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फंदे पर झूला बारह साल का मासूम, मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Sat, 27 Aug 2016 12:43 AM IST
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- फोटो : bureau
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जिस वक्त मासूम ने अपने गले में फंदा बांधा उस वक्त माता पिता घर पर नहीं थे। उम्र में उससे छोटी बहन ही घर पर थी। मासूम ने उसे यह कहकर घर से बाहर कर दिया कि वह अकेला ही झूला झूलना चाहता है। मासूम की बहन ने जब देखा तो तो शोर मचाया। पड़ोसी राहगीर महिला सबसे पहले घटना स्थल पर पहुंची। इसके बाद गांव वाले एकत्र हुए। परिजन बाद में आए। घटना से वह परिजन स्तब्ध हैं।
असमोली थाना क्षेत्र के एक गांव में मजदूरपेशा परिवार रहता है। परिवार के अधिकतर सदस्य घर से बाहर थे। माता पिता भी खरीदारी करने के लिए निकले हुए थे। घर पर 12 वर्ष का मासूम और उसकी एक बहन घर पर थी जो उम्र में उससे छोटी है। मासूम बच्चे को दिमाग में पता नहीं क्या सूझा उसने अपनी बहन से कहा कि वह अकेले झूला झूलेगा। इसके बाद एक दुपट्टे को उसने चारपाई के सहारे कुंडे में बांधा और दुपट्टे का दूसरा सिरा गले में कस कर झूल गया। इसमें उसकी जान निकल गई। घटना के वक्त परिजन घर पर नहीं थे। गांव वालों ने उन्हें सूचित किया। परिजनों को जब घटना की जानकारी मिली तो वह सन्न रह गए। वे भी नहीं समझ पा रह हैं कि ऐसा कैसे हुआ।
कहीं स्टंट तो नहीं कर रहा था मासूम?
संभल। मासूम बालक फांसी के फंदे पर क्यों झूला? शायद ही इसका कोई जवाब दे पाए क्योंकि जिस वक्त उसने यह आत्मघाती कदम उठाया? उस वक्त उसके दिमाग में क्या चल रहा है। यह किसी को नहीं पता। घटना के बाद हर कोई इसका अपने तरीके से विश्लेषण कर रहा है। परिजन कहते हैं उन्हें नहीं पता कैसे क्या हुआ। बच्चा हंसता खेलता था अपनी पढ़ाई करता था। लेकिन उसने जान क्यों दी? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। कुछ लोगों का मानना है कि ऐसा लग रहा है जैसे वह कोई स्टंट कर रहा हो और इसी दौरान उसकी जान चली गई हो।
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...ताकि न हों ऐसे हादसे
संभल। घटन बेहद दुखद है। मैं तो यही कहूंगा कि हर कोई अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी परवरिश देता है। उसकी सुख सुविधा का ख्याल रखता है लेकिन कुछ मामलों में कभी कभी चूक हो सकती है। ऐसे में सलाह यही है कि अपने लाडलों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें। उन्हें समय दें और उनके दिमाग में पैदा हो रहे सवालों तथा जवाबों में खुद को इनवाल्व करें ताकि वे कोई आत्मघाती कदम न उठाएं। क्योंकि दौर बदलने के साथ बच्चों की समझदारी और संवदेनशीलता में बदलाव आया है। अब उनके साथ संवाद करके हम बहुत सारी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं। (एएसपी कमलेश दीक्षित से बातचीत के आधार पर)
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असमोली थाना क्षेत्र के एक गांव में मजदूरपेशा परिवार रहता है। परिवार के अधिकतर सदस्य घर से बाहर थे। माता पिता भी खरीदारी करने के लिए निकले हुए थे। घर पर 12 वर्ष का मासूम और उसकी एक बहन घर पर थी जो उम्र में उससे छोटी है। मासूम बच्चे को दिमाग में पता नहीं क्या सूझा उसने अपनी बहन से कहा कि वह अकेले झूला झूलेगा। इसके बाद एक दुपट्टे को उसने चारपाई के सहारे कुंडे में बांधा और दुपट्टे का दूसरा सिरा गले में कस कर झूल गया। इसमें उसकी जान निकल गई। घटना के वक्त परिजन घर पर नहीं थे। गांव वालों ने उन्हें सूचित किया। परिजनों को जब घटना की जानकारी मिली तो वह सन्न रह गए। वे भी नहीं समझ पा रह हैं कि ऐसा कैसे हुआ।
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कहीं स्टंट तो नहीं कर रहा था मासूम?
संभल। मासूम बालक फांसी के फंदे पर क्यों झूला? शायद ही इसका कोई जवाब दे पाए क्योंकि जिस वक्त उसने यह आत्मघाती कदम उठाया? उस वक्त उसके दिमाग में क्या चल रहा है। यह किसी को नहीं पता। घटना के बाद हर कोई इसका अपने तरीके से विश्लेषण कर रहा है। परिजन कहते हैं उन्हें नहीं पता कैसे क्या हुआ। बच्चा हंसता खेलता था अपनी पढ़ाई करता था। लेकिन उसने जान क्यों दी? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। कुछ लोगों का मानना है कि ऐसा लग रहा है जैसे वह कोई स्टंट कर रहा हो और इसी दौरान उसकी जान चली गई हो।
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...ताकि न हों ऐसे हादसे
संभल। घटन बेहद दुखद है। मैं तो यही कहूंगा कि हर कोई अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी परवरिश देता है। उसकी सुख सुविधा का ख्याल रखता है लेकिन कुछ मामलों में कभी कभी चूक हो सकती है। ऐसे में सलाह यही है कि अपने लाडलों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें। उन्हें समय दें और उनके दिमाग में पैदा हो रहे सवालों तथा जवाबों में खुद को इनवाल्व करें ताकि वे कोई आत्मघाती कदम न उठाएं। क्योंकि दौर बदलने के साथ बच्चों की समझदारी और संवदेनशीलता में बदलाव आया है। अब उनके साथ संवाद करके हम बहुत सारी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं। (एएसपी कमलेश दीक्षित से बातचीत के आधार पर)