगे थे वह खत्म हो चुके हैं। इनका काम भी विभाग कराएगा लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि जब कोहरे के सीजन की जानकारी विभाग को रहती है तो समय रहते कार्य क्याें शुरू नहीं कराया जाता है।
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नवंबर में 30 लोगों की जा चुकी है जान
नवंबर में हुए सड़क हादसों के दौरान 30 लोगों की जान गई थी। काफी संख्या में लोग घायल हुए थे। दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक भी 19 लोगों की जान जा चुकी है। जिले में रोड सेफ्टी के मानक ही अधूरे हैं। नेशनल हाईवे पर सिम्स कॉलेज के नजदीक बने जीरो प्वाइंट पर अंधेरा छाया रहता है। इससे भी रात के समय हादसों का खतरा रहता है। रेलिंग आबादी के इलाके में नहीं लगी है। किसी भी समय जानवर के हाईवे पर पहुंचने का खतरा है।
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गन्ने से भरी ट्र्रैक्टर-ट्रॉली से रात में खतरा
किसान अपनी सामान्य ट्रैक्टर-ट्रॉली से चीनी मिल के लिए गन्ने की ढुलाई करते हैं लेकिन इन किसानों से गन्ना खरीद कर बड़ी ट्रॉली जो अवैध है उससे कारोबारी गन्ना भरकर चलते हैं। ओवरलोड गन्ना होने के कारण पूरी सड़क पर गन्ना फैला रहता है। कोहरे के दौरान भी यह ट्रॉली दौड़ रही हैं। यह भी बड़ा खतरा है। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस का भी गौर इन अवैध ट्रॉली पर नहीं है। किसी ट्रक की बराबर गन्ना इन ट्रॉली से ढोया जाता है।
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कोट
15 लाख रुपये से कार्य बाईपास पर कराया जाना है। कुछ कार्य करा दिया था। अब दोबारा से कार्य शुरू कराया जाएगा। इसमें रोड सेफ्टी के लिए ज्यादातर कार्य कराया जाना है।
-सुनील प्रकाश, एक्सईएन, लोकनिर्माण विभाग, संभल
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कोट
रोड सेफ्टी के लिए हम लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं। शुगर मिल जाने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रिफ्लेक्टर लगा रहे हैं। जिससे गन्ने से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली कोहरे के दौरान दिख सकें।
अमिताभ चतुर्वेदी, एआरटीओ, संभल।
फोटो
कोहरा बना सफर में बाधक, दृश्यता हुई शून्य
संवाद न्यूज एजेंसी
चंदौसी। चार दिन से कोहरा लगातार विकराल रूप धारण करता जा रहा है। शाम होते ही कोहरे की चादर छा जाती है और सुबह नौ बजे तक कमोवेश एक जैसी ही स्थिति रहती है। सोमवार की तरह ही मंगलवार की सुबह और शाम होते ही कोहरा छाने लगा। इससे सड़क पर चलने वाले वाहन रेंग-रेंग कर निकले।
मंगलवार को सुबह दस बजे तक छाए रहे कोहरे के कारण दिन में वाहन लाइट जलाकर चलाए गए। शाम को सात बजे से फिर कोहरे की चादर तन गई। धीरे-धीरे यह गहरा होने लगा और देर रात तक दृश्यता शून्य हो गई। दो मीटर की दूरी का नजर नहीं आ रहा था। सड़क पर चलने वाले वाहनों का आलम यह था कि रोड किनारे की सफेद पट्टी के सहारे रेंग कर निकाले गए। हाईवे के अलावा सभी प्रमुख मार्गों पर वाहन एक-दूसरे के पीछे लाइन से चलते नजर आए। रात में सफर करने वालों के लिए कोहरा बड़ी बाधा बन रहा है। इसके साथ ही शहर के अंदर भी घना कोहरा छा जाने से जल्दी ही बाजार बंद हो गया और सड़कें सुनसान हो गईं। शाम से ही लोग घरों में पहुंच गए। संवाद
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संभल में असमोली बाईपास पांच किलोमीटर और चंदौसी बाईपास 3.5 किलोमीटर लंबा है। इन दोनों ही बाईपास मार्ग पर 20 से ज्यादा मोड़ हैं। इसमें ज्यादातर तीव्र मोड़ हैं। इन मोड़ पर संकेतक जो लगे थे वह टूट गए हैं और उनके स्टैंड ही खड़े हैं। पीली और सफेद पट्टी भी धुंधली हो चुकी है। फुटपाथ जहां होना चाहिए था वहां झाड़िया हैं। इससे मोड़ को देखना ज्यादा मुश्किल हो जाता है। कोहरे के दौरान लगातार खतरा बना हुआ है। वाहन चालक भी रात के समय इन बाईपास से जाने से डर रहे हैं। क्योंकि मोड़ पर हुई चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
