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जमीन के विवाद में बवाल, तनाव
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Thu, 23 Jun 2016 01:13 AM IST
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संभल के रुकनुद्दीन सराय में युवक की गर्दन पकड़ते सीओ अफसर अब्बास जैदी।
- फोटो : amar ujala
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नखासा थाना क्षेत्र के तुर्तीपुर इल्हा में भीड़ ने बुधवार को शाम अचानक कबाड़ की दुकान का माल फेंकना शुरू कर दिया। इससे मौके पर बवाल हो गया। चार पांच सौ लोगों की भीड़ मौके पर थी।
सूचना मिलते ही नखासा थाना की पुलिस पहुंची लेकिन भीड़ बेकाबू थी और पुलिस कुछ नहीं कर पा रही थी जिस पर अधिकारियों को खबर दी गई। कई थानों की पुलिस पहुंची। सामान फेंकने वालों को डंडे के बल पर खदेड़ा गया। इसके बाद मौके पर चौकसी बरती जा रही है। डीएम और एएसपी ने हालात का जायजा लिया है। कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
नखासा थाना क्षेत्र के तुर्तीपुर इल्हा में बीस वर्ष एक जमीन को लेकर विवाद है। इस जमीन पर मोहल्ले के लोग मस्जिद का मालिकाना हक मानते हैं लेकिन कबाड़ के दुकानदार मोहम्मद नूर का कहना है कि जिसने मस्जिद को जमीन दी थी, उसी व्यक्ति ने उन्हें जमीन दी थी। इसे लेकर पुराना विवाद है। लेकिन इस मामले उस वक्त नया मोड़ आ गया जब बुधवार को शाम चार बजे के करीब कुछ लोग एकत्र हुए और देखते ही देखते भीड़ बढ़ने लगी।
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तमाम लोगों का कहना है कि वे कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं मस्जिद की जमीन को खाली करा रहे हैं। जब मोहम्मद नूर ने सामान फेंके जाने की जानकारी नखासा पुलिस को दी तो तत्काल पुलिस पहुंची लेकिन वहां के हालात देखकर पुलिस के हाथ पैर बंध गए। भीड़ बहुत थी और पुलिस काफी कम थी। हालात बेकाबू हो रहे थे। थाना प्रभारी केके तिवारी ने तत्काल अधिकारियों को खबर दी और इसके बाद कई थानों की पुलिस के साथ एएसपी कमलेश दीक्षित और सीओ अफसर अब्बास जैदी मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों ने थाना पुुलिस के माध्यम से उन लोगों को खदेड़ा जो सामान फेंक रहे थे। इसके बाद मौके के हालात पर काबू पाया गया। डीएम एनकेएस चौहान को जब खबर मिली तो वह भी मौके पर पहुंचे। जिलाधिकारी ने थाना पुलिस से घटनाक्रम की जानकारी ली और कार्रवाई के आदेश दिए।
क्या कर रहे थे बीट कांस्टेबिल और हल्का दरोगा
संभल। कई वर्ष से पुलिस के बड़े अधिकारी बीट कांस्टेबिल के सिस्टम को मजबूत करने का दावा कर रहे हैं लेकिन अभी तक सिस्टम काम नहीं कर रहा है। नखासा थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने यह साबित कर दिया है। यदि पुलिस पहले से सतर्क होती तो इतनी बड़ी वारदात नहीं होती। यह बात जिलाधिकारी ने भी कही। वहीं जिलाधिकारी जब मौके पर पहुंचे तो उन्होंने थाना प्रभारी को यह कहते हुए फटकार लगाई कि पहले से क्यों नहीं पता लगा। इतनी बड़ा मामला था तो पुलिस को सूचना तंत्र के पास जानकारी समय से क्यों नहीं थी? इस मामले में जांच होगी।
अवैध कब्जे के खिलाफ हमने कई बार अधिकारियों से शिकायत की। कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इसे लेकर कुछ लोगों की सहनशक्ति खत्म हो गई और उन्होंने सामान फेंक दिया। -मास्टर गफ्फार, मुतलवल्ली, बैनू खां वाली मस्जिद।
मेरे पास इस जमीन के कागज हैं। मैं भी अधिकारियों के पास कई बार गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। जिस वक्त भीड़ पहुंची उस वक्त कबाड़ की दुकान में मेरा बेटा था। भीड़ ने सामान उठाकर फेंकना शुरू किया तो मेरा बेटा जान बचाकर भाग गया था।
मोहम्मद नूर।
जमीन का मालिकाना हक किसका है। यह कागजों में देखकर तय किया जाएगा। इस मामले में जिनकी भी गलती है उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
एनकेएस चौहान, जिलाधिकारी।
जिस स्थान पर कबाड़ की दुकान है। उसकी लोकेशन देखकर प्रथम दृष्टया यही लगता है कि दुकान वाली जमीन या तो मस्जिद की है या फिर सरकारी लेकिन जमीन पर दुकान थी और उसका सामान फेंकने का हक किसी को नहीं है जब तक कि कोई समुचित आदेश न हो। - कमलेश दीक्षित, अपर पुलिस अधीक्षक, संभल।
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सूचना मिलते ही नखासा थाना की पुलिस पहुंची लेकिन भीड़ बेकाबू थी और पुलिस कुछ नहीं कर पा रही थी जिस पर अधिकारियों को खबर दी गई। कई थानों की पुलिस पहुंची। सामान फेंकने वालों को डंडे के बल पर खदेड़ा गया। इसके बाद मौके पर चौकसी बरती जा रही है। डीएम और एएसपी ने हालात का जायजा लिया है। कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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नखासा थाना क्षेत्र के तुर्तीपुर इल्हा में बीस वर्ष एक जमीन को लेकर विवाद है। इस जमीन पर मोहल्ले के लोग मस्जिद का मालिकाना हक मानते हैं लेकिन कबाड़ के दुकानदार मोहम्मद नूर का कहना है कि जिसने मस्जिद को जमीन दी थी, उसी व्यक्ति ने उन्हें जमीन दी थी। इसे लेकर पुराना विवाद है। लेकिन इस मामले उस वक्त नया मोड़ आ गया जब बुधवार को शाम चार बजे के करीब कुछ लोग एकत्र हुए और देखते ही देखते भीड़ बढ़ने लगी।
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तमाम लोगों का कहना है कि वे कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं मस्जिद की जमीन को खाली करा रहे हैं। जब मोहम्मद नूर ने सामान फेंके जाने की जानकारी नखासा पुलिस को दी तो तत्काल पुलिस पहुंची लेकिन वहां के हालात देखकर पुलिस के हाथ पैर बंध गए। भीड़ बहुत थी और पुलिस काफी कम थी। हालात बेकाबू हो रहे थे। थाना प्रभारी केके तिवारी ने तत्काल अधिकारियों को खबर दी और इसके बाद कई थानों की पुलिस के साथ एएसपी कमलेश दीक्षित और सीओ अफसर अब्बास जैदी मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों ने थाना पुुलिस के माध्यम से उन लोगों को खदेड़ा जो सामान फेंक रहे थे। इसके बाद मौके के हालात पर काबू पाया गया। डीएम एनकेएस चौहान को जब खबर मिली तो वह भी मौके पर पहुंचे। जिलाधिकारी ने थाना पुलिस से घटनाक्रम की जानकारी ली और कार्रवाई के आदेश दिए।
क्या कर रहे थे बीट कांस्टेबिल और हल्का दरोगा
संभल। कई वर्ष से पुलिस के बड़े अधिकारी बीट कांस्टेबिल के सिस्टम को मजबूत करने का दावा कर रहे हैं लेकिन अभी तक सिस्टम काम नहीं कर रहा है। नखासा थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने यह साबित कर दिया है। यदि पुलिस पहले से सतर्क होती तो इतनी बड़ी वारदात नहीं होती। यह बात जिलाधिकारी ने भी कही। वहीं जिलाधिकारी जब मौके पर पहुंचे तो उन्होंने थाना प्रभारी को यह कहते हुए फटकार लगाई कि पहले से क्यों नहीं पता लगा। इतनी बड़ा मामला था तो पुलिस को सूचना तंत्र के पास जानकारी समय से क्यों नहीं थी? इस मामले में जांच होगी।
अवैध कब्जे के खिलाफ हमने कई बार अधिकारियों से शिकायत की। कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इसे लेकर कुछ लोगों की सहनशक्ति खत्म हो गई और उन्होंने सामान फेंक दिया। -मास्टर गफ्फार, मुतलवल्ली, बैनू खां वाली मस्जिद।
मेरे पास इस जमीन के कागज हैं। मैं भी अधिकारियों के पास कई बार गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। जिस वक्त भीड़ पहुंची उस वक्त कबाड़ की दुकान में मेरा बेटा था। भीड़ ने सामान उठाकर फेंकना शुरू किया तो मेरा बेटा जान बचाकर भाग गया था।
मोहम्मद नूर।
जमीन का मालिकाना हक किसका है। यह कागजों में देखकर तय किया जाएगा। इस मामले में जिनकी भी गलती है उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
एनकेएस चौहान, जिलाधिकारी।
जिस स्थान पर कबाड़ की दुकान है। उसकी लोकेशन देखकर प्रथम दृष्टया यही लगता है कि दुकान वाली जमीन या तो मस्जिद की है या फिर सरकारी लेकिन जमीन पर दुकान थी और उसका सामान फेंकने का हक किसी को नहीं है जब तक कि कोई समुचित आदेश न हो। - कमलेश दीक्षित, अपर पुलिस अधीक्षक, संभल।