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Sambhal News: एनआरसी में मिला कुपोषित बच्चों को नया जीवन
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चंदौसी। सीएचसी का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों के लिए उम्मीद का बड़ा सहारा बन रहा है। यहां तीन माह से पांच वर्ष तक के कमजोर बच्चों को पौष्टिक खाना देने के साथ ही एक सुरक्षित और खुशी भरा माहौल मिल रहा है। साथ ही, बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता को सही पोषण की जरूरी जानकारी और उपयोगी सीख भी दी जाती है। इस अच्छी देखभाल की वजह से अब तक 995 कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे एनआरसी से पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं।
जिले का एकमात्र एनआरसी वार्ड चंदौसी सीएचसी में स्थित है। यहां कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के उपचार के लिए 10 बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा सीएचसी के 50 शैय्या अस्पताल में भी 30 बेड कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के लिए आरक्षित हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें एनआरसी में भर्ती कराते हैं। जहां बच्चों की सेहत के अनुसार उनका भोजन निर्धारित किया जाता है और उसी आधार पर उपचार दिया जाता है। वार्ड में तैनात महिला विशेषज्ञ 14 दिनों तक बच्चों की विशेष देखभाल करती हैं और प्रत्येक बच्चे के लिए अलग डाइट चार्ट बनाती हैं।
एनआरसी की चिकित्सा प्रभारी डॉ. गौरी वार्ष्णेय ने बताया कि लगभग तीन वर्षों में लगभग 1069 कुपोषित व अति कुपोषित एनआरसी में भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 995 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। सीएचसी में सीएमएस डॉ. हरवेंद्र सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में लगभग 55 अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों का एनआरसी से उपचार चल रहा है।
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यह मिलता है भोजन:-
एनआरसी में बच्चों को प्रतिदिन पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें सूजी का हलवा, खिचड़ी, मुरमुरा पाउडर, पाउडर, रागी के आटे की रोटी आदि शामिल हैं। इससे उनका वजन धीरे-धीरे बढ़ता है और वे कुपोषण से बाहर निकल आते हैं।
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मनोरंजन की व्यवस्था -
वार्ड में बच्चों के मनोरंजन के लिए खेल–खिलौनों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा एनआरसी वार्ड में टीवी और बच्चों के खेलने के लिए अलग से एक कक्ष भी उपलब्ध है।
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कर्मचारियों की नियुक्ति
एनआरसी वार्ड में कर्मचारियों की तैनाती की गई है। यहां एक महिला चिकित्सक, दो स्टाफ नर्स, एक कुक और एक सफाई कर्मी उपलब्ध हैं।
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जिले का एकमात्र एनआरसी वार्ड चंदौसी सीएचसी में स्थित है। यहां कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के उपचार के लिए 10 बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा सीएचसी के 50 शैय्या अस्पताल में भी 30 बेड कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के लिए आरक्षित हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें एनआरसी में भर्ती कराते हैं। जहां बच्चों की सेहत के अनुसार उनका भोजन निर्धारित किया जाता है और उसी आधार पर उपचार दिया जाता है। वार्ड में तैनात महिला विशेषज्ञ 14 दिनों तक बच्चों की विशेष देखभाल करती हैं और प्रत्येक बच्चे के लिए अलग डाइट चार्ट बनाती हैं।
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एनआरसी की चिकित्सा प्रभारी डॉ. गौरी वार्ष्णेय ने बताया कि लगभग तीन वर्षों में लगभग 1069 कुपोषित व अति कुपोषित एनआरसी में भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 995 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। सीएचसी में सीएमएस डॉ. हरवेंद्र सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में लगभग 55 अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों का एनआरसी से उपचार चल रहा है।
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यह मिलता है भोजन:-
एनआरसी में बच्चों को प्रतिदिन पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें सूजी का हलवा, खिचड़ी, मुरमुरा पाउडर, पाउडर, रागी के आटे की रोटी आदि शामिल हैं। इससे उनका वजन धीरे-धीरे बढ़ता है और वे कुपोषण से बाहर निकल आते हैं।
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मनोरंजन की व्यवस्था -
वार्ड में बच्चों के मनोरंजन के लिए खेल–खिलौनों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा एनआरसी वार्ड में टीवी और बच्चों के खेलने के लिए अलग से एक कक्ष भी उपलब्ध है।
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कर्मचारियों की नियुक्ति
एनआरसी वार्ड में कर्मचारियों की तैनाती की गई है। यहां एक महिला चिकित्सक, दो स्टाफ नर्स, एक कुक और एक सफाई कर्मी उपलब्ध हैं।