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चंदौसी बाईपास पर तो स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। क्योंकि मार्ग के दोनों और खाई नुमा गड्ढे बन गए हैं। यदि कोहरे में नजर चूकी तो कोई भी वाहन पलट जाएगा। लोकनिर्माण विभाग के एक्सईएन का कहना है कि इन दोनों बाईपास पर मरम्मत का कार्य कराया जाना है। बजट मिल चुका है। और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
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कोहरे के आने से पहले क्यों नहीं चेतते जिम्मेदार, अब काम हुआ है शुरू
संभल-मुरादाबाद मार्ग पर लेयर डाली जा रही है। लेयर का कार्य तो पूरा हो गया लेकिन सफेद पट्टी, रिफ्लेक्टर और संकेतक गायब हैं। जबकि रात के समय भारी वाहन बड़ी संख्या में गुजरते हैं। ऐसे में सफेद पट्टी नहीं होने से वाहन चालकों का सफर ज्यादा परेशानी से भरा है। डिवाइडर जो बने हैं वह छोटे हैं और उन पर जो रिफ्लेक्टर लगे थे वह खत्म हो चुके हैं। इनका काम भी विभाग कराएगा लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि जब कोहरे के सीजन की जानकारी विभाग को रहती है तो समय रहते कार्य क्याें शुरू नहीं कराया जाता है।
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नवंबर में 30 लोगों की जा चुकी है जान
नवंबर में हुए सड़क हादसों के दौरान 30 लोगों की जान गई थी। काफी संख्या में लोग घायल हुए थे। दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक भी 19 लोगों की जान जा चुकी है। जिले में रोड सेफ्टी के मानक ही अधूरे हैं। नेशनल हाईवे पर सिम्स कॉलेज के नजदीक बने जीरो प्वाइंट पर अंधेरा छाया रहता है। इससे भी रात के समय हादसों का खतरा रहता है। रेलिंग आबादी के इलाके में नहीं लगी है। किसी भी समय जानवर के हाईवे पर पहुंचने का खतरा है।
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गन्ने से भरी ट्र्रैक्टर-ट्रॉली से रात में खतरा
किसान अपनी सामान्य ट्रैक्टर-ट्रॉली से चीनी मिल के लिए गन्ने की ढुलाई करते हैं लेकिन इन किसानों से गन्ना खरीद कर बड़ी ट्रॉली जो अवैध है उससे कारोबारी गन्ना भरकर चलते हैं। ओवरलोड गन्ना होने के कारण पूरी सड़क पर गन्ना फैला रहता है। कोहरे के दौरान भी यह ट्रॉली दौड़ रही हैं। यह भी बड़ा खतरा है। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस का भी गौर इन अवैध ट्रॉली पर नहीं है। किसी ट्रक की बराबर गन्ना इन ट्रॉली से ढोया जाता है।
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15 लाख रुपये से कार्य बाईपास पर कराया जाना है। कुछ कार्य करा दिया था। अब दोबारा से कार्य शुरू कराया जाएगा। इसमें रोड सेफ्टी के लिए ज्यादातर कार्य कराया जाना है।
-सुनील प्रकाश, एक्सईएन, लोकनिर्माण विभाग, संभल
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रोड सेफ्टी के लिए हम लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं। शुगर मिल जाने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रिफ्लेक्टर लगा रहे हैं। जिससे गन्ने से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली कोहरे के दौरान दिख सकें।
अमिताभ चतुर्वेदी, एआरटीओ, संभल।
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कोहरा बना सफर में बाधक, दृश्यता हुई शून्य
संवाद न्यूज एजेंसी
चंदौसी। चार दिन से कोहरा लगातार विकराल रूप धारण करता जा रहा है। शाम होते ही कोहरे की चादर छा जाती है और सुबह नौ बजे तक कमोवेश एक जैसी ही स्थिति रहती है। सोमवार की तरह ही मंगलवार की सुबह और शाम होते ही कोहरा छाने लगा। इससे सड़क पर चलने वाले वाहन रेंग-रेंग कर निकले।
मंगलवार को सुबह दस बजे तक छाए रहे कोहरे के कारण दिन में वाहन लाइट जलाकर चलाए गए। शाम को सात बजे से फिर कोहरे की चादर तन गई। धीरे-धीरे यह गहरा होने लगा और देर रात तक दृश्यता शून्य हो गई। दो मीटर की दूरी का नजर नहीं आ रहा था। सड़क पर चलने वाले वाहनों का आलम यह था कि रोड किनारे की सफेद पट्टी के सहारे रेंग कर निकाले गए। हाईवे के अलावा सभी प्रमुख मार्गों पर वाहन एक-दूसरे के पीछे लाइन से चलते नजर आए। रात में सफर करने वालों के लिए कोहरा बड़ी बाधा बन रहा है। इसके साथ ही शहर के अंदर भी घना कोहरा छा जाने से जल्दी ही बाजार बंद हो गया और सड़कें सुनसान हो गईं। शाम से ही लोग घरों में पहुंच गए। संवाद