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Sambhal News: मां की ममता लिखी न जाए...
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बहजोई(संभल)। मां की महिमा लिखी न जाए, चाहे आठों याम लिखूं व आ रहे हैं प्रभु जी हमारे, चांद तारे जरा जगमगाओ आदि कविताएं सुनाकर कवियों ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। पंडाल श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मौका था मोहल्ला कृष्णा कुंज में सृजन साहित्यिक अभिरुचि मंच की ओर से किए गए कवि सम्मेलन व साहित्यकार सम्मान समारोह का।
कवि सम्मेलन की शुरुआत कवि सुभाष चंद्र शर्मा व वयोवृद्ध कवि रूप किशोर गुप्ता ने मां शारदे के चित्र के सामने दीप जलाकर की। कवि दीपक गोस्वामी चिराग ने वाणी वंदना की प्रस्तुति दी। जिला बदायूं के बिसौली से आए वरिष्ठ कवि रमेश चंद्र मिश्र सहज ने कैसे दीप जलाऊं तम में, रही फूंक से बुझा पवन व रजपुरा के युवा कवि कुमार अवधेश विद्यार्थी ने, आप क्या मिल गए जिंदगी मिल गई, हर दुआ को नई सी बंदगी मिल गई सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोेर कर दिया।
अध्यक्षता कर रहे बहजोई के कवि व साहित्यकार रूपकिशोर गुप्ता ने, यह अंधेरे जहां भी जाएंगे, खून से हम दिए जलाएंगे, संभल के हास्य कवि सुभाष चंद्र शर्मा ने मेरे पति के भूलने का, एक अच्छा खासा शो है, बाजार में मिले बोले, नमस्ते बहन जी कहीं आपको देखा तो है सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं।
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कवि दीपक गोस्वामी चिराग ने कभी-कभी मन करता मेरा, पाती मां के नाम लिखूं। राम-राम सत श्री अकाल, और दिल से उसे सलाम लिखूं। मां की महिमा लिखी न जाए, चाहे आठों याम लिखूं सुनाकर मां के महत्व पर रोशनी डाली।
साथ ही, संभल के व्यंग्यकार अतुल शर्मा ने, ताज प्रेम कहानी का, सरताज नहीं हो सकता, शाहजहां कहलाए प्रेम पुजारी, विश्वास नहीं हो सकता तथा बागपत से आए वरिष्ठ गजलकार श्रीपाल शर्मा (ईदरीशपुरी) ने अपनी गजल, हंसती इठलाती जहां पर ये कलियां, वहीं पर मैं खिलता चमन देखता हूं सुनाकर श्रोताओं का मन छू लिया। इसके अलावा कवि ज्ञान प्रकाश उपाध्याय ने, आ रहे हैं प्रभु जी हमारे, चांद तारे जरा जगमगाओ, सूनी-सूनी पड़ी अयोध्या में, दीप घर-घर में प्यारे जगमगाओ तथा डॉ. राजेंद्र कुमार आर्य ने गजल, गम ने हंसने न दिया, वक्त ने रोने न दिया... सुनाई।
इस बीच कवयित्री अंजू आर्य समेत मनीषा गौतम, डॉ. सुनीता शंकवार, संभव जैन, डॉ. संदीप सचेत, वेंकट कुमार, अरशद रसूल आदि ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस बीच स्थानीय समेत अन्य जिलों से आए कवि व साहित्यकारों को पटका व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। आयोजक ने बताया कि कवि सुभाष चन्द्र शर्मा व रमेश चंद्र मिश्रा को साहित्य साधक सम्मान दिया गया। इस बीच राममूर्ति नाथ, वंश, गौरव यादव, पदम सिंह, अनुराधा गोस्वामी व वंशिका आदि रहे।
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कवि सम्मेलन की शुरुआत कवि सुभाष चंद्र शर्मा व वयोवृद्ध कवि रूप किशोर गुप्ता ने मां शारदे के चित्र के सामने दीप जलाकर की। कवि दीपक गोस्वामी चिराग ने वाणी वंदना की प्रस्तुति दी। जिला बदायूं के बिसौली से आए वरिष्ठ कवि रमेश चंद्र मिश्र सहज ने कैसे दीप जलाऊं तम में, रही फूंक से बुझा पवन व रजपुरा के युवा कवि कुमार अवधेश विद्यार्थी ने, आप क्या मिल गए जिंदगी मिल गई, हर दुआ को नई सी बंदगी मिल गई सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोेर कर दिया।
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अध्यक्षता कर रहे बहजोई के कवि व साहित्यकार रूपकिशोर गुप्ता ने, यह अंधेरे जहां भी जाएंगे, खून से हम दिए जलाएंगे, संभल के हास्य कवि सुभाष चंद्र शर्मा ने मेरे पति के भूलने का, एक अच्छा खासा शो है, बाजार में मिले बोले, नमस्ते बहन जी कहीं आपको देखा तो है सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं।
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कवि दीपक गोस्वामी चिराग ने कभी-कभी मन करता मेरा, पाती मां के नाम लिखूं। राम-राम सत श्री अकाल, और दिल से उसे सलाम लिखूं। मां की महिमा लिखी न जाए, चाहे आठों याम लिखूं सुनाकर मां के महत्व पर रोशनी डाली।
साथ ही, संभल के व्यंग्यकार अतुल शर्मा ने, ताज प्रेम कहानी का, सरताज नहीं हो सकता, शाहजहां कहलाए प्रेम पुजारी, विश्वास नहीं हो सकता तथा बागपत से आए वरिष्ठ गजलकार श्रीपाल शर्मा (ईदरीशपुरी) ने अपनी गजल, हंसती इठलाती जहां पर ये कलियां, वहीं पर मैं खिलता चमन देखता हूं सुनाकर श्रोताओं का मन छू लिया। इसके अलावा कवि ज्ञान प्रकाश उपाध्याय ने, आ रहे हैं प्रभु जी हमारे, चांद तारे जरा जगमगाओ, सूनी-सूनी पड़ी अयोध्या में, दीप घर-घर में प्यारे जगमगाओ तथा डॉ. राजेंद्र कुमार आर्य ने गजल, गम ने हंसने न दिया, वक्त ने रोने न दिया... सुनाई।
इस बीच कवयित्री अंजू आर्य समेत मनीषा गौतम, डॉ. सुनीता शंकवार, संभव जैन, डॉ. संदीप सचेत, वेंकट कुमार, अरशद रसूल आदि ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस बीच स्थानीय समेत अन्य जिलों से आए कवि व साहित्यकारों को पटका व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। आयोजक ने बताया कि कवि सुभाष चन्द्र शर्मा व रमेश चंद्र मिश्रा को साहित्य साधक सम्मान दिया गया। इस बीच राममूर्ति नाथ, वंश, गौरव यादव, पदम सिंह, अनुराधा गोस्वामी व वंशिका आदि रहे।