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Sambhal News: जीएसटी टीम की जांच में फर्जी निकला फर्म का पंजीकरण, प्राथमिकी दर्ज
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गुन्नौर(संभल)। बबराला क्षेत्र में एक फर्म द्वारा फर्जी तरीके से जीएसटी पंजीकरण लेकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला विभागीय जांच में सामने आया है। जांच के बाद राज्यकर अधिकारी ने बबराला थाने में बहजोई क्षेत्र के गांव सिंहपुर निवासी अशोक कुमार के खिलाफ तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जीएसटी विभाग की ओर से की गई जांच में पता लगा कि संबंधित फर्म के नाम पर बिना किसी वास्तविक व्यापारिक गतिविधि के कागजों पर ही लेनदेन दिखाया गया। फर्म से जुड़े पते नवीन मंडी स्थल, बबराला पर कोई दुकान, गोदाम अथवा व्यापारिक गतिविधि नहीं पाई गई। मंडी समिति के अधिकारियों ने भी बताया कि फर्म को लाइसेंस तो जारी किया गया था, लेकिन अब तक कोई स्थायी दुकान या व्यापार स्थल आवंटित नहीं किया गया। राज्यकर विभाग द्वारा की गई पूछताछ में फर्म से जुड़े कई मोबाइल नंबर बंद मिले, जबकि एक नंबर पर संपर्क करने पर संबंधित व्यक्ति ने स्वयं को फर्म से संबंध न होना बताया गया।
दस्तावेजों की जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आईं। फर्म के फर्जी पाए जाने पर विभाग की ओर से पहले नोटिस जारी किए गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद जीएसटी पंजीकरण निरस्त कर दिया गया।
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डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर, खंड-एक चंदौसी द्वारा उत्तर प्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम के तहत वर्ष 2019-20 के लिए लगभग 1.31 करोड़ रुपये कर व अर्थदंड लगाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म के माध्यम से फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेकर कर चोरी की गई और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया। बबराला थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार ने बताया प्रकरण में राज्यकर अधिकारी की तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है, जांच की जा रही है।
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जीएसटी विभाग की ओर से की गई जांच में पता लगा कि संबंधित फर्म के नाम पर बिना किसी वास्तविक व्यापारिक गतिविधि के कागजों पर ही लेनदेन दिखाया गया। फर्म से जुड़े पते नवीन मंडी स्थल, बबराला पर कोई दुकान, गोदाम अथवा व्यापारिक गतिविधि नहीं पाई गई। मंडी समिति के अधिकारियों ने भी बताया कि फर्म को लाइसेंस तो जारी किया गया था, लेकिन अब तक कोई स्थायी दुकान या व्यापार स्थल आवंटित नहीं किया गया। राज्यकर विभाग द्वारा की गई पूछताछ में फर्म से जुड़े कई मोबाइल नंबर बंद मिले, जबकि एक नंबर पर संपर्क करने पर संबंधित व्यक्ति ने स्वयं को फर्म से संबंध न होना बताया गया।
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दस्तावेजों की जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आईं। फर्म के फर्जी पाए जाने पर विभाग की ओर से पहले नोटिस जारी किए गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद जीएसटी पंजीकरण निरस्त कर दिया गया।
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डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर, खंड-एक चंदौसी द्वारा उत्तर प्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम के तहत वर्ष 2019-20 के लिए लगभग 1.31 करोड़ रुपये कर व अर्थदंड लगाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म के माध्यम से फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेकर कर चोरी की गई और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया। बबराला थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार ने बताया प्रकरण में राज्यकर अधिकारी की तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है, जांच की जा रही है।