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श्री कल्कि महोत्सवः ये जो हल्का-हल्का सुरूर है, सुनकर कल्कि भक्त और साधु संत झूम उठे
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संभल के कल्कि महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में अपनी टीम के साथ कलाम पेश जॉनी।
- फोटो : SAMBHAL
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संभल। श्री कल्कि महोत्सव के चौथे दिन सांस्कृतिक मंच पर सूफी गायकी का जलवा रहा। ये जो हल्का-हल्का सुरूर है, सुनकर कल्कि भक्त और साधु संत भी झूम उठे। कल्कि महोत्सव की एक शाम सूफी संगीत के नाम रही। देर रात तक पांडाल भरा रहा।
एक शाम सूफी संगीत के नाम की शानदार प्रस्तुतियों से पहले मंच पर संत महंत और कल्कि पीठाधीश्वर पहुंचे। मध्य प्रदेश के कंप्यूटर बाबा, कथा व्यास अतुल कृष्ण रामायणी, स्वामी कल्याण देव, संत त्रिकाल भवंता और कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दीप प्रज्ज्वलन करके शुभारंभ किया। दिल्ली से आए सुप्रिद्ध सूफी गायक जॉनी सूफी अपनी गायकी से पूरे पांडाल के श्रद्धालुओं को मंच की ओर खींच लिया।
उनका अंदाज ऐसा था कि पांडाल के बाहर मौजूद तमाम श्रोता अंदर पहुंच गए। सूफी गायक ने अपनी प्रस्तुतियों की शुरूआत तो ये जो हल्का हल्का सुरूर है से की लेकिन इसके बाद भक्ति और वैराग्य की ऐसी तान छेड़ी कि लोग दीवाने हो गए।
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सूफी गायक ने अपनी एक प्रस्तुति में कहा- मिले हो तुम हमको बड़े नसीबों से। इसके बाद जुग्नी साईंयां दी और मेरे रश्के कमर कव्वाली को सुनाकर उन्होंने एक बार फिर सूफी संगीत का जलवा बिखेरा। इस मौके पर कल्कि पीठाधीश्वर ने कहा कि यह बड़े सौभाग्य की बात है कल्कि के मंच पर इतनी हस्तियां आईँ। उन्होंने कहा कि सूफी संगीत ने भारत के भाई-चारे को नई ऊर्जा दी है। इस मौके पर लवकुश शर्मा, पंकज चाहल, सुधीर त्यागी, मयंक शर्मा, गणेश ईशू प्रखर, मूलचंद्र त्यागी आदि मौजूद रहे।
संदेशे आते हैं संदेशे जाते हैं... गीत पर थिरके लोग
कल्कि महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में बाल कलाकार अराध्य ने संदेशे आते हैं संदेशे जाते हैं गीत शुरू हुआ तो पंडाल में बैठे लोग झूम उठे। हर कोई अपनी जगह उठकर नाचने लगा। साधु-संत भी अपने आप को नहीं रोक पाए। साथ ही वंदे मातरम की प्रस्तुति देकर मन मोह लिया। जिसका हर कोई दीवाना हो गया। देशभक्ति के तराने गूंजे। राष्ट्रगान कराया गया।
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एक शाम सूफी संगीत के नाम की शानदार प्रस्तुतियों से पहले मंच पर संत महंत और कल्कि पीठाधीश्वर पहुंचे। मध्य प्रदेश के कंप्यूटर बाबा, कथा व्यास अतुल कृष्ण रामायणी, स्वामी कल्याण देव, संत त्रिकाल भवंता और कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दीप प्रज्ज्वलन करके शुभारंभ किया। दिल्ली से आए सुप्रिद्ध सूफी गायक जॉनी सूफी अपनी गायकी से पूरे पांडाल के श्रद्धालुओं को मंच की ओर खींच लिया।
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उनका अंदाज ऐसा था कि पांडाल के बाहर मौजूद तमाम श्रोता अंदर पहुंच गए। सूफी गायक ने अपनी प्रस्तुतियों की शुरूआत तो ये जो हल्का हल्का सुरूर है से की लेकिन इसके बाद भक्ति और वैराग्य की ऐसी तान छेड़ी कि लोग दीवाने हो गए।
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सूफी गायक ने अपनी एक प्रस्तुति में कहा- मिले हो तुम हमको बड़े नसीबों से। इसके बाद जुग्नी साईंयां दी और मेरे रश्के कमर कव्वाली को सुनाकर उन्होंने एक बार फिर सूफी संगीत का जलवा बिखेरा। इस मौके पर कल्कि पीठाधीश्वर ने कहा कि यह बड़े सौभाग्य की बात है कल्कि के मंच पर इतनी हस्तियां आईँ। उन्होंने कहा कि सूफी संगीत ने भारत के भाई-चारे को नई ऊर्जा दी है। इस मौके पर लवकुश शर्मा, पंकज चाहल, सुधीर त्यागी, मयंक शर्मा, गणेश ईशू प्रखर, मूलचंद्र त्यागी आदि मौजूद रहे।
संदेशे आते हैं संदेशे जाते हैं... गीत पर थिरके लोग
कल्कि महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में बाल कलाकार अराध्य ने संदेशे आते हैं संदेशे जाते हैं गीत शुरू हुआ तो पंडाल में बैठे लोग झूम उठे। हर कोई अपनी जगह उठकर नाचने लगा। साधु-संत भी अपने आप को नहीं रोक पाए। साथ ही वंदे मातरम की प्रस्तुति देकर मन मोह लिया। जिसका हर कोई दीवाना हो गया। देशभक्ति के तराने गूंजे। राष्ट्रगान कराया गया।