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पूर्व प्राचार्य और छात्रसंघ अध्यक्ष आमने-सामने
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Thu, 07 Jul 2016 12:52 AM IST
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एसएम कालेज में बुधवार को छात्रसंघ और पूर्व प्राचार्य भिड़ गए, दोनों पक्षों में जमकर नोकझोंक हो गया। इसको लेकर काफी देर तक हंगामा होता रहा। छात्रों का आरोप है कि रिटायर्ड शिक्षक अनाधिकृत तरीके से दिनभर कालेज में रहते हैं जो अनाधिकृत तरीके से हस्तक्षेप भी करते हैं। उनकी वजह से माहौल बिगड़ता है। आरोप लगाया कि, वे छात्रों को वाजिब मामले उठाने से रोकते हैं। वहीं पूर्व प्राचार्य ने इससे इंकार किया है।
हुआ यूं कि, छात्रसंघ अध्यक्ष सुरेंद्र यादव अन्य छात्रों के साथ एसएम कालेज के प्राचार्य डा.एसके अग्रवाल को छात्रावास खुलवाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने गए थे। इस दौरान वहां कुछ पूर्व प्राचार्य व शिक्षक भी बैठे थे। जिन्होंने छात्रों की मांग को लेकर कुछ कह दिया। यह बात छात्रों को नागवार गुजरी। इस पर भड़के छात्रों से पूर्व प्राचार्य और अन्य शिक्षकों से नोकझोंक हो गई। छात्रों का कहना था कि, सेवानिवृत्त शिक्षकों का दिनभर बिना किसी वजह के कालेज बने रहना ठीक नहीं है।
आरोप लगाया कि, वह अनावश्यक हस्तक्षेप भी करते रहते हैं। जब वह सेवानिवृत्त हो गए हैं तो कालेज में आकर बेवजह हस्तक्षेप करने की क्या आवश्यकता है। इस पर दूसरे शिक्षक भी बोल बैठे। आरोप है कि शिक्षकों ने उन्हें स्कूल से निकाले जाने की धमकी भी दे डाली। इससे बात बढ़ गई और शिक्षकों व छात्रों में काफी नोकझोंक हुई। बाद में किसी तरह मामला संभला
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छात्रावास खुलवाने की मांग-ज्ञापन सौंपने पहुंचे छात्रों का कहना था कि, छात्रावास काफी समय से बंद पड़ा है। छात्रावास में बाहर के सैकड़ों छात्र रहकर कालेज में शिक्षा ग्रहण कर सकते है। छात्रों को किराये पर रहकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर है।
इसके बंद रहने से इमारत भी खराब हो रही है। ज्ञापन सौंपने वालों में शिवम शर्मा, शुभम शर्मा, मुकेश यादव, मनवीर बघेल, रोमी चौधरी, महावीर यादव, अनुज वार्ष्णेय, दानवीर यादव, अमर, मुकुल, अरविंद, हरिओम, देव सिंह, जितेंद्र सिंह, केपी यादव, रवींद्र कुमार आदि शामिल रहे।
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हुआ यूं कि, छात्रसंघ अध्यक्ष सुरेंद्र यादव अन्य छात्रों के साथ एसएम कालेज के प्राचार्य डा.एसके अग्रवाल को छात्रावास खुलवाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने गए थे। इस दौरान वहां कुछ पूर्व प्राचार्य व शिक्षक भी बैठे थे। जिन्होंने छात्रों की मांग को लेकर कुछ कह दिया। यह बात छात्रों को नागवार गुजरी। इस पर भड़के छात्रों से पूर्व प्राचार्य और अन्य शिक्षकों से नोकझोंक हो गई। छात्रों का कहना था कि, सेवानिवृत्त शिक्षकों का दिनभर बिना किसी वजह के कालेज बने रहना ठीक नहीं है।
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आरोप लगाया कि, वह अनावश्यक हस्तक्षेप भी करते रहते हैं। जब वह सेवानिवृत्त हो गए हैं तो कालेज में आकर बेवजह हस्तक्षेप करने की क्या आवश्यकता है। इस पर दूसरे शिक्षक भी बोल बैठे। आरोप है कि शिक्षकों ने उन्हें स्कूल से निकाले जाने की धमकी भी दे डाली। इससे बात बढ़ गई और शिक्षकों व छात्रों में काफी नोकझोंक हुई। बाद में किसी तरह मामला संभला
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छात्रावास खुलवाने की मांग-ज्ञापन सौंपने पहुंचे छात्रों का कहना था कि, छात्रावास काफी समय से बंद पड़ा है। छात्रावास में बाहर के सैकड़ों छात्र रहकर कालेज में शिक्षा ग्रहण कर सकते है। छात्रों को किराये पर रहकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर है।
इसके बंद रहने से इमारत भी खराब हो रही है। ज्ञापन सौंपने वालों में शिवम शर्मा, शुभम शर्मा, मुकेश यादव, मनवीर बघेल, रोमी चौधरी, महावीर यादव, अनुज वार्ष्णेय, दानवीर यादव, अमर, मुकुल, अरविंद, हरिओम, देव सिंह, जितेंद्र सिंह, केपी यादव, रवींद्र कुमार आदि शामिल रहे।