दुल्हन करती रही इंतजार: कांवड़ के जाम में फंसा दूल्हा, डेढ़ घंटे के सफर में लगे साढ़े आठ घंटे; भूखे रहे ग्रामीण
बुलंदशहर पुलिस ने रात के समय वाहनों का गुन्नौर (संभल) की ओर आवागमन को रोका था। उसी में पुलिस ने दूल्हे लोकेश शर्मा को बरात सहित वहीं रोक दिया और तीन घंटे रोके रखा। दूल्हा व अन्य परिजन मिन्नतें करते रहे लेकिन पुलिस ने नहीं छोड़ा।
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अलीगढ़ क्षेत्र से बरात लेकर जुनावई क्षेत्र के गांव रिवाड़ा में आ रहा दूल्हा कांवड़ के जाम में फंस गया और रात एक बजे बरात लेकर दुल्हन के घर पहुंचा। डेढ़ घंटे के सफर में साढ़े आठ घंटे लग गए। उधर दुल्हन इंतजार करती रही। दुल्हन पक्ष के लोग पल पल फोन करके बरात की स्थिति की जानकारी लेते रहे। आधी रात के बाद बरात पहुंचने पर सभी ने राहत की सांस ली और शादी की रस्मों को पूरा किया।
जुनावई थाना क्षेत्र के रिवाड़ा गांव निवासी बांके लाल शर्मा की बेटी भावना शर्मा की शादी अलीगढ़ क्षेत्र के देवी नगला निवासी लोकेश शर्मा से तय हुई थी। निर्धारित कार्यक्रम के तहत गुरुवार की शाम करीब छह बजे बरात को गांव रिवाड़ा पहुंचना था। दूल्हा बने लोकेश शर्मा अन्य परिजनों के साथ शाम करीब साढ़े चार बजे बरात लेकर चल दिए।
अनुमान था कि करीब डेढ़ घंटे में निर्धारित समय तक बरात गांव रिवाड़ा पहुंच जाएगी लेकिन गांव से निकलते ही हाईवे पर आए, तो कांवड़ियों के कारण जाम लगना शुरू हो गया। जाम से जूझते हुए दूल्हा व बरात करीब नौ बजे बुलंदशहर क्षेत्र में नरौरा बैराज पर पहुंचे।
बुलंदशहर पुलिस ने रात के समय वाहनों का गुन्नौर (संभल) की ओर आवागमन को रोका था। उसी में पुलिस ने दूल्हे लोकेश शर्मा को बरात सहित वहीं रोक दिया और तीन घंटे रोके रखा। दूल्हा व अन्य परिजन मिन्नतें करते रहे लेकिन पुलिस ने नहीं छोड़ा। रात करीब पौने 12 बजे पुलिस ने नरौरा बैराज से आगे जाने की अनुमति दी। इसके बाद रात करीब एक बजे बरात गांव रिवाड़ा पहुंची। इस दौरान दुल्हन इंतजार करती रही। दुल्हन के पिता व अन्य परिजन बरातियों से लगातार बात करते पल पल की जानकारी लेते रहे। एक बजे के बाद बरात की चढ़त शुरू हुई और रात करीब 3.30 बजे बरात को खाना मिला। शुक्रवार की दोपहर दो बजे बरात की विदाई कराई गई।
निमंत्रण के बावजूद बरात के इंतजार में दावत से वंचित रह गए ग्रामीण
दुल्हन के चाचा बाबू शर्मा ने बताया कि गांव में बरात खाना खाने के उपरांत ही गांव के लोगों को दावत खिलाने की परंपरा है। गांव में भी शादी की दावत दी गई थी और रिश्तेदार भी आए हुए थे। बरात के इंतजार में अधिकांश लोग लौट गए। रिश्तेदार व अन्य कुछ लोग रात साढ़े तीन बजे तक भूख रहे।