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Sambhal News: सामूहिक दुष्कर्म के दो दोषियों को आजीवन कारावास
Sat, 23 Mar 2024 03:16 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Sat, 23 Mar 2024 03:16 PM IST
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चंदौसी (संभल)। सामूहिक दुष्कर्म के दस साल पुराने मामले में विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश दीपक यादव ने दो लोगों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आधी धनराशि पीड़िता के संरक्षक को देने का आदेश दिया है।
एडीजीसी अमोल जौहरी ने बताया कि गुन्नौर थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले व्यक्ति ने नौ जुलाई 2014 को पुलिस को तहरीर दी थी। बताया था कि गांव के ही रामेश्वर और कुंवरपाल उसकी बेटी को बहलाकर अपने साथ ले गए है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की। पता लगा रामेश्वर और कुंवरपाल के खिलाफ दर्ज कराई रिपोर्ट झूठी है। पुलिस ने युवती को बरामद किया और कोर्ट में पेश कर बयान दर्ज कराए। उसने बयानों में बताया कि गांव के ही मुकेश, विजय और रामबाबू उसको अपने साथ ले गए थे। तीनों ने बारी-बारी से दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। तीनों उसको बेचने ले जा रहे थे। जैसे-तैसे नाबालिग बेटी उनके चंगुल से छूटकर भागी थी। पुलिस ने बयानों के आधार पर तीनों के नाम एफआईआर में शामिल करते हुए रामेश्वर और कुंवरपाल को बरी कर दिया। विवेचना के दौरान ही मुकेश के पिता राजेंद्र और विजय ने दुष्कर्म पीड़िता को जिंदा जला दिया था। दोनों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई और मामले में दोनों को आजीवन कारावास भी हुआ। विजय की जेल में मौत हो गई। पुलिस ने दुष्कर्म के मामले में रामबाबू और मुकेश खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर कोर्ट में दाखिल कर दिया। तब से मामला कोर्ट में विचाराधीन था। शुक्रवार को न्यायाधीश ने उपरोक्त पत्रावली पर साक्ष्यों का अवलोकन कर विशेष लोक अभियोजक अमोल जौहरी व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद रामबाबू व मुकेश को सजा सुनाई। संवाद
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एडीजीसी अमोल जौहरी ने बताया कि गुन्नौर थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले व्यक्ति ने नौ जुलाई 2014 को पुलिस को तहरीर दी थी। बताया था कि गांव के ही रामेश्वर और कुंवरपाल उसकी बेटी को बहलाकर अपने साथ ले गए है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की। पता लगा रामेश्वर और कुंवरपाल के खिलाफ दर्ज कराई रिपोर्ट झूठी है। पुलिस ने युवती को बरामद किया और कोर्ट में पेश कर बयान दर्ज कराए। उसने बयानों में बताया कि गांव के ही मुकेश, विजय और रामबाबू उसको अपने साथ ले गए थे। तीनों ने बारी-बारी से दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। तीनों उसको बेचने ले जा रहे थे। जैसे-तैसे नाबालिग बेटी उनके चंगुल से छूटकर भागी थी। पुलिस ने बयानों के आधार पर तीनों के नाम एफआईआर में शामिल करते हुए रामेश्वर और कुंवरपाल को बरी कर दिया। विवेचना के दौरान ही मुकेश के पिता राजेंद्र और विजय ने दुष्कर्म पीड़िता को जिंदा जला दिया था। दोनों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई और मामले में दोनों को आजीवन कारावास भी हुआ। विजय की जेल में मौत हो गई। पुलिस ने दुष्कर्म के मामले में रामबाबू और मुकेश खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर कोर्ट में दाखिल कर दिया। तब से मामला कोर्ट में विचाराधीन था। शुक्रवार को न्यायाधीश ने उपरोक्त पत्रावली पर साक्ष्यों का अवलोकन कर विशेष लोक अभियोजक अमोल जौहरी व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद रामबाबू व मुकेश को सजा सुनाई। संवाद
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