फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sambhal News ›   handicraft,karigar,sambhal

हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट के घट गए आर्डर, जिले के कारीगर पलायन को मजबूर

Thu, 23 Jun 2016 01:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
ब्यूरो/अमर उजाला संभल Updated Thu, 23 Jun 2016 01:15 AM IST
विज्ञापन
बुनियादी सुविधाओं के अभाव और अपेक्षित सरकारी मदद न मिलने से सरायतरीन की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री पर संकट के बादल छा गए हैं। पांच वर्ष से लगातार हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट के आर्डर घट रहे हैं। इससे कारोबार में गिरावट आ गई है, नतीजतन कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। 
विज्ञापन


दिहाड़ी के बराबर भी आमदनी न हो पाने से हताश कारीगर रोजगार की तलाश में घर छोड़ने को मजबूर हैं। हाल यह है कि, पिछले एक वर्ष में पांच हजार से अधिक कारीगरों का पलायन हो चुका है, जबकि अभी जो लोग दस्तकारी कर रहे हैं उनकी भी हिम्मत टूट रही है। वे भी पलायन की तैयारी कर रहे हैं।
विज्ञापन


अमर उजाला की टीम ने कारीगरों से बातचीत की तो रोजी-रोटी के संकट का दर्द आंखों से छलक आया। बताया कि अधिकतर कारीगर दूसरे शहरों में अपने लिए रोजी-रोजगार तलाश रहे हैं। वे अपने उन साथियों से बातचीत करके विकल्प तलाश रहे हैं जो मंदी के दौर में पहले ही पलायन कर चुके हैं। हस्तशिल्पियों ने बताया कि मजदूरी के बराबर भी आमदनी नहीं हो रही है। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


हैंडीक्राफ्ट का कारोबार 500 करोड़ से घटकर 100 करोड़ पर आया
संभल। वैसे तो हैंडीक्राफ्ट के कारोबार पर सरायतरीन में कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं है लेकिन निर्यातकों से हुई बातचीत में जो आंकड़े सामने आ रहे हैं उसके मुताबिक पांच वर्ष पहले हैंडीक्राफ्ट अपने चरम पर था। नए नए आर्डर रोज मिला करते थे और हर गली मोहल्ले में हैंडीक्राफ्ट का कारोबार ही होता था लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। निर्यातकों के मुताबिक पांच सौ करोड़ रुपये सालाना का कारोबार घट कर अब करीब सौ करोड़ पर रह गया है।

एक ओर सरकार स्किल इंडिया की बात कर रही है दूसरी ओर पहले से स्किल्ड लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। सरायतरीन की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री का इतिहास करीब 250 वर्ष पुराना है। इस इंडस्ट्री को बचाए रखने के लिए प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। यही वजह है कि कारीगर पलायन कर रहे हैं।    
ताहिर सलामी, पदाधिकारी, हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन।

एक ओर चीन में छोटे से छोटे कारोबार को सरकारी सपोर्ट मिल रहा है। दूसरी ओर भारत में अभी तक इंस्पेक्टर राज कायम  है। उद्यमी को दूसरे दर्जे का आदमी माना जाता है। सरकारी विभागों में उसका कोई सम्मान नहीं है। बिजली, सड़क, सफाई जैसी मूलभूत सुविधओं के लिए इंडस्ट्री तरस रही है।

सरकारी योजनाएं हकीकत की जमीन पर उतर नहीं पाईं हैं। ऐसे में मुश्किलों का दौर चल रहा है। (हैंडीक्राफ्ट वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी कमल कौशल और सुहेल परवेज से बातचीत के आधार पर)

हस्तशिल्पियों के हालात
हैंडीक्राफ्ट के कारीगर शाकिर हुसैन पहले अपना कारखाना चला रहे थे अब दूसरे शहर में रोजी रोटी तलाशने की नौबत है। शाकिर  कुल चार भाई हैं। मोहम्मद रियाज लखनऊ में पान की दुकान में नौकरी कर रहे हैं। मोहम्मद ताहिर दिल्ली में कारपेंटरी कर रहे हैं। शाकिर और उनके भाई शाहनवाज कोई दूसरा काम तलाश रहे हैं क्योंकि पूरी मेहनत के बाद भी दस्तकारी में पेट भर पाना कठिन हो गया है। 

जहीर आलम सरायतरीन से हैंडीक्राफ्ट आइटम की सप्लाई जयपुर, जोधपुर और दिल्ली में करते थे। काफी आर्डर मिलते थे लेकिन मंदी ने सबकुछ चौपट कर दिया। तीन वर्ष में इनका कारोबार घटा और मजदूरी को मजबूर हो गए। अब दूसरे लोगों का काम लेकर फिनिशिंग करके गुजारा कर रहे हैं। जहीर आलम ने बताया कि अब इसमें भी संकट है। इसलिए दूसरे शहरों में पलायन करने की सोच रहे हैं।

रोजीरोटी की तलाश में परिवार से दूर हुए हस्तशिल्पी
संभल। सरायतरीन के मुंसरिफ ऐसे हुनरमंद कारीगर थे कि उनके हाथ के बने हैंडीक्राफ्ट आइटम विदेशियों को भी खूब भाते थे लेकिन अब मुंसरिफ बढ़ईगिरी कर रहे हैं। वह दिल्ली में फर्नीचर बनाने का ठेका लेते हैं और दूसरे कारपेंटरों के साथ काम करते हैं।


उनका कहना था कि अगर अपने शहर की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री में गुजारे लायक भी पैसा मिलता तो शहर नहीं छोड़ते। मुंसरिफ ने बताया कि दिल्ली में खर्चे ज्यादे हैं। इसलिए वहां परिवार को रखना मुश्किल होता है, मगर परिवार से दूर होने का दर्द उनकी बातों में सामने आ जाता है। 


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed