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Sambhal News: पवांसा में काशी कुंड तीर्थ को संवारने की कवायद शुरू

Thu, 13 Feb 2025 01:27 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Thu, 13 Feb 2025 01:27 AM IST
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Efforts to beautify Kashi Kund Tirtha started in Pawansa
संभल। गांव पवांसा में स्थित काशी कुंड तालाब के सौंदर्यीकरण के संबंध में हुई शिकायत के बाद अधिकारियों ने संज्ञान लिया है। तालाब को संवारने की कवायद शुरू की गई है। बुधवार को लेखपाल पैमाइश के लिए पहुंचे थे। इस दौरान रास्ते पर कब्जा मिला, जिसे हटाने के लिए संबंधित को निर्देशित किया है।
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दरअसल, पवांसा के जंगल में प्राचीन तीर्थ काशी कुंड स्थित है। बुजुर्ग बताते हैं कि संभल में स्थित तीर्थ स्थलों से संबंधित एक तीर्थ काशी जी पवांसा के जंगल में स्थित है। खास बात यह है कि इस कुंड में हर समय जल भरा रहता है। उसका जल स्वच्छ और एकदम साफ आसमानी रंग का मौजूद है। बताते हैं कि प्राचीन समय में संभल में तीर्थ स्थलों के निर्माण के लिए देवताओं द्वारा पवांसा के जंगल से मिट्टी ले जाकर निर्माण किया गया था। बताया जाता है कि रात्रि के समय देवताओं द्वारा मिट्टी ले जाई जा रही थी। रात में किसी समय किसी महिला द्वारा घर पर आटा पीसने के लिए हाथ से चलने वाली चक्की चला दी। जिससे देवताओं ने लोगों के जागने और दिन निकलने का आभास होने पर अपना कार्य बंद कर दिया। तभी से वहां पर पानी भरा रहता है। लोगों का मानना है कि आज तक उस कुंड का पानी नहीं सूखा है। कुंड में साफ स्वच्छ जल हर समय भरा रहता है। काशी कुंड के बीच में जल स्रोत के लिए कुएं का जिक्र भी किया जाता है। काशी कुंड पवांसा के जंगल में स्थित होने का जिक्र पुराने समय के इतिहास में भी बताया जाता है। बताते हैं कि प्राचीन समय में राजा हरिश्चंद्र द्वारा राज त्याग करने के बाद कुछ समय काशी जी कुंड पर व्यतीत किया गया था। काशी जी कुंड के चारों ओर पर ईंटों से सीढ़ियां बनी हुई थी। जो समय के अनुसार अब दिखाई नहीं देती है। किसी समय अन्य जिले के लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार करने के लिए आते थे और स्नान भी किया जाता था। यह संभल में स्थित तीर्थ स्थलों में पवांसा स्थित काशी जी कुंड भी सम्मिलित है। बुजुर्गों का कहना है कि पुराने समय में तीज त्योहार पर काशी कुंज कुंड से लोग मिट्टी ले जाकर लिसाई और लिपाई करते थे। अब ग्रामीणों द्वारा इस स्थान को काशी पार नाम से पुकारा जाता है। मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर काशी कुंड को जाने वाले मार्गों को कब्जा मुक्त और काशी कुंड के सौंदर्यीकरण की मांग की गई थी। बुधवार को लेखपाल सचिन कुमार ने मौके पर पहुंचकर काशी कुंज कुंड पर पहुंचकर रास्ते पर अवैध कब्जा को लेकर पैमाइश की।
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चकरोड़ पर अवैध कब्जा है, जिसकी पैमाइश की गई है। मनरेगा योजना से रास्ते पर कार्य किए जाने की सूचना बीडीओ पवांसा को दे दी गई है, ताकि रास्ते का कार्य जल्दी ही पूरा किया जा सके। साथ ही, प्राचीन काशी जी कुंड तीर्थ का सौंदर्यीकरण कराए जाने के लिए पर्यटन विभाग और तहसील प्रशासन को रिपोर्ट बनाकर भेजी जाएगी।
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सचिन कुमार, लेखपाल, पवांसा
मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर इसकी शिकायत की थी। लेखपाल ने मौके पर आकर पैमाइश की है। प्राचीन काशी जी कुंड तीर्थ आस्था का प्रतीक है। इसे संवारा जाना चाहिए।

अवध प्रताप सिंह, पवांसा
इस तीर्थ पर मुंडन संस्कार का कार्यक्रम करने के लिए लोग बाहर से आते थे। यह इतिहास में भी दर्ज है। प्राचीन काशी जी कुंज तीर्थ का सौंदर्यीकरण प्रशासन के द्वारा कराया जाए।
सुभाष सिंह राघव, गांव पवांसा
देखरेख के अभाव में अब सब कुछ नष्ट हो चुका है लेकिन कुंड में आज भी पानी भरा हुआ है। जो बेहद ही साफ शुद्ध जल है।
कृष्णपाल सिंह राघव, गांव पवांसा
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