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Sambhal News: कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के उपचार के प्रति गंभीर नहीं स्वास्थ्य विभाग

Sun, 08 Dec 2024 01:42 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Sun, 08 Dec 2024 01:42 AM IST
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Health department not serious towards treatment of malnourished and severely malnourished children
चंदौसी (संभल)। कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के उपचार के प्रति स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है। चंदौसी सीएचसी स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में नवंबर से अब तक सिर्फ 43 बच्चे ही भर्ती हुए हैं। जबकि जिले में 10,597 बच्चे कुपोषित और 1891 बच्चे अतिकुपोषित हैं। वहीं पुनर्वास केंद्र में तैनात महिला चिकित्सक के अवकाश पर जाने के बाद वैकल्पिक चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। भर्ती बच्चों की देखभाल स्टॉफ नर्स जिम्मे है।
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जिले के अति कुपोषित व कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए सीएचसी में पुनर्वास केंद्र स्थापित है। इन पोषण पुनर्वास केंद्र पर अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कराने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों के अलावा गर्भवती-धात्री महिलाओं की देखभाल की जाती है। कार्यकर्ता शून्य से छह साल के अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित करती हैं। जिसके बाद अतिकुपोषित बच्चों का इलाज पोषण पुनर्वास केंद्र पर किया जाता है। 14 दिनों के लिए अतिकुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती कर पोषण संबंधित आहार और नियमित देखभाल दी जाती है। ताकि बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाई जा सके। इसके बावजूद भी जिले में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। पोषण पुनर्वास केंद्र में ऐसे बच्चों के भर्ती होने की संख्या प्रति माह कम होती जा रही है। बाल पुष्टाहार विभाग की रिपोर्ट के अनुसार नवंबर माह में शून्य से छह साल तक के 37,714 बच्चों का वजन तोला गया। इनमें 10,597 बच्चे कुपोषित और 1891 अतिकुपोषित की श्रेणी में आए। ऐसे अतिकुपोषित बच्चों के प्रति न तो बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग रूचि ले रहा है और न ही स्वास्थ्य विभाग। जिसका परिणाम ये है कि एक नवंबर से अब तक सिर्फ 43 बच्चे ही पुनर्वास केंद्र में भर्ती हुए हैं। वर्तमान में 13 बच्चे भर्ती हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग कुपोषण को दूर करने के लिए लगातार अभियान चला रहा है।
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मिलता है भत्ता
अतिकुपोषित बच्चों के साथ उनकी मां को भी 14 दिनों तक पोषण पुनर्वास केंद्र में रखा जाता है। इसके लिए बच्चों की मां को 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से धनराशि भत्ते के रूप में दी जाती है। साथ ही दोनों समय बच्चे और मां को पौष्टिक भोजन दिया जाता है।
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नवंबर माह में पुनर्वास केंद्र में भर्ती
कुपोषित- 10,597 43 बच्चे
अतिकुपोषित - 1891
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अक्टूबर माह में भर्ती
कुपोषित - 10,619 24 बच्चे
अतिकुपोषित - 1849
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सितंबर माह में भर्ती
कुपोषित - 11074 25
अतिकुपोषित - 20061
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महिला चिकित्सक 12 दिसंबर तक मातृत्व अवकाश पर हैं। उनकी अनुपस्थिति में मेरे समेत और डॉ. दिग्विजय सिंह देखते हैं। इस समय वार्ड में 13 कुपोषित बच्चे हैं। एक बच्चे को 14 दिन रखा जाता है। वार्ड में 10 बेड के सापेक्ष 13 बच्चों का पोषण पुनर्वास हो रहा है। वार्ड में अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कराने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की है। इसके लिए उन्हें जागरुक किया जाएगा।
डॉ. हरवेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक चंदौसी।
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