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Sambhal News: एक ही चिता पर हुआ पिता-पुत्रों का अंतिम संस्कार
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गुन्नौर (संभल)।
सोमवार को बिचपुरी सैलाब गांव में मृतक किसान हंसराज (45) और उनके बेटे मनोज (15) व मोहन (10) के शव पहुंचे, तो हर किसी की आंखें नम हो गई। घर के बाहर लोगों की भीड़ जुटी थी। परिजन, पड़ोसी व रिश्तेदारों का रुदन गांव के बाहर तक सुनाई दे रहा था। नरौरा बैराज पर पिता और उनके दोनों बेटे की एक ही चिता बनाई गई। मृतक के मझले बेटे लखन ने चिता का मुखाग्नि दी।
रविवार रात करीब साढ़े सात बजे आगरा-मुरादाबाद हाईवे पर नरौरा गंगा पुल पर रोडवेज की बस ने सामने से आ रही बाइक को रौंद दिया था। हादसे में बाइक सवार हंसराज व उनके बेटे मनोज व मोहन की मौत हो गई थी। हंसराज के दोनों बेटे नरौरा के इरीगेशन इंटर कॉलेज में पढ़ते थे। सोमवार सुबह दोनों को स्कूल जाना था। इसलिए हंसराज एक दिन पहले उन्हें नरौरा छोड़ने जा रहे थे। सोमवार सुबह करीब 11 बजे पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शव गांव पहुंचे, तो गांव में मातम छा गया। किसी के घर में चूल्हे नहीं जले। दोपहर में तीनों की शव को गंगाघाट नरौरा ले जाया गया, जहां तीनों पिता-पुत्रों की एक ही चिता बनाई गई। मृतक के मझले बेटे लखन ने चिता को मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में ग्रामीणों के साथ गुन्नौर विधायक राम खिलाड़ी यादव भी पहुंचे।
हंसराज के पिता नेत्रपाल को सताने लगी नातियों की चिंता
मृतक हंसराज के पिता नेत्रपाल की उम्र 70 साल है। वह बार-बार रोते हुए यही कह रहे है कि अब घर की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। हंसराज ही घर की सभी जिम्मेदारी संभालते थे। उधर, हंसराज की पत्नी सावित्री रोते-रोते बेसुध हो गई। दो बेटे और पति की मौत से वह पूरी तरह से टूट गई। पिता की मौत से बेटे विष्ण (20), लखन (17) और प्रीति (16) के आंसू नहीं थम रहे है।
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बेटा, अभी चलो, सुबह जाने से स्कूल जाने में देर हो जाएगी
गुन्नौर। बिचपुरी सैलाब गांव निवासी किसान हंसराज ने बच्चों को पढ़ाने के लिए नरौरा में मकान ले रखा था। वह खुद भी खेत का काम कर रोजना शाम को दोनों बेटे मनोज व मोहन के पास नरौरा चले जाते थे। शनिवार को जरूरत का सामान लेने के लिए वह दोनों बच्चों को साथ लाए थे। रविवार शाम को हंसराज दोनों बेटों के साथ नरौरा जाने के लिए तैयार हो रहे थे तो मनोज व मोहन न कहा था कि पिताजी रात में घर रुक जाते हैं। सोमवार सुबह जल्दी यहां से स्कूल के लिए रवाना