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Sambhal News: लाखाें खर्च कर डाले फिर भी कहीं गंदगी तो कहीं लटके ताले
Wed, 10 Jul 2024 05:22 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Wed, 10 Jul 2024 05:22 AM IST
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चंदौसी (संभल)। सरकार ने भले ही खुले में शौच बंद करने के लिए स्वच्छता मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च किए हों, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। जिले के ग्रामीण इलाकों के सामुदायिक शौचालयों का संचालन सही से नहीं हो पा रहा है। देखरेख के अभाव में कहीं पर सामुदायिक शौचालयों में गंदगी की भरमार है तो कहीं पर तालों में कैद हैं।
जनपद की 670 ग्राम पंचायतों में से अधिकांश में स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। जिन पर छह से दस लाख रुपये तक खर्च किए गए। इतना ही नहीं इनकी देखभाल व संचालन के लिए केयरटेकर की नियुक्ति भी की गई है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद जिम्मेदारों की उदासीनता की वजह से लोगों को सामुदायिक शौचालयों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कुछ सामुदायिक शौचालयों पर तो निर्माण के बाद से ही ताला लटका है। जिसे लेकर ग्रामीणों ने ब्लॉक से लेकर मुख्यालय तक पर शिकायत की, लेकिन नतीजा सिफर रहा। इसके अलावा कई शौचालय ऐसे हैं, जिनमें देखरेख की वजह से गंदगी पसरी है। टाइल्स और टोंटी टूट चुकी हैं। पानी तक की व्यवस्था नहीं है। आमजन की सुविधा के लिए बने ये, शौचालय उन्हें अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। जरूरत पड़ने पर लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
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जुनावई ब्लॉक
पुसावली चिंगड़िया गांव में बना सामुदायिक शौचालय पर निर्माण के बाद से ही ताला लटक रहा है। गांव निवासी भीमसेन ने बताया कि कई बार अधिकारियों से शिकायत कर सामुदायिक शौचालय का ताला खुलवाने की मांग की है। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। गांव गेहट के शौचालय की टोंटी खराब है। पानी तक की व्यवस्था नहीं है। वहीं बबक्करपुर गांव में शौचालय के गेट पर ताला लगा है। निर्माण के बाद कुछ दिन शौचालय खुला रहा। लोगों ने इस्तेमाल भी किया, लेकिन फिर ताला लगा दिया गया।
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गुन्नौर ब्लॉक
गढि़या गांव का शौचालय करीब एक साल से बंद पड़ा है। राकेश यादव ने बताया कि गांव में सामुदायिक शौचालय पर निर्माण के बाद से ही इसमें ताला लगा दिया गया। कभी कोई अधिकारी गांव में निरीक्षण के लिए आता है तो शौचालय का ताला खुलता है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों के लिए ये अनुपयोगी है। जिन ग्रामीणों के घरों में शौचालयों नहीं हैं, वे खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं।
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बनियाखेड़ा ब्लॉक
बनियाखेड़ा गांव के सामुदायिक शौचालय का ताला लगा रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश शौचालय बंद ही रहता है। कई बार शिकायत की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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रजपुरा ब्लॉक
भिरावटी ग्राम पंचायत में बना शौचालय भी अधिकांश बंद रहता है। जरूरत पड़ने पर लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। रजपुरा पैंठ बाजार में बना शौचालय भी बंद रहता है। जबकि यहां रोजाना हजारों की संख्या में लोग आते हैं। शौच और लघुशंका के लिए उन्हें परेशान होना पड़ता है।
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वर्जन
सभी सामुदायिक शौचालय नियमित रूप से खुल रहे हैं। प्रत्येक शौचालय पर केयरटेकर के नियुक्ति की गई है। सुबह पांच बजे से आठ बजे तक और शाम को पांच बजे से सात बजे तक शौचालय खुलने का समय है।-उपेंद्र पांडेय, डीपीआरओ, संभल।
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जनपद की 670 ग्राम पंचायतों में से अधिकांश में स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। जिन पर छह से दस लाख रुपये तक खर्च किए गए। इतना ही नहीं इनकी देखभाल व संचालन के लिए केयरटेकर की नियुक्ति भी की गई है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद जिम्मेदारों की उदासीनता की वजह से लोगों को सामुदायिक शौचालयों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कुछ सामुदायिक शौचालयों पर तो निर्माण के बाद से ही ताला लटका है। जिसे लेकर ग्रामीणों ने ब्लॉक से लेकर मुख्यालय तक पर शिकायत की, लेकिन नतीजा सिफर रहा। इसके अलावा कई शौचालय ऐसे हैं, जिनमें देखरेख की वजह से गंदगी पसरी है। टाइल्स और टोंटी टूट चुकी हैं। पानी तक की व्यवस्था नहीं है। आमजन की सुविधा के लिए बने ये, शौचालय उन्हें अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। जरूरत पड़ने पर लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
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जुनावई ब्लॉक
पुसावली चिंगड़िया गांव में बना सामुदायिक शौचालय पर निर्माण के बाद से ही ताला लटक रहा है। गांव निवासी भीमसेन ने बताया कि कई बार अधिकारियों से शिकायत कर सामुदायिक शौचालय का ताला खुलवाने की मांग की है। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। गांव गेहट के शौचालय की टोंटी खराब है। पानी तक की व्यवस्था नहीं है। वहीं बबक्करपुर गांव में शौचालय के गेट पर ताला लगा है। निर्माण के बाद कुछ दिन शौचालय खुला रहा। लोगों ने इस्तेमाल भी किया, लेकिन फिर ताला लगा दिया गया।
गुन्नौर ब्लॉक
गढि़या गांव का शौचालय करीब एक साल से बंद पड़ा है। राकेश यादव ने बताया कि गांव में सामुदायिक शौचालय पर निर्माण के बाद से ही इसमें ताला लगा दिया गया। कभी कोई अधिकारी गांव में निरीक्षण के लिए आता है तो शौचालय का ताला खुलता है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों के लिए ये अनुपयोगी है। जिन ग्रामीणों के घरों में शौचालयों नहीं हैं, वे खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं।
बनियाखेड़ा ब्लॉक
बनियाखेड़ा गांव के सामुदायिक शौचालय का ताला लगा रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश शौचालय बंद ही रहता है। कई बार शिकायत की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रजपुरा ब्लॉक
भिरावटी ग्राम पंचायत में बना शौचालय भी अधिकांश बंद रहता है। जरूरत पड़ने पर लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। रजपुरा पैंठ बाजार में बना शौचालय भी बंद रहता है। जबकि यहां रोजाना हजारों की संख्या में लोग आते हैं। शौच और लघुशंका के लिए उन्हें परेशान होना पड़ता है।
वर्जन
सभी सामुदायिक शौचालय नियमित रूप से खुल रहे हैं। प्रत्येक शौचालय पर केयरटेकर के नियुक्ति की गई है। सुबह पांच बजे से आठ बजे तक और शाम को पांच बजे से सात बजे तक शौचालय खुलने का समय है।-उपेंद्र पांडेय, डीपीआरओ, संभल।