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दद्दा गुस्से में हैं.. किसी की सुनेंगे नहीं

Tue, 24 Jan 2017 01:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल Updated Tue, 24 Jan 2017 01:40 AM IST
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dadda gusse men hain kidi ki sunenge nhin
An interesting story of samajwadi party symbol bicycle
सोमवार को मनाने पहुंचे सपा जिलाध्यक्ष फिरोज खां से दद्दा ने मुलायम सिंह यादव के परिवार से किसी सदस्य के चुनाव लड़ने के बाद ही निर्णय वापस लेने की बात कही। 
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मुलायम सिंह यादव के करीबी पूर्व एमएलसी ऋषिपाल सिंह दद्दा का नाम क्षेत्र के कद्दावर नेताओं में शुमार होता है। विधायक राम खिलाड़ी सिंह यादव भी उन्हें अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं। लेकिन, दद्दा इस बार अपने इस सियासी शिष्य के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरने का एलान कर चुके हैं।
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वे अपने पौत्र सुमित यादव को टिकट देने की मांग कर रहे थे। उन्होंने सांसद धर्मेंद्र यादव से भी कही और पार्टी हाईकमान तक भी पहुंचाई। इसके बाद भी हाईकमान ने राम खिलाड़ी सिंह यादव को भी गुन्नौर से अपना प्रत्याशी बनाया। ऐसे में ऋषिपाल सिंह दद्दा ने समर्थकों के साथ बैठक में विचार विमर्श करके सपा प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव में उतरने को ताल ठोंक दी थी। दद्दा के बागी तेवर देखकर पार्टी में खलबली मच गई। सोमवार को सपा जिलाध्यक्ष फिरोज खां उन्हें मनाने के लिए उनके घर बबराला पहुंचे। करीब दो घंटे तक बातचीत हुई लेकिन दद्दा का रुख नहीं बदला। अंत में इतना जरूर कहा कि यदि मुलायम सिंह यादव के परिवार से कोई लड़ता है तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। अन्यथा वह लड़ेंगे, राम खिलाड़ी सिंह को चुनाव नहीं लड़ाएंगे। सूत्रों के अनुसार एक दो दिन में सांसद धर्मेंद्र यादव भी उन्हें मनाने उनके घर पहुंच    सकते हैं।
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जनसंघ, जनता दल के रास्ते सपा में पहुंचे थे दद्दा
यादव बाहुल्य गुन्नौर विधान सीट पर अपना दबदबा कायम रखने वाले ऋषिपाल सिंह यादव दद्दा ने जनसंघ की सदस्यता लेकर सक्रिय सियासत की ओर रुख किया। 1967 में विधान सभा चुनाव लड़ा तो सिर्फ 228 मतों से जुगुल किशोर यादव से पराजित हो गए। लेकिन इसके बाद लगातार सक्रियता बनाए रखी। 1969 में हुए चुनाव में जुगुल किशोर को हराकर जनसंघ के टिकट पर ही विधायक बने। इसके बाद 1974 में चुनाव लड़े लेकिन जुगुल किशोर से फिर परास्त हो गए।

इसके बाद जनता दल में गए और जनता दल ने उन्हें 1990 में एमएलसी बनवा दिया। उनका कार्यकाल 1996 में समाप्त हुआ लेकिन उसके बाद उन्होंने विधान सभा चुनाव नहीं लड़ा। उस समय मुलायम सिंह यादव भी जनता दल में ही थे, तभी से वह मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे। मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी बना ली लेकिन ऋषिपाल दद्दा जनता में ही रहे। लेकिन बाद में वह सपा में शामिल हो गए। तब से लेकर अब तक सपा में ही है लेकिन कोई चुनाव नहीं लड़ा। इस बार उन्होंने पौत्र के लिए टिकट मांगा था।

भाजपा के खिलाफ मुहिम छेड़ेगी जाट आरक्षण समिति
संभल(ब्यूरो)। जाट बेल्ट में अबकी बार आरक्षण का मुद्दा गूंजेगा। आरक्षण के लिए आंदोलन करने वालों को जेल से रिहा कराने के लिए जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने मुद्दा बनाया है। हरियाणा से समिति के जिम्मेदार पदाधिकारी आ रहे हैं। वे असमोली और संभल विधानसभा क्षेत्र के जाट बहुल गावों में भाजपा के खिलाफ मुहिम छेडे़ंगे। समिति के जिलाध्यक्ष विजयपाल सिंह बताया कि भाजपा ने जाट समाज के साथ वादा खिलाफी की है। संभल जिले के जाट आरक्षण समिति के पदाधिकारी दूसरी विधानसभा सीटों में जाकर इन मुद्दों को उठाएंगे जबकि यहां पर हरियाणा से जाट आरक्षण समिति के सदस्य और पदाधिकारी आ रहे हैं जो चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा द्वारा धोखा दिए जाने और वादा खिलाफी किए जाने का मुद्दा उठाएंगे।


हाईकमान को अवगत कराया ः फिरोज
दद्दा से बातचीत की गई है, अभी तक उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। उनके रुख से पार्टी हाईकमान को भी अवगत कराया जा रहा है। उन्हें उम्मीद हैं कि वे पार्टी के पुराने नेता हैं और अपना निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला बदलकर पार्टी का सहयोग करेंगे।       -फिरोज खां  सपा जिलाध्यक्ष
 
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