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Sambhal News: महात्मा गांधी मेमोरियल पार्क में झूले जर्जर, बाउंड्री की जाली और ग्रिल भी गायब
Fri, 24 Jan 2025 02:07 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Fri, 24 Jan 2025 02:07 AM IST
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रामपुर। मोहल्ला राजद्वारा...। करीब 10 हजार की आबादी के बीच महात्मा गांधी मेमोरियल पार्क है, जो खंडहर हो गया है। झूले और सीटें टूट चुकी हैं। रोशनी के इंतजाम खत्म हो चुके हैं। फव्वारा, रोशनी व्यवस्था, हरियाली से यह पार्क दूर है। बाउंड्री की जाली और ग्रिल भी गायब है। पार्क के बीच हाईटेंशन लाइन है जोकि खतरा बनी हुई है।
20 लाख रुपये खर्च कर बनाए गए इस पार्क का 31 मार्च 2006 को लोकार्पण हुआ था। उस दौर में पार्क की खूबसूरती देखने को बनती थी। रंग-बिरंगी रोशनी के बीच फव्वारे से पानी की बौछार लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती थी। कंकरीट वाली सीटें भी थीं। जिन्हें रंग-रोगन कर खूबसूरत किया गया था। विभिन्न प्रकार के पौधों की फुलवारी हुआ करती थी। उस दौर में इस पार्क की रखवाली में एक-दो नहीं बल्कि की छह माली लगे थे, लेकिन अब वह सब गुजरे दौर की बातें हो गई हैं।
वर्तमान में पार्क के गेट पेंट तक बदरंग हो गया है। बाउंड्री भी क्षतिग्रस्त है। छह झूलों में से पांच खराब हैं, एक जो झूला है भी वह जर्जर हो गया है। फिसलने वाले झूले पर कूड़े का ढेर है। पार्क के बीच में बिजली पोल है। जिस पर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है।
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नलकूप का पाइप भी क्षतिग्रस्त
पार्क के नलकूप का पाइप क्षतिग्रस्त है। इससे पानी का रिसाव हो रहा है। पार्क में मिले लोगों ने बताया कि इस पाइप को दो माह पहले ठीक कराया गया था, लेकिन फिर खराब हो गया। इससे पानी भी बर्बाद हो रहा है।
अराजक तत्वों का बोलबाला
पार्क की बाउंड्री पर लगाई गई जाली और ग्रिल चोरी हो चुकी है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि यह पार्क उन लोगों के असुरक्षा उत्पन्न कर रहा है। यहां अक्सर आकर नशेड़ी बैठ जाते हैं, सवाल करने पर गाली-गलौज करने लगते हैं। चूंकि सरकारी जगह है इसलिए बैठने वाले को टोकना भी उचित नहीं है।
यह बात सही है कि नगर पालिका ने मोहल्ले वालों को पार्क की सुविधा दी थी, लेकिन इसकी देखरेख की जिम्मेदारी जितनी मोहल्ले वालों की है उतनी ही नगर पालिका की भी। पालिका से यहां कोई झांकने तक नहीं आता है। हम लोगों की ही निगरानी से पार्क में आज भी जो उपकरण दिख रहे हैं वह सुरक्षित हैं। -सलमान, राजद्वारा
एक समय था जब पार्क की देखरेख में छह माली लगे रहते थे और अब सिर्फ एक ही है। दो साल पहले यहां पौधे लगाए गए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में वह पौधे गायब हो गए। अब सिर्फ यहां पर बड़ी-बड़ी घास है। पार्क के बीच में बिजली खंभा भी लगा है। पार्क की खूबसूरती के लिए नगर पालिका को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। -नासिर अली, राजद्वारा
हर कोई चाहता है कि हमारे घर के पड़ोस का पार्क खूबसूरत हो। लेकिन, इस पार्क को बनाने के बाद पालिका ने दोबारा इसकी सुध नहीं ली है। ईओ को भी चाहिए कि कम से कम शहर के पार्कों का भी भ्रमण करें और जहां जो कमी दिखे उसे दुरुस्त कराया जाए। अब जहां तक बात रही हम मोहल्ले वालों की तो इसके लिए सभी लोगों की सहमति जरूरी है। -सईद खां, राजद्वारा
पार्कों की मरम्मत प्रस्ताव में है। इसके लिए एस्टीमेट बनाए जा रहे हैं। कोशिश है कि जल्द से जल्द काम शुरू कर दिया जाए।
-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी
महात्मा गांधी मेमोरियल पार्क के लिए चेयरमैन से बातचीत हो चुकी है। इसको फिर से सजाने के लिए एक निजी कंपनी से बात चल रही है। इस पार्क का स्वरूप फिर से खूबसूरत बनाया जाएगा। - चेतना आजाद, सभासद-वार्ड-18
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20 लाख रुपये खर्च कर बनाए गए इस पार्क का 31 मार्च 2006 को लोकार्पण हुआ था। उस दौर में पार्क की खूबसूरती देखने को बनती थी। रंग-बिरंगी रोशनी के बीच फव्वारे से पानी की बौछार लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती थी। कंकरीट वाली सीटें भी थीं। जिन्हें रंग-रोगन कर खूबसूरत किया गया था। विभिन्न प्रकार के पौधों की फुलवारी हुआ करती थी। उस दौर में इस पार्क की रखवाली में एक-दो नहीं बल्कि की छह माली लगे थे, लेकिन अब वह सब गुजरे दौर की बातें हो गई हैं।
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वर्तमान में पार्क के गेट पेंट तक बदरंग हो गया है। बाउंड्री भी क्षतिग्रस्त है। छह झूलों में से पांच खराब हैं, एक जो झूला है भी वह जर्जर हो गया है। फिसलने वाले झूले पर कूड़े का ढेर है। पार्क के बीच में बिजली पोल है। जिस पर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है।
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नलकूप का पाइप भी क्षतिग्रस्त
पार्क के नलकूप का पाइप क्षतिग्रस्त है। इससे पानी का रिसाव हो रहा है। पार्क में मिले लोगों ने बताया कि इस पाइप को दो माह पहले ठीक कराया गया था, लेकिन फिर खराब हो गया। इससे पानी भी बर्बाद हो रहा है।
अराजक तत्वों का बोलबाला
पार्क की बाउंड्री पर लगाई गई जाली और ग्रिल चोरी हो चुकी है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि यह पार्क उन लोगों के असुरक्षा उत्पन्न कर रहा है। यहां अक्सर आकर नशेड़ी बैठ जाते हैं, सवाल करने पर गाली-गलौज करने लगते हैं। चूंकि सरकारी जगह है इसलिए बैठने वाले को टोकना भी उचित नहीं है।
यह बात सही है कि नगर पालिका ने मोहल्ले वालों को पार्क की सुविधा दी थी, लेकिन इसकी देखरेख की जिम्मेदारी जितनी मोहल्ले वालों की है उतनी ही नगर पालिका की भी। पालिका से यहां कोई झांकने तक नहीं आता है। हम लोगों की ही निगरानी से पार्क में आज भी जो उपकरण दिख रहे हैं वह सुरक्षित हैं। -सलमान, राजद्वारा
एक समय था जब पार्क की देखरेख में छह माली लगे रहते थे और अब सिर्फ एक ही है। दो साल पहले यहां पौधे लगाए गए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में वह पौधे गायब हो गए। अब सिर्फ यहां पर बड़ी-बड़ी घास है। पार्क के बीच में बिजली खंभा भी लगा है। पार्क की खूबसूरती के लिए नगर पालिका को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। -नासिर अली, राजद्वारा
हर कोई चाहता है कि हमारे घर के पड़ोस का पार्क खूबसूरत हो। लेकिन, इस पार्क को बनाने के बाद पालिका ने दोबारा इसकी सुध नहीं ली है। ईओ को भी चाहिए कि कम से कम शहर के पार्कों का भी भ्रमण करें और जहां जो कमी दिखे उसे दुरुस्त कराया जाए। अब जहां तक बात रही हम मोहल्ले वालों की तो इसके लिए सभी लोगों की सहमति जरूरी है। -सईद खां, राजद्वारा
पार्कों की मरम्मत प्रस्ताव में है। इसके लिए एस्टीमेट बनाए जा रहे हैं। कोशिश है कि जल्द से जल्द काम शुरू कर दिया जाए।
-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी
महात्मा गांधी मेमोरियल पार्क के लिए चेयरमैन से बातचीत हो चुकी है। इसको फिर से सजाने के लिए एक निजी कंपनी से बात चल रही है। इस पार्क का स्वरूप फिर से खूबसूरत बनाया जाएगा। - चेतना आजाद, सभासद-वार्ड-18