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एमआरएफ सेंटर एक साल से संचालित, पर अभी तक नहीं लगी री-साइकिल मशीन

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 13 Aug 2022 01:30 AM IST
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MRF center operated for one year, but not yet installed recycle machine
स्वच्छ भारत मिशन के तहत चंदौसी नगर पालिका में एक साल पहले एमआरएफ (मेटेरियल रिकवरी फेसेलिटी) सेंटर में संचालित हो गया, पर अभी तक वेस्टेज को री-साइकिल करने के लिए मशीन नहीं लगी है। पालिका ने सेंटर संचालन और मशीनरी लगाने की जिम्मेदारी एक एजेंसी को सौंप रखी है, पर अभी तक मशीनरी नहीं लगी है। मशीनरी लगाने की जिम्मेदारी भी एजेंसी है और शासन से बजट भी स्वीकृत है। मशीनरी के अभाव में कूड़े को लाने ले जाने में दिक्कतों के साथ उसकी ढुलाई में अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
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चंदौसी नगर पालिका की आबादी करीब 1.20 लाख है और रोजाना करीब 62.5 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। नगर से निकलने वाले कूड़े के वर्गीकरण और उसका री साइकिल करने के लिए मोहल्ला लक्ष्मणगंज में टंकी के पीछे एमआरएफ (मेटेरियल रिकवरी फेसेलिटी) सेंटर बनाया गया है। कार्यदायी संस्था जलनिगम ने करीब 32 लाख रुपये की लागत से इस सेंटर का निर्माण कर डेढ़ साल पहले पालिका के हैंडओवर कर दिया। पालिका ने सेंटर संचालन की जिम्मेदारी चंडीगढ़ की एजेंसी टैरियर यूटीलिटी प्राइवेट लिमिटेड को सौंप रखी है। सेंटर पर शहर से निकलने वाले कूड़े का वर्गीकरण किया जाता है। पालिका ने एजेंसी को वर्गीकरण कूड़े को रिसाइकिल करने के लिए मशीन लगाने की जिम्मेदारी भी दी है। इसमें एक प्लास्टिक री-साइकिल मशीन और दूसरे वेस्टेज रिसाइकिल मशीन लगनी है। इसके लिए शासन से करीब 12 लाख रुपये का बजट भी शासन से दो साल पहले स्वीकृत हो गया था। पर एजेंसी अभी तक मशीन नहीं लगा पाई है।
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कूड़े का होता है वर्गीकरण
एमआरएफ सेंटर में शहर से निकलने वाले कूड़े का वर्गीकरण होता है। इसमें जूते चप्पल, प्लास्टिक के अवशेष, पानी की बोतल, कांच, रबर, कपड़ों के अवशेष में अलग अलग छांटा जाता है। इसके अलावा शेष अवशेष से खाद बनाने का प्रोजेक्ट भी है। इसके लिए टंचिंग ग्राउंड में खाद के गड्ढ़े भी बनाए गए हैं।
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री साइकिल मशीन न होने से कचरा ढुलाई में होती है परेशानी:
कूड़े का वर्गीकरण टंचिंग ग्राउंड में होता है। वहां से जूते चप्पल, कपड़े, प्लास्टिक की बोतल, रबर आदि आकार में काफी अधिक होत हैँ। 40 से 50 बोलत में ही एक बोरा भर जाता है। यदि उसे रिसाइकिल कर लिया जाए, तो उसका अवशेष एक से दो किलो के थैले में आसानी से आ जाएगा। उसका एकत्र करके रखने व लाने ले जाने में आसानी होगी। ऐसे ही रबर, जूते चप्पल व अन्य अवशेष में आसानी होगी। लेवर खर्च और आवागमन खर्च में कमी आएगी।

चंडीगढ़ की एजेंसी को एमआरएफ सेंटर संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कूड़े का वर्गीकरण हो रहा है, पर अभी री साइकिल मशीन नहीं लगी है। यह एजेंसी को ही लगानी है। इसका प्रपोजल बनवाकर शासन को भिजवाया गया है। जल्द ही रिसाइकिल मशीनरी लगवा दी जाएगी।
विजयपाल सिंह, ईओ नगर पालिका चंदौसी
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