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वेतनवृद्धि से वंचित शिक्षक मायूस
ब्यूरो अमर उजाला / संभ्ाल
Updated Fri, 06 Apr 2018 01:34 AM IST
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teacher shimla
बेसिक शिक्षा विभाग के तमाम शिक्षकों को चयन वेतनमान और वेतनवृद्धि का लाभ नहीं मिल पाया। शिक्षकों में मायूसी का माहौल है। क्योंकि दूसरे जिलों में 7वें वेतन आयोग के संशोधित आदेश के बाद शिक्षकों को चयन वेतनमान और उससे जुड़ी एक वेतन वृद्धि से लाभान्वित किया जा चुका है। संभल में अभी प्रतीक्षा ही हो रही है। अकेले संभल ब्लाक में 40 से अधिक शिक्षक प्रभावित हैं। जिले में 300 से अधिक शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में दस वर्ष की संतोषजनक सेवा करने पर चयन वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए। ऐसे शिक्षकों को चयन वेतनमान के संग वेतनवृद्घि से मिलनी है। 7वें वेतन आयोग की संस्तुति में भी इसका स्पष्ट उल्लेख है। हालांकि जब 7वां वेतन आयोग लागू हुआ तो कुछ विसंगतियां सामने आई थीं। इस पर पुन: संशोधित शासनादेश जारी किया गया। इसके अनुुसार, शिक्षकों को भी चयनवेतनमान का लाभ मिलना चाहिए। पर जनपद संभल में बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक वंचित हैं।
शिक्षकों का कहना है कि यह लाभ वर्ष 2017 तक मिल जाना चाहिए था पर ऐसा संभव नहीं हो सका। हालांकि शिक्षा विभाग ने चयन वेतनमान का लाभ देने के लिए कागजी कार्रवाई पूरी करा ली है। लेकिन उन शिक्षकों में मायूसी का माहौल बना हुआ है, जो अभी तक इस लाभ से वंचित हैं। बहरहाल, विभाग की उदासीनता कहें या लापरवाही। पर शासनादेश का पालन कराने में कहीं न कहीं देरी हो रही है।
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बेसिक शिक्षा विभाग में दस वर्ष की संतोषजनक सेवा करने पर चयन वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए। ऐसे शिक्षकों को चयन वेतनमान के संग वेतनवृद्घि से मिलनी है। 7वें वेतन आयोग की संस्तुति में भी इसका स्पष्ट उल्लेख है। हालांकि जब 7वां वेतन आयोग लागू हुआ तो कुछ विसंगतियां सामने आई थीं। इस पर पुन: संशोधित शासनादेश जारी किया गया। इसके अनुुसार, शिक्षकों को भी चयनवेतनमान का लाभ मिलना चाहिए। पर जनपद संभल में बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक वंचित हैं।
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शिक्षकों का कहना है कि यह लाभ वर्ष 2017 तक मिल जाना चाहिए था पर ऐसा संभव नहीं हो सका। हालांकि शिक्षा विभाग ने चयन वेतनमान का लाभ देने के लिए कागजी कार्रवाई पूरी करा ली है। लेकिन उन शिक्षकों में मायूसी का माहौल बना हुआ है, जो अभी तक इस लाभ से वंचित हैं। बहरहाल, विभाग की उदासीनता कहें या लापरवाही। पर शासनादेश का पालन कराने में कहीं न कहीं देरी हो रही है।
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