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शहीद को दी श्रद्धांजलि, पाक मुदाऱ्र्दाबाद के लगे नारे
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Wed, 19 Oct 2016 01:06 AM IST
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शहीद
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सुधीश कुमार की शहादत के बाद पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश उभरा है। शहीद के गांव पनसुखा मिलक में मंगलवार को दूसरे दिन भी पाकिस्तान हाय-हाय के नारे लगाए गए। युवाओँ ने प्रदर्शन किया। नवाज शरीफ मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। वहीं भारत माता की जय का नारा भी गूंजा।
वे जबरदस्त नारेबाजी करते हुए भारत सरकार से पाकिस्तान को सबक सिखाने की मांग कर रहे हैं। युवाओं में ही नहीं बुजुर्गों का भी यही कहना है कि पाकिस्तान से बदला लिया जाए। सैनिकोंकी मौत का हिसाब मांगा जाए। इसी क्रम में पनसुखा मिलक में सोमवार और मंगलवार को लगातार पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं।
अंतिम दर्शन को उमड़े कई गांवों के लोग, हर आंख थी नम ःशहीद जवान सुधीश कुमार का पार्थिव शरीर मंगलवार की दोपहर जैसे ही गांव पहुंचा तो क्षेत्र गम में डूब गया। हर आंख नम थी। परिजनों और रिश्तेदारों के आंसू नहीं थम रहे थे। तमाम युवा अंतिम संस्कार में आए लोगों के साथ हर मूवमेंट को मोबाइल कैमरे में कैद कर रहे थे। शहीद जवान के घर तिल रखने की भी जगह नहीं बची तो लोगों ने घंटों घर के बाहर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार किया।
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माताएं बोलीं- देश के लिए लड़ेंगे हमारे लाल
संभल। पनसुखा मिलक और आसपास के गांवों माताओं में देश भक्ति के प्रति जज्बा कम नहीं है। शहीद सैनिक के गांव की माताओं के हौसले में कमी नहीं है। पनसुखा मिलक गांव व आसपास के गांवों की माताएं अपने बेटों को देश की रक्षा के लिए सेना में भेजना चाहती हैं।दौलतपुर गांव की बलेश ने बताया कि उनका बेटा रूम सिंह सेना में है। सत्रह दिन पहले ही भर्ती हुआ। वह चाहती हैं कि बेटा देश के लिए लड़े।
वहीं चितावली की संतोष ने कहा कि उनका एक बेटा अरुण पहले से फौज में है। वह अब दूसरे बेटे वरुण को फौज में भेजने की तैयारी कर रही हैं। मुराहट गांव की दयावती शहीद सुधीश के गांव पहुंची। उनका कहना था कि उनका बेटा मनोज 15 वर्ष से फौज में है। वह चाहती हैं देश की रक्षा के लिए उनका बेटा आगे बढ़े। मोर्चा संभाले और दुश्मन देश को सबक सिखाए।
साथी बोले-हमेशा याद आएंगे सुधीश
संभल। भारत पाक सीमा पर राजोरी के तारकुंडी इलाके में एलओसी पर तैनात सुधीश कुमार दुश्मन देश की तरह चली पहली गोली में शहीद हो गए थे। वे काफी मिलनसार और साहसी थे। ये कहना है कि अंतिम संस्कार में शामिल होने आए उनके साथियों का। जम्मू कश्मीर में भारत पाक सीमा पर तैनात सुधीश कुमार के साथियों का कहना है कि सुधीश साहसी होने के साथ मिलनसार भी थे।
बताया कि रविवार को दोपहर 12 बजे खाना खाया था। खाना खाने के बाद सुधीश कुमार 3.00 बजे से मोर्चे पर तैनात हो गए थे। करीब एक घंटे चालीस मिनट की ड्यूटी के दौरान शाम 4.40 बजे पाकिस्तान की तरफ से सीज फायर का उल्लंघन कर गोली चला दी। जो उनकी दाहिनी आंख को भेदती हुई पीछे पार कर गई। गोली लगते ही वे मौके पर ही शहीद हो गए। इसकी सूचना एलओसी की फारवर्ड पोस्ट पर तैनात साथी जवानों ने अधिकारियों को दी।
सुधीश की शहादत के बाद भारतीय सेना ने बहादुरी दिखाई। भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार दो घंटे तक फायरिंग हुई। जम्मू-कश्मीर के राजौरी पोस्ट पर ड्यूटी कर रहे एक जवान ने बताया कि पाकिस्तान की तरफ से हर दिन सीज फायर का उल्लंघन कर आएदिन फायरिंग की जाती है जिसका भारतीय सेना बड़ी जाबांजी से जवाब दे रही है।
पिता की बहादुरी के किस्से सुना करेगी सुुधि
