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लीवर ले लिया..बदले में नहीं दिया 100 गज का मकान
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Wed, 28 Dec 2016 12:52 AM IST
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आरोप है कि एक गरीब ने तो अपने हिस्से का वादा लीवर देकर निभाया लेकिन अमीर रिश्तेदार बनकर दान किए लीवर के सहारे सुखी जिंदगी तो गुजार रहा है मगर गरीब से किया वादा नहीं निभा रहा। अमीर ने लीवर लेते समय वादा किया गया था गरीब को सौ गज का मकान, पांच लाख रुपये और पांचों लड़कियों की शादी अपने खर्च पर कराएंगे। लेकिन अब लीवर लेने वाले मुकर गए हैं। गरीब व्यक्ति अपने कागज लेकर इंसाफ के लिए इधर-उधर भटक रहा है।
नगर के मोहल्ला महमूद खां सराय निवासी मोहम्मद कमर तीन वर्ष पहले नगर की एक फर्म पर काम करता था। फर्म मालिक मोहम्मद कमर को अपने परिवार के सदस्य की तरह रखता था। वर्ष 2013 में फर्म मालिक के दामाद बीमार हो गए। दामाद को गंभीर हालत में दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डाक्टर ने उसका लीवर खराब बताते हुए लीवर प्रत्यारोपण की बात कही। ऐसे में फर्म मालिक ने अपने दामाद को बचाने के लिए मोहम्मद कमर से संपर्क किया।
मालिक ने मोहम्मद कमर की पांचों बेटियों की शादी कराने की जिम्मेदारी उठाने का वायदा किया। पांच लाख रुपये व एक मकान देने की बात कही। मोहम्मद कमर गरीब होने के चलते लालच में आ गया और लीवर देने के लिए तैयार हो गया। 24 दिसंबर वर्ष 2013 में मोहम्मद कमर ने अपना लीवर मालिक के दामाद को दे दिया। उसके पास लीवर ट्रांप्लांट करने का अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली का कागज भी है।
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अब मोहम्मद कमर ने बेटियों की शादी करने और पांच लाख रुपये व मकान देने की मांग की तो मालिक किए गए वादे से मुकर गया। मोहम्मद कमर ने बताया कि लीवर देने के बाद से वह मजदूरी करने लायक भी नहीं है। वजन उटाने पर पेट में दर्द होता है। पांच बेटियों में से एक की शादी हो गई है लेकिन अभी तक चार बेटियों की शादी करनी है। अब वह समाज के रसूखदार लोगों से इंसाफ दिलाने को चक्कर काट रहा है।
अधिकारियों से शिकायत की तैयारी की गई है। उधर, प्रशासन का कहना है कि ऐसा कोई मामला संज्ञान में नहीं आया है। यदि लिखित शिकायत आती है तो साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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नगर के मोहल्ला महमूद खां सराय निवासी मोहम्मद कमर तीन वर्ष पहले नगर की एक फर्म पर काम करता था। फर्म मालिक मोहम्मद कमर को अपने परिवार के सदस्य की तरह रखता था। वर्ष 2013 में फर्म मालिक के दामाद बीमार हो गए। दामाद को गंभीर हालत में दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डाक्टर ने उसका लीवर खराब बताते हुए लीवर प्रत्यारोपण की बात कही। ऐसे में फर्म मालिक ने अपने दामाद को बचाने के लिए मोहम्मद कमर से संपर्क किया।
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मालिक ने मोहम्मद कमर की पांचों बेटियों की शादी कराने की जिम्मेदारी उठाने का वायदा किया। पांच लाख रुपये व एक मकान देने की बात कही। मोहम्मद कमर गरीब होने के चलते लालच में आ गया और लीवर देने के लिए तैयार हो गया। 24 दिसंबर वर्ष 2013 में मोहम्मद कमर ने अपना लीवर मालिक के दामाद को दे दिया। उसके पास लीवर ट्रांप्लांट करने का अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली का कागज भी है।
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अब मोहम्मद कमर ने बेटियों की शादी करने और पांच लाख रुपये व मकान देने की मांग की तो मालिक किए गए वादे से मुकर गया। मोहम्मद कमर ने बताया कि लीवर देने के बाद से वह मजदूरी करने लायक भी नहीं है। वजन उटाने पर पेट में दर्द होता है। पांच बेटियों में से एक की शादी हो गई है लेकिन अभी तक चार बेटियों की शादी करनी है। अब वह समाज के रसूखदार लोगों से इंसाफ दिलाने को चक्कर काट रहा है।
अधिकारियों से शिकायत की तैयारी की गई है। उधर, प्रशासन का कहना है कि ऐसा कोई मामला संज्ञान में नहीं आया है। यदि लिखित शिकायत आती है तो साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।