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Sambhal News: पैकिंग क्रेडिट अवधि बढ़ने से निर्यातकों को मिलेगा लाभ

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 17 Nov 2025 01:35 AM IST
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Exporters will benefit from the extension of packing credit period.
मुरादाबाद। आरबीआई ने पैकिंग क्रेडिट अवधि को 270 दिनों से बढ़ाकर 450 दिन कर दिया है। इससे जिले के निर्यातकों को फायदा मिलेगा। निर्यातकों का क्रेडिट एनपीए में नहीं जाएगा। निर्यातक पैसे की समस्या और बकाया भुगतान में हो रही समस्या से बच सकेंगे।
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जिला उद्योग केंद्र के अनुसार मुरादाबाद जिले करीब 1800 लोग आयात और निर्यात करते हैं। इसमें सैकड़ों निर्यातकों ने पैकिंग क्रेडिट का लाभ लिया है। अमेरिकी टैरिफ की वजह से पिछले छह महीने में जिले सैकड़ों निर्यातकों का करोड़ों का आर्डर कैंसिल हुआ है। इसके अलावा निर्यातकों को आर्डर भी कम मिला और शिपमेंट में भी देरी हुई। इसके कारण निर्यातकों को एक्सपोर्ट क्रेडिट समय से भुगतान करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आरबीआई ने पैकिंग क्रेडिट अवधि 180 दिन और बढ़ा दी है। इससे निर्यातक क्रेडिट समय से भुगतान कर सकेंगे। आरबीआई के अनुसार अगर उत्पाद शिप नहीं किया जा सका है तो पैकिंग क्रेडिट को देश के अंदर बिक्री या किसी दूसरे निर्यात ऑर्डर से चुकाया जा सकता है। एमएचईए के प्रेसिडेंट नावेद उर रहमान ने बताया कि निर्यातक पैकिंग क्रेडिट का भुगतान समय से नहीं कर पा रहे थे। आरबीआई द्वारा क्रेडिट अवधि बढ़ाए जाने की वजह से निर्यातकों को क्रेडिट भुगतान करने में फायदा मिलेगा।
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जिले के 9000 लोगों के पास वैलिड निर्यात-आयात कोड
-जिला उद्योग केंद्र के संयुक्त आयुक्त योगेश कुमार ने बताया कि जिले के 9000 लोगों के पास वैलिड निर्यात-आयात कोड है। इसमें दो हजार लोग ऐसे हैं जो निर्यात-आयात करते हैं। लेकिन इनमें भी तीन से चार सौ तक निर्यातक ऐसे हैं जो हर साल निर्यात करते हैं।
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मुख्य प्रावधान
- टर्म लोन पर एक सितंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच देय सभी किस्तों पर मोराटोरियम दिया जा सकता है।
- इस अवधि में ब्याज तो लगेगा, लेकिन साधार ब्याज पर और उस पर कोई चक्रवृद्धि ब्याज नहीं होगी।
- जमा हुआ ब्याज 31 मार्च 2026 के बाद एक या अधिक किस्तों में चुकाया जा सकेगा।

- वर्किंग कैपिटल लोन पर लगाए जाने वाले ब्याज की वसूली भी इस अवधि में स्थगित की जा सकती है।

- बैंकों को अधिकार दिया गया है कि वे इस दौरान निर्यातकों की ड्राइंग पावर का पुनर्मूल्यांकन कर सकें, ताकि नकदी संकट से जूझ रहे उद्योग अपनी गतिविधियां जारी रख सकें।
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