संभल। शहीद हुए सैनिक सुधीश कुमार की बेटी की उम्र अभी मात्र चार महीने ही है। वह अपने पिता की शहादत से बेखबर है। लेकिन जब वह समझदारी के स्तर पर आएगी तब उसे अपने पिता की बहादुरी के किस्से सुनने को मिला करेंगे। उसके पिता ने देश के लिए जान कुर्बान की है। उसके पिता देश के लिए जिए और देश के लिए लड़े, यह सब बातें उसे समझदार बनने के बाद सुनने को मिला करेंगी।
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वे जबरदस्त नारेबाजी करते हुए भारत सरकार से पाकिस्तान को सबक सिखाने की मांग कर रहे हैं। युवाओं में ही नहीं बुजुर्गों का भी यही कहना है कि पाकिस्तान से बदला लिया जाए। सैनिकोंकी मौत का हिसाब मांगा जाए। इसी क्रम में पनसुखा मिलक में सोमवार और मंगलवार को लगातार पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं।
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अंतिम दर्शन को उमड़े कई गांवों के लोग, हर आंख थी नम ःशहीद जवान सुधीश कुमार का पार्थिव शरीर मंगलवार की दोपहर जैसे ही गांव पहुंचा तो क्षेत्र गम में डूब गया। हर आंख नम थी। परिजनों और रिश्तेदारों के आंसू नहीं थम रहे थे। तमाम युवा अंतिम संस्कार में आए लोगों के साथ हर मूवमेंट को मोबाइल कैमरे में कैद कर रहे थे। शहीद जवान के घर तिल रखने की भी जगह नहीं बची तो लोगों ने घंटों घर के बाहर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार किया।
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माताएं बोलीं- देश के लिए लड़ेंगे हमारे लाल
संभल। पनसुखा मिलक और आसपास के गांवों माताओं में देश भक्ति के प्रति जज्बा कम नहीं है। शहीद सैनिक के गांव की माताओं के हौसले में कमी नहीं है। पनसुखा मिलक गांव व आसपास के गांवों की माताएं अपने बेटों को देश की रक्षा के लिए सेना में भेजना चाहती हैं।दौलतपुर गांव की बलेश ने बताया कि उनका बेटा रूम सिंह सेना में है। सत्रह दिन पहले ही भर्ती हुआ। वह चाहती हैं कि बेटा देश के लिए लड़े।
वहीं चितावली की संतोष ने कहा कि उनका एक बेटा अरुण पहले से फौज में है। वह अब दूसरे बेटे वरुण को फौज में भेजने की तैयारी कर रही हैं। मुराहट गांव की दयावती शहीद सुधीश के गांव पहुंची। उनका कहना था कि उनका बेटा मनोज 15 वर्ष से फौज में है। वह चाहती हैं देश की रक्षा के लिए उनका बेटा आगे बढ़े। मोर्चा संभाले और दुश्मन देश को सबक सिखाए।
साथी बोले-हमेशा याद आएंगे सुधीश
संभल। भारत पाक सीमा पर राजोरी के तारकुंडी इलाके में एलओसी पर तैनात सुधीश कुमार दुश्मन देश की तरह चली पहली गोली में शहीद हो गए थे। वे काफी मिलनसार और साहसी थे। ये कहना है कि अंतिम संस्कार में शामिल होने आए उनके साथियों का। जम्मू कश्मीर में भारत पाक सीमा पर तैनात सुधीश कुमार के साथियों का कहना है कि सुधीश साहसी होने के साथ मिलनसार भी थे।
बताया कि रविवार को दोपहर 12 बजे खाना खाया था। खाना खाने के बाद सुधीश कुमार 3.00 बजे से मोर्चे पर तैनात हो गए थे। करीब एक घंटे चालीस मिनट की ड्यूटी के दौरान शाम 4.40 बजे पाकिस्तान की तरफ से सीज फायर का उल्लंघन कर गोली चला दी। जो उनकी दाहिनी आंख को भेदती हुई पीछे पार कर गई। गोली लगते ही वे मौके पर ही शहीद हो गए। इसकी सूचना एलओसी की फारवर्ड पोस्ट पर तैनात साथी जवानों ने अधिकारियों को दी।
सुधीश की शहादत के बाद भारतीय सेना ने बहादुरी दिखाई। भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार दो घंटे तक फायरिंग हुई। जम्मू-कश्मीर के राजौरी पोस्ट पर ड्यूटी कर रहे एक जवान ने बताया कि पाकिस्तान की तरफ से हर दिन सीज फायर का उल्लंघन कर आएदिन फायरिंग की जाती है जिसका भारतीय सेना बड़ी जाबांजी से जवाब दे रही है।
पिता की बहादुरी के किस्से सुना करेगी सुुधि
संभल। शहीद हुए सैनिक सुधीश कुमार की बेटी की उम्र अभी मात्र चार महीने ही है। वह अपने पिता की शहादत से बेखबर है। लेकिन जब वह समझदारी के स्तर पर आएगी तब उसे अपने पिता की बहादुरी के किस्से सुनने को मिला करेंगे। उसके पिता ने देश के लिए जान कुर्बान की है। उसके पिता देश के लिए जिए और देश के लिए लड़े, यह सब बातें उसे समझदार बनने के बाद सुनने को मिला करेंगी।