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संभल में बुखार का प्रकोप जारी, एक और की जान गई
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कुढ़ फतेहगढ़। नरौली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र में बुखार का कहर पिछले एक माह से जारी है। अकेले कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र में एक माह में 12 लोगों की मौत बुखार से हो चुकी हैं। जिसमें मुड़िया खेड़ा में तीन, पल्था मिठनपुर में पांच, मिलक दियौरा खास में तीन, जहांगीर पुर में एक तथा चितौरा गांव में दो मौतें अब तक बुखार से हो चुकी हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग लापरवाह बना हुआ है।
रविवार की सुबह 9 बजे चितौरा गांव निवासी सावित्री (45) पत्नी गंगा सहाय पाल की बुखार से मौत हो गई। उसे एक दिन पहले शनिवार को बुखार आया था। बुखार आने पर सावित्री के पति गंगा सहाय ने पड़ोस के गांव रहोली से निजी चिकित्सक से दवाई दिलवा दी। लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और उसने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों ने बताया कि गंगा सहाय की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से वह अपनी पत्नी को उपचार के लिए शहर चंदौसी नहीं ले जा सका।
सावित्री की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। इससे 15 दिन पहले भी सतीश की पत्नी सुमन यादव (26) की मौत भी बुखार से हो चुकी है। साथ ही गांव में इस समय 50 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। गांव के बृजेश यादव, सरस्वती, ज्योति, दीपक, शरवती सावित्री, सीमा, शैलेश, सुभाष, गुंजन रीना आदि सहित 50 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग लापरवाह बना हुआ है। स्थिति अधिक खराब होने के बाद स्वास्थ्य विभाग जागता है। कैंप लगाकर दवाइयां वितरित करने में भी केवल औपचारिकता ही निभाई जाती हैं। चिकित्सा कर्मी गांव में कैंप लगाकर केवल एक ही दिन दवाइयां वितरित करते हैं। जिससे मरीज का सही होना असंभव है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कम से कम तीन चार दिन तक दवाइयां वितरित की जाये जिससे मरीज को पूर्ण उपचार मिल सके।
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इन ग्रामीणों की बुखार से हो चुकी है मौत
चंदौसी। बुखार की चपेट में आकर एक माह के अंदर 12 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। जिसमें गांव मुड़िया खेड़ा के राजाराम, भूरा, हमीदन, गांव जहांगीरपुर के अजुध्धी, मिलक दियौरा खास के सुभाष कुमार, धर्मवती, मदनलाल पलथा मिठनपुर की कस्तूरी, पूनम, रोहित, सावित्री और सुमन की मौत हो चुकी है।
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रविवार की सुबह 9 बजे चितौरा गांव निवासी सावित्री (45) पत्नी गंगा सहाय पाल की बुखार से मौत हो गई। उसे एक दिन पहले शनिवार को बुखार आया था। बुखार आने पर सावित्री के पति गंगा सहाय ने पड़ोस के गांव रहोली से निजी चिकित्सक से दवाई दिलवा दी। लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और उसने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों ने बताया कि गंगा सहाय की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से वह अपनी पत्नी को उपचार के लिए शहर चंदौसी नहीं ले जा सका।
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सावित्री की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। इससे 15 दिन पहले भी सतीश की पत्नी सुमन यादव (26) की मौत भी बुखार से हो चुकी है। साथ ही गांव में इस समय 50 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। गांव के बृजेश यादव, सरस्वती, ज्योति, दीपक, शरवती सावित्री, सीमा, शैलेश, सुभाष, गुंजन रीना आदि सहित 50 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग लापरवाह बना हुआ है। स्थिति अधिक खराब होने के बाद स्वास्थ्य विभाग जागता है। कैंप लगाकर दवाइयां वितरित करने में भी केवल औपचारिकता ही निभाई जाती हैं। चिकित्सा कर्मी गांव में कैंप लगाकर केवल एक ही दिन दवाइयां वितरित करते हैं। जिससे मरीज का सही होना असंभव है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कम से कम तीन चार दिन तक दवाइयां वितरित की जाये जिससे मरीज को पूर्ण उपचार मिल सके।
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इन ग्रामीणों की बुखार से हो चुकी है मौत
चंदौसी। बुखार की चपेट में आकर एक माह के अंदर 12 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। जिसमें गांव मुड़िया खेड़ा के राजाराम, भूरा, हमीदन, गांव जहांगीरपुर के अजुध्धी, मिलक दियौरा खास के सुभाष कुमार, धर्मवती, मदनलाल पलथा मिठनपुर की कस्तूरी, पूनम, रोहित, सावित्री और सुमन की मौत हो चुकी है।