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नसबंदी के लिए छह घंटे इंतजार, बैैरंग लौटीं
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Tue, 19 Jul 2016 01:31 AM IST
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नसबंदी
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शिविर में आपरेशन के पुख्ता इंतजाम नहीं होने के कारण महिलाओं को छह घंटे के इंतजार के बाद बिना नसबंदी कराए लौटना पड़ा। आपरेशन करने मुरादाबाद से आई सर्जन की टीम व्यवस्था न हो पाने के कारण लौट गई।
करीब एक वर्ष बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संभल की ओर से जिला अस्पताल में नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर सोमवार को दस बजे से शुरू होना था। साढ़े नौ बजे से ही महिलाओं का आना शुरू हो गया। लेकिन, शिविर में आपरेशन की व्यवस्था नहीं हो सकी। इस दौरान नसबंदी कराने आईं महिलाओं ने न तो पानी पिया और न ही भोजन ही बकर सकीं। उनके साथ आईं एएनएम ने महिलाओं को खाली पेट रहने की सलाह दी थी। उन्हें करीब तीन बजे आपरेशन नहीं होने की जानकारी मिली।
इस पर वे आक्रोशित हो उठीं। महिलाओं ने कहा कि यदि आपरेशन नहीं होना था तो दिन भर भूखा प्यासा क्यों रखा गया।
.रुपये खर्च हो गए, नसबंदी नहीं हुई
संभल। नसबंदी के लिए महिलाओ को प्रेरित करने में एएनएम का योगदान रहता है। सोमवार को आयोजित शिविर में महिलाओ को लेकर पहुंची एएनएम मीनाक्षी ने बताया कि परिवार नियोजन उनकी सेवाओं का हिस्सा होता है। इसलिए वह महिला को अपने खर्चे पर लाई।
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उनके 100 रुपये खर्च हो गए और नसबंदी भी नहीं हुई। दूसरी एएनएम ने बताया कि पहले शिविर 16 जुलाई को लगना था जिसे बदल कर 18 जुलाई किया गया।
..वेरी बैड, वेरी बैड
नसबंदी करने के लिए मुरादाबाद से आईं सर्जन डॉ.अलका दीक्षित जब जाने के लिए गाड़ी में बैठ गईं तो डा. जुहेब करीम उन्हें मनाने पहुंचे। उनसे आपरेशन न करने की वजह पूछी। इस पर डॉ.अलका दीक्षित ने कहा कि आपरेशन के लिए कोई इंतजाम नहीं था। दिस इज वेरी बैड-वेरी बैड।
मैं सुबह दस बजे आ गई थी। सुबह से न पानी पिया और न ही खाना खाया क्योंकि नसबंदी खाली पेट कराई जानी थ्ज्ञी। दिन भर इंतजार कराया अब लौटाया जा रहा है। बबली पत्नी दिनेश, महमूदपुर कुंज।
मैं बच्चों को घर पर अकेला छोड़कर सुबह ही आ गई थी, उम्मीद थी कि दोपहर तक छुट्टी मिल जाएगी लेकिन आपरेशन नहीं हुआ। राजकुमारी पत्नी नौरंग, नवाड़ा।
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करीब एक वर्ष बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संभल की ओर से जिला अस्पताल में नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर सोमवार को दस बजे से शुरू होना था। साढ़े नौ बजे से ही महिलाओं का आना शुरू हो गया। लेकिन, शिविर में आपरेशन की व्यवस्था नहीं हो सकी। इस दौरान नसबंदी कराने आईं महिलाओं ने न तो पानी पिया और न ही भोजन ही बकर सकीं। उनके साथ आईं एएनएम ने महिलाओं को खाली पेट रहने की सलाह दी थी। उन्हें करीब तीन बजे आपरेशन नहीं होने की जानकारी मिली।
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इस पर वे आक्रोशित हो उठीं। महिलाओं ने कहा कि यदि आपरेशन नहीं होना था तो दिन भर भूखा प्यासा क्यों रखा गया।
.रुपये खर्च हो गए, नसबंदी नहीं हुई
संभल। नसबंदी के लिए महिलाओ को प्रेरित करने में एएनएम का योगदान रहता है। सोमवार को आयोजित शिविर में महिलाओ को लेकर पहुंची एएनएम मीनाक्षी ने बताया कि परिवार नियोजन उनकी सेवाओं का हिस्सा होता है। इसलिए वह महिला को अपने खर्चे पर लाई।
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उनके 100 रुपये खर्च हो गए और नसबंदी भी नहीं हुई। दूसरी एएनएम ने बताया कि पहले शिविर 16 जुलाई को लगना था जिसे बदल कर 18 जुलाई किया गया।
..वेरी बैड, वेरी बैड
नसबंदी करने के लिए मुरादाबाद से आईं सर्जन डॉ.अलका दीक्षित जब जाने के लिए गाड़ी में बैठ गईं तो डा. जुहेब करीम उन्हें मनाने पहुंचे। उनसे आपरेशन न करने की वजह पूछी। इस पर डॉ.अलका दीक्षित ने कहा कि आपरेशन के लिए कोई इंतजाम नहीं था। दिस इज वेरी बैड-वेरी बैड।
मैं सुबह दस बजे आ गई थी। सुबह से न पानी पिया और न ही खाना खाया क्योंकि नसबंदी खाली पेट कराई जानी थ्ज्ञी। दिन भर इंतजार कराया अब लौटाया जा रहा है। बबली पत्नी दिनेश, महमूदपुर कुंज।
मैं बच्चों को घर पर अकेला छोड़कर सुबह ही आ गई थी, उम्मीद थी कि दोपहर तक छुट्टी मिल जाएगी लेकिन आपरेशन नहीं हुआ। राजकुमारी पत्नी नौरंग, नवाड़ा।