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दीन को समझो, अमल करो, बदल जाएगी जिंदगी : मौलाना साद
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Mon, 26 Dec 2016 01:17 AM IST
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उलमा-ए-इकराम ने यह बात अपनी तकरीरों में इज्तिमा में आए अकीदतमंदों को बार-बार समझाई। उलमा ने कहा कि दीनी बातों पर जब तक खुद अमल नहीं करोगे, तब तक लोगों को दीन के बारे में बताने और नसीहत देने का कोई फायदा नहीं मिलेगा क्योंकि लोग किसी के कहने से नहीं बल्कि उसके अमल को देखकर सीखते हैं। इज्तिमा का मकसद अच्छाइयों को अपने किरदार के जरिए आम करना है।
वाजिदपुरम कोल्ड स्टोरेज के पीछे चल रहे इज्तिमा के दूसरे दिन रविवार को मौलाना साद कांधलवी ने कहा कि अगर आप अपने दीन पर खुद अमल नहीं करते हैं तो आपकी सलाह और नसीहत को कोई तवज्जों नहीं मिल सकेगी। अल्लाह के यहां भी कुछ हासिल न होगा। अल्लाह के बंदों को न केवल बुरे काम से दूर रहना है, बल्कि बुरे काम के बारे में चर्चा भी नहीं करनी है। अच्छे अमल जिंदगी में लाएं। हर तरह की बुराई से खुद को बचाएं। दीनी उसूलों पर चलें। नबी-ए-करीम की सीरत पर अमल करें। अगर किसी शख्स में 99 बुराइयां हैं और महज एक अच्छाई है तो उस अच्छाई को देखो।
मौलाना मोमिन अपने खिताब में कहा कि किसी के लिए नेकी करो तो दिल से करो। दिखावा नहीं करो। दिल से नेकी के काम करोगे तो किरदार बनेगा। उन्होंने कुरान और सुन्नत के मुताबिक जिंदगी जीने की गुजारिश की। दिल्ली से आए मौलाना शौकत ने इज्तिमा का मकसद समझाया और अच्छे काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि आपको अपनी आखिरत संभालने की फिक्र आ जाए तो समझो कि आपने कुछ सीखा है। हमारी बात और अमल में कोई फर्क न हो। जो जुबान से कहा जाए वो अमल से साबित हो। दीन-ए-इस्लाम यही सिखाता है।
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अपने आमाल से किसी को तकलीफ न पहुंचाएं : मौलाना शौकत
कई मुल्कों में दीनी तकरीर कर चुके मौलाना शौकत रविवार को इज्तिमा में संभल के कुछ खास लोगों से रूबरू हुए। एक छोटे से पांडाल में करीब घंटेभर चले अपनी तकरीर में उन्होंने कुरान और हदीस की रोशनी में दीनी बातें की।
उन्होंने कहा कि पूरी कायनात अल्लाह का कुनबा है। अपने आमाल से किसी को तकलीफ न पहुंचाएं। जिंदगी जीने के लिए वो तरीका अपनाओ जो हर किसी को राहत पहुंचाए। मौलाना शौकत ने कहा कि अपने दिमाग से यह बात निकाल दो कि कौन हिंदू है और कौन मुसलमान क्योंकि अल्लाह की इस कायनात में रसूल के बंदों को हरेक के लिए हक और हुकूक अदा करना सिखाया गया है।
किसी की गरीबी जिल्लत नहीं है और न ही किसी की अमीरी इज्जत का विषय है। बल्कि अल्लाह हर किसी को आजमाता है। किसी को दौलत देकर और किसी को गरीब बनाकर। जिसके पास दौलत थी, उसने खुदा की राह में क्या किया।
हर किसी अपने आमाल का हिसाब देना होगा। अच्छा काम करने वालों को दुनिया में भी अच्छा बदला मिलता है।
मरने के बाद उनके लिए जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं। इस मौके पर दुआ कराई गई। इसमें कहा गया कि ऐ अल्लाह हम सबको नबी के बताए हुए रास्ते पर चलने की तौफीक दे दे। हमारी जिंदगी संवार दे। तकरीर के दौरान पूरा माहौल खुदा की बंदगी में डूब गया।
