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Sambhal News: मुल्ला अफरोज और वारिस पर है हत्या का इल्जाम, चार्जशीट में गुलाम पर हथियार मुहैया कराने का जिक्र
Wed, 30 Sep 2026 01:48 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Wed, 30 Sep 2026 01:48 AM IST
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संभल। 24 नवंबर 2024 को हुए संभल बवाल में पांच लोगों की जान गई थी लेकिन चार मामले हत्या के दर्ज किए गए थे। एक मृतक के परिजनों ने कार्रवाई से ही इनकार कर दिया गया था। इसलिए पांचवें मरने वाले व्यक्ति का जिक्र पुलिस रिकॉर्ड में नहीं है। जिन चार लोगों की हत्याएं हुई थीं उनकी हत्या का इल्जाम मुल्ला अफरोज, वारिस और गुलाम पर है। इन तीनों के सरगना दीपा सराय निवासी शारिक साठा पर बवाल की साजिश रचने और विदेशी हथियार मुहैया कराने का आरोप है। पुलिस एलओसी जारी करा चुकी है। मतलब शारिक साठा की तलाश इंटरपोल कर रही है। तीनों गुर्गों पर एनएसए के तहत कार्रवाई की गई थी। जिसमें मुल्ला अफरोज को राहत मिली है। अन्य दो गुर्गे गुलाम और वारिस पर एनएसए के तहत कार्रवाई प्रभावी है।
पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की है और न्यायिक जांच आयोग में जो बयान दर्ज कराए हैं वह एक समान हैं। पुलिस के मुताबिक शारिक साठा अपने गुर्गों के माध्यम से पुलिसकर्मियों की हत्या कराना चाहता था। उसका उद्देश्य विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना था। उसकी मंशा थी कि पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद कर्फ्यू लग जाएगा और विवाद राष्ट्रीय स्तर का बन जाएगा। इससे उसके गिरोह का वर्चस्व भी बनेगा।
यह जानकारी न्यायिक जांच आयोग के सामने तत्कालीन एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने दर्ज कराई थी। पुलिस ने जो चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है। उसके अनुसार शारिक साठा के गुर्गों ने यह जानकारी दी थी कि शारिक साठा ने ही गुर्गों को विदेशी हथियार उपलब्ध कराए थे। जिन हथियारों से गोलियां चलाई गईं। जिसमें चार लोगों की जान गई थी। जो कारतूस और खोखे मिले थे वह पाकिस्तान और अमेरिका निर्मित थे।
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हयातनगर थाना क्षेत्र के सरायतरीन निवासी बिलाल, हयातनगर निवासी रोमान, संभल कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कोटगर्वी निवासी नईम, अयान और नखासा थाना क्षेत्र के तुर्तीपुर इल्हा निवासी कैफ की हत्या हुई थी। रोमान के परिजनों ने कार्रवाई से इनकार कर दिया था। जिसके चलते रोमान की मौत का उल्लेख पुलिस के रिकॉर्ड में नहीं मिलता है। अज्ञात के खिलाफ बिलाल, नईम, कैफ और अयान की हत्या का मामला दर्ज किया गया था। इन हत्या और पूरे बवाल की जांच एसआईटी ने की थी। एसआईटी की जांच में ही शारिक साठा के गुर्गों की भूमिका प्रकाश में आई थी।
पुलिस चार्जशीट के अनुसार गुलाम ने शारिक साठा के भेजे हथियार मुल्ला अफरोज और वारिस को दिए थे। इन हथियार से ही बवाल के दौरान अंधाधुंध गोली चलाई थी। इस पूरे बवाल में शारिक साठा, गुलाम, मुल्ला अफरोज और वारिस को आरोपी बनाया गया। तीनों आरोपियों को एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ के बाद हथियार बरामद किए गए थे। शारिक साठा को इंटरपोल पुलिस तलाश कर रही है। वह दुबई में रहकर गिरोह का संचालन करता है।
हथियार, सोना तस्करी के अलावा आईएसआई के नकली नोट भारत में खपाने के लिए सक्रिय रहे शारिक साठा को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हथियार और नकली नोट के मामले दर्ज किए गए थे। सोना तस्करी उसके भागने के बाद उजागर हुई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह नकली पासपोर्ट के माध्यम से 2020 में दुबई भागा है। वह वाहन चोरी की घटनाएं भी वहीं से कराता है। उसका एक गिरोह है जो पूरे देश में सक्रिय है। वाहन चोरी के 60 मुकदमे दर्ज हैं।
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पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की है और न्यायिक जांच आयोग में जो बयान दर्ज कराए हैं वह एक समान हैं। पुलिस के मुताबिक शारिक साठा अपने गुर्गों के माध्यम से पुलिसकर्मियों की हत्या कराना चाहता था। उसका उद्देश्य विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना था। उसकी मंशा थी कि पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद कर्फ्यू लग जाएगा और विवाद राष्ट्रीय स्तर का बन जाएगा। इससे उसके गिरोह का वर्चस्व भी बनेगा।
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यह जानकारी न्यायिक जांच आयोग के सामने तत्कालीन एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने दर्ज कराई थी। पुलिस ने जो चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है। उसके अनुसार शारिक साठा के गुर्गों ने यह जानकारी दी थी कि शारिक साठा ने ही गुर्गों को विदेशी हथियार उपलब्ध कराए थे। जिन हथियारों से गोलियां चलाई गईं। जिसमें चार लोगों की जान गई थी। जो कारतूस और खोखे मिले थे वह पाकिस्तान और अमेरिका निर्मित थे।
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हयातनगर थाना क्षेत्र के सरायतरीन निवासी बिलाल, हयातनगर निवासी रोमान, संभल कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कोटगर्वी निवासी नईम, अयान और नखासा थाना क्षेत्र के तुर्तीपुर इल्हा निवासी कैफ की हत्या हुई थी। रोमान के परिजनों ने कार्रवाई से इनकार कर दिया था। जिसके चलते रोमान की मौत का उल्लेख पुलिस के रिकॉर्ड में नहीं मिलता है। अज्ञात के खिलाफ बिलाल, नईम, कैफ और अयान की हत्या का मामला दर्ज किया गया था। इन हत्या और पूरे बवाल की जांच एसआईटी ने की थी। एसआईटी की जांच में ही शारिक साठा के गुर्गों की भूमिका प्रकाश में आई थी।
पुलिस चार्जशीट के अनुसार गुलाम ने शारिक साठा के भेजे हथियार मुल्ला अफरोज और वारिस को दिए थे। इन हथियार से ही बवाल के दौरान अंधाधुंध गोली चलाई थी। इस पूरे बवाल में शारिक साठा, गुलाम, मुल्ला अफरोज और वारिस को आरोपी बनाया गया। तीनों आरोपियों को एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ के बाद हथियार बरामद किए गए थे। शारिक साठा को इंटरपोल पुलिस तलाश कर रही है। वह दुबई में रहकर गिरोह का संचालन करता है।
हथियार, सोना तस्करी के अलावा आईएसआई के नकली नोट भारत में खपाने के लिए सक्रिय रहे शारिक साठा को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हथियार और नकली नोट के मामले दर्ज किए गए थे। सोना तस्करी उसके भागने के बाद उजागर हुई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह नकली पासपोर्ट के माध्यम से 2020 में दुबई भागा है। वह वाहन चोरी की घटनाएं भी वहीं से कराता है। उसका एक गिरोह है जो पूरे देश में सक्रिय है। वाहन चोरी के 60 मुकदमे दर्ज हैं।