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Sambhal News: रामबाग धाम के मंच पर हुआ नारद मोह का मंचन
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नरौली में रामलीला का मंचन करते कलाकार - संवाद
चंदौसी। श्री रामलीला नाट्य परिषद चंदौसी की ओर से रामबाग धाम के रंगमंच पर नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। मंचन में कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय और प्रभावी संवादों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। देर रात तक चली रामलीला का दर्शकों ने जमकर लुत्फ उठाया।
रामबाग धाम के विशाल रंगमंच पर रामलीला का शुभारंभ स्व. हरिओम की पावन स्मृति में उनके परिजनों विनय कुमार, प्रदीप कुमार, अभय वार्ष्णेय ने फीता काटकर किया। मंचन में स्थानीय कलाकारों ने दिखाया कि देवऋषि नारद जी कठोर तपस्या कर रहे होते हैं, इससे घबराकर देवता इंद्र कामदेव को उनकी तपस्या भंग करने के लिए भेजते हैं। किंतु नारद जी की तपस्या भंग नहीं होती। इस विजय पर नारद जी को घमंड हो जाता है। अगले मंचन में दिखाया कि भगवान विष्णु अपनी माया से देवऋषि नारद का घमंड तोड़ते हैं।
इस अवसर पर श्रीरामलीला नाट्य परिषद की ओर से सभी यजमानों को माला, पटका, चुनरी पहनाकर सम्मानित किया गया और उन्हें श्रीरामचरितमानस की प्रति उपहार स्वरूप भेंट की गई। कार्यक्रम में गिरिराज किशोर, नवीन चौधरी, कपिल राजा, कन्हैया वार्ष्णेय, प्रदीप शर्मा, ओमेंद्र वार्ष्णेय, प्रमोद गुरु, महेश मदन, संजीव, अमित केएस. हीरालाल, मुकुल शर्मा, गौरव वार्ष्णेय, उमंग वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।
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ताड़का वध पर रामलीला में गूंजे श्रीराम के जयकारे
बनियाठेर। कस्बा नरौली के कोठी वाले मैदान में आयोजित रामलीला में बुधवार को बाहर से आए कलाकारों ने ताड़का वध की लीला का भव्य मंचन किया गया।
मंचन में दिखाया गया कि लंकापति रावण के आदेश पर सुबाहु और मारीच ऋषि-मुनियों के यज्ञ में विघ्न डालते हैं। इससे आहत होकर ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ से मिलते हैं और राम-लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने का आग्रह करते हैं। गुरु वशिष्ठ के समझाने पर राजा दशरथ सहमत हो जाते हैं और श्रीराम-लक्ष्मण को गुरु विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं। अगले मंचन में दिखाया गया कि भगवान राम और लक्ष्मण ताड़का व सुबाहु का वध कर देते हैं। इस अवसर पर कुंवर राघवेंद्र सिंह, कुंवर उपेंद्र सिंह, कुंवर शैलेंद्र सिंह, वीरेंद्र प्रताप सिंह, अनुज गुप्ता, नरेश कुमार, प्रदीप गुप्ता, रामबाबू शर्मा, कौशल शर्मा, अमरीश शर्मा, सियाराम शर्मा, उपदेश राघव आदि मौजूद रहे। संवाद
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रामबाग धाम के विशाल रंगमंच पर रामलीला का शुभारंभ स्व. हरिओम की पावन स्मृति में उनके परिजनों विनय कुमार, प्रदीप कुमार, अभय वार्ष्णेय ने फीता काटकर किया। मंचन में स्थानीय कलाकारों ने दिखाया कि देवऋषि नारद जी कठोर तपस्या कर रहे होते हैं, इससे घबराकर देवता इंद्र कामदेव को उनकी तपस्या भंग करने के लिए भेजते हैं। किंतु नारद जी की तपस्या भंग नहीं होती। इस विजय पर नारद जी को घमंड हो जाता है। अगले मंचन में दिखाया कि भगवान विष्णु अपनी माया से देवऋषि नारद का घमंड तोड़ते हैं।
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इस अवसर पर श्रीरामलीला नाट्य परिषद की ओर से सभी यजमानों को माला, पटका, चुनरी पहनाकर सम्मानित किया गया और उन्हें श्रीरामचरितमानस की प्रति उपहार स्वरूप भेंट की गई। कार्यक्रम में गिरिराज किशोर, नवीन चौधरी, कपिल राजा, कन्हैया वार्ष्णेय, प्रदीप शर्मा, ओमेंद्र वार्ष्णेय, प्रमोद गुरु, महेश मदन, संजीव, अमित केएस. हीरालाल, मुकुल शर्मा, गौरव वार्ष्णेय, उमंग वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।
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ताड़का वध पर रामलीला में गूंजे श्रीराम के जयकारे
बनियाठेर। कस्बा नरौली के कोठी वाले मैदान में आयोजित रामलीला में बुधवार को बाहर से आए कलाकारों ने ताड़का वध की लीला का भव्य मंचन किया गया।
मंचन में दिखाया गया कि लंकापति रावण के आदेश पर सुबाहु और मारीच ऋषि-मुनियों के यज्ञ में विघ्न डालते हैं। इससे आहत होकर ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ से मिलते हैं और राम-लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने का आग्रह करते हैं। गुरु वशिष्ठ के समझाने पर राजा दशरथ सहमत हो जाते हैं और श्रीराम-लक्ष्मण को गुरु विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं। अगले मंचन में दिखाया गया कि भगवान राम और लक्ष्मण ताड़का व सुबाहु का वध कर देते हैं। इस अवसर पर कुंवर राघवेंद्र सिंह, कुंवर उपेंद्र सिंह, कुंवर शैलेंद्र सिंह, वीरेंद्र प्रताप सिंह, अनुज गुप्ता, नरेश कुमार, प्रदीप गुप्ता, रामबाबू शर्मा, कौशल शर्मा, अमरीश शर्मा, सियाराम शर्मा, उपदेश राघव आदि मौजूद रहे। संवाद