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क्षेत्र में किसान बेखौफ होकर खेतों में जमकर जला रहे है पतेई
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चंदौसी। क्षेत्र में खेतों में पतेई व पराली जलाने का सिललिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शासन व प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है। जिला प्रशासन प्रदूषण नियंत्रण के क्रम में इस पर प्रतिबंध लगा रखा है। राजस्व कर्मियों से इस पर निगरानी रखने को कहा गया है। कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई है। लेकिन किसान अभी भी खेत में धान की पराली व गन्ने की पतेई जला रहा है।
खेत में फसल अवशेष, गन्ने की पतेई व धान की पराली जलाने से प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है। दिल्ली में धुंध जाने के पीछे हरियाणा व दिल्ली एनसीआर में फसल अवशेष खेतो जलाया जाना बताया जा रहा है। खेत में पराली अथवा पतेई जलाने से प्रदूषण तो होता ही है। इससे खेत के पोषक तत्व भी खत्म हो जाते है। जबकि अगर पतेई अथवा पराली को खेत में जोत दिया जाए तो खेत की उर्वरा शक्ति में खासी वृद्घि होती है। इसीलिए शासन इसको लेकर खासा गंभीर बना हुआ है। जिला प्रशासन ने खेत में पतेई अथवा पराली न जलाई जाए, इस पर निगरानी के लिए राजस्व कर्मियों की ड्यूटी भी लगाई है। इसके बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है। किसान खेत में पराली व पतेई को जला रहे है। ब्लाक बनियाखेड़ा व पंवासा के गांव के जंगलों में खेतों में पराली व पतेई जला जा रही है। प्रशासन की लापरवाही के कारण क्षेत्र में प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है।
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खेत में फसल अवशेष, गन्ने की पतेई व धान की पराली जलाने से प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है। दिल्ली में धुंध जाने के पीछे हरियाणा व दिल्ली एनसीआर में फसल अवशेष खेतो जलाया जाना बताया जा रहा है। खेत में पराली अथवा पतेई जलाने से प्रदूषण तो होता ही है। इससे खेत के पोषक तत्व भी खत्म हो जाते है। जबकि अगर पतेई अथवा पराली को खेत में जोत दिया जाए तो खेत की उर्वरा शक्ति में खासी वृद्घि होती है। इसीलिए शासन इसको लेकर खासा गंभीर बना हुआ है। जिला प्रशासन ने खेत में पतेई अथवा पराली न जलाई जाए, इस पर निगरानी के लिए राजस्व कर्मियों की ड्यूटी भी लगाई है। इसके बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है। किसान खेत में पराली व पतेई को जला रहे है। ब्लाक बनियाखेड़ा व पंवासा के गांव के जंगलों में खेतों में पराली व पतेई जला जा रही है। प्रशासन की लापरवाही के कारण क्षेत्र में प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है।
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