संभल के तीन दिनी इज्तिमा में दूसरे दिन रविवार को भी बाहरी तब्लीगी जमात के आने का सिलसिला चलता रहा।
इज्तिमा में एक दिन देरी से पहुंचने वाली जमातों को इस बात मलाल था कि वह समय नहीं पहुंच पाए, लेकिन इस बात की खुशी थी कि वह तीसरे दिन दुआ में शामिल हो जाएंगे। तब्लीगी जमात को संभल तक पहुंचाने के लिए कोहिनूर तिराहे तीस बसें लगाईं गई।
इज्तिमा के दूसरे दिन रविवार को दिनभर रेलवे स्टेशन पर तब्लीगी जमात का तांता लगा रहा। ट्रेनें आती रहीं और जमातें पहुंचती रही। उनकी भीड़ के आगे गाड़ियां कम पड़ गई। इन तब्लीगी जमातों को स्टेशन से कोहिनूर तिराहे तक छोटी गाड़ियों से पहुंचाया गया। जहां से बसों से उन्हें संभल के लिए रवाना किया गया। इसके लिए तीस बसें लगाई गई है। वहीं इतनी ही छोटी गाड़ियां भी लगाई र्गई। तब्लीगी जमात की खिदमत के लिए करीर तीन सौ वालंटियर चौबीस घंटे लगे रहे।
जवाब में कहा गया है कि बहावी फिरके का अकीदा ठीक नहीं है। इसलिए इसमें सुन्नी मुसलमानों को शिरकत नहीं करनी चाहिए। फतवे का स्थानीय उलमाओं और मुफ्तियों ने समर्थन किया है। समर्थन कर रहे मुफ्ती ए आजम संभल मुफ्ती अलाउद्दीन अजमली और मुफ्ती ए आजम सिरसी आलम रजा खां नूरी ने कहा कि सुन्नी मुसलमान इज्तिमे में कतई भागीदारी न करें। अपने ईमान की हिफाजत करें।
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वाजिदपुरम कोल्ड स्टोरेज के पीछे चल रहे इज्तिमा के दूसरे दिन रविवार को मौलाना साद कांधलवी ने कहा कि अगर आप अपने दीन पर खुद अमल नहीं करते हैं तो आपकी सलाह और नसीहत को कोई तवज्जों नहीं मिल सकेगी। अल्लाह के यहां भी कुछ हासिल न होगा। अल्लाह के बंदों को न केवल बुरे काम से दूर रहना है, बल्कि बुरे काम के बारे में चर्चा भी नहीं करनी है। अच्छे अमल जिंदगी में लाएं। हर तरह की बुराई से खुद को बचाएं। दीनी उसूलों पर चलें। नबी-ए-करीम की सीरत पर अमल करें। अगर किसी शख्स में 99 बुराइयां हैं और महज एक अच्छाई है तो उस अच्छाई को देखो।
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मौलाना मोमिन अपने खिताब में कहा कि किसी के लिए नेकी करो तो दिल से करो। दिखावा नहीं करो। दिल से नेकी के काम करोगे तो किरदार बनेगा। उन्होंने कुरान और सुन्नत के मुताबिक जिंदगी जीने की गुजारिश की। दिल्ली से आए मौलाना शौकत ने इज्तिमा का मकसद समझाया और अच्छे काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि आपको अपनी आखिरत संभालने की फिक्र आ जाए तो समझो कि आपने कुछ सीखा है। हमारी बात और अमल में कोई फर्क न हो। जो जुबान से कहा जाए वो अमल से साबित हो। दीन-ए-इस्लाम यही सिखाता है।
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अपने आमाल से किसी को तकलीफ न पहुंचाएं : मौलाना शौकत
कई मुल्कों में दीनी तकरीर कर चुके मौलाना शौकत रविवार को इज्तिमा में संभल के कुछ खास लोगों से रूबरू हुए। एक छोटे से पांडाल में करीब घंटेभर चले अपनी तकरीर में उन्होंने कुरान और हदीस की रोशनी में दीनी बातें की।
उन्होंने कहा कि पूरी कायनात अल्लाह का कुनबा है। अपने आमाल से किसी को तकलीफ न पहुंचाएं। जिंदगी जीने के लिए वो तरीका अपनाओ जो हर किसी को राहत पहुंचाए। मौलाना शौकत ने कहा कि अपने दिमाग से यह बात निकाल दो कि कौन हिंदू है और कौन मुसलमान क्योंकि अल्लाह की इस कायनात में रसूल के बंदों को हरेक के लिए हक और हुकूक अदा करना सिखाया गया है।
किसी की गरीबी जिल्लत नहीं है और न ही किसी की अमीरी इज्जत का विषय है। बल्कि अल्लाह हर किसी को आजमाता है। किसी को दौलत देकर और किसी को गरीब बनाकर। जिसके पास दौलत थी, उसने खुदा की राह में क्या किया।
हर किसी अपने आमाल का हिसाब देना होगा। अच्छा काम करने वालों को दुनिया में भी अच्छा बदला मिलता है।
मरने के बाद उनके लिए जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं। इस मौके पर दुआ कराई गई। इसमें कहा गया कि ऐ अल्लाह हम सबको नबी के बताए हुए रास्ते पर चलने की तौफीक दे दे। हमारी जिंदगी संवार दे। तकरीर के दौरान पूरा माहौल खुदा की बंदगी में डूब गया।
पिछड़ गए तो क्या हुआ दुआ में होेंगे शामिल, दूसरे दिन भी लोग आए
संभल के तीन दिनी इज्तिमा में दूसरे दिन रविवार को भी बाहरी तब्लीगी जमात के आने का सिलसिला चलता रहा।
इज्तिमा में एक दिन देरी से पहुंचने वाली जमातों को इस बात मलाल था कि वह समय नहीं पहुंच पाए, लेकिन इस बात की खुशी थी कि वह तीसरे दिन दुआ में शामिल हो जाएंगे। तब्लीगी जमात को संभल तक पहुंचाने के लिए कोहिनूर तिराहे तीस बसें लगाईं गई।
इज्तिमा के दूसरे दिन रविवार को दिनभर रेलवे स्टेशन पर तब्लीगी जमात का तांता लगा रहा। ट्रेनें आती रहीं और जमातें पहुंचती रही। उनकी भीड़ के आगे गाड़ियां कम पड़ गई। इन तब्लीगी जमातों को स्टेशन से कोहिनूर तिराहे तक छोटी गाड़ियों से पहुंचाया गया। जहां से बसों से उन्हें संभल के लिए रवाना किया गया। इसके लिए तीस बसें लगाई गई है। वहीं इतनी ही छोटी गाड़ियां भी लगाई र्गई। तब्लीगी जमात की खिदमत के लिए करीर तीन सौ वालंटियर चौबीस घंटे लगे रहे।
सभी लोगों को मिल जुलकर इज्तिमा में होना चाहिए शामिल
संभल(ब्यूरो)। तुर्तीपुर इल्हा स्थित खानकाहे कर्बला संभल के कार्यालय पर बैठक हुई। बैठक में खानकाहे कर्बला के सज्जादानशीन एवं मेला संयोजक मियांजी इंतेजार हुसैन ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां लोकतंत्र है। प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता संविधान में निहित है। प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्वक अपने धर्म के प्रचार करने का हक है। हम लोगों को हिंदू, मुस्लिम, शिया, सुन्नी और देवबंदी जैसे शब्दों को छोड़कर मिलजुलकर इज्तिमा को कामयाब बनाना चाहिए। बैठक में जफरुल इस्लाम, डा. सलमान खां, रेहान खान, मोहम्मद मेराज मुस्तफा खान, डा. इमरत हुसैन, शुएब खां, वासित खां, मरगूब, बाबा जाफर मियां, हाफिज कासिम, हाफिज अनस, जुनैद, मुजीब, आरिफ अली, कल्लू खां, नदीम तुर्की आदि मौजूद रहे।‘बहावियों के इज्तिमे से दूर रहें सुन्नी मुसलमान’
संभल। सुन्नी मुसलमानों को इज्तिमे से दूर रहने का फतवा दिया गया है। संभल के सैफ खां सराय निवासी हाजी वजीर हुसैन ने बरेली शरीफ के दारुल इफ्ता से सवाल किया था कि बहावियों के इज्तिमा में में शिरकत की जाए या नहीं? इस सवाल पर बरेली शरीफ से लिखित जवाब मिला।जवाब में कहा गया है कि बहावी फिरके का अकीदा ठीक नहीं है। इसलिए इसमें सुन्नी मुसलमानों को शिरकत नहीं करनी चाहिए। फतवे का स्थानीय उलमाओं और मुफ्तियों ने समर्थन किया है। समर्थन कर रहे मुफ्ती ए आजम संभल मुफ्ती अलाउद्दीन अजमली और मुफ्ती ए आजम सिरसी आलम रजा खां नूरी ने कहा कि सुन्नी मुसलमान इज्तिमे में कतई भागीदारी न करें। अपने ईमान की हिफाजत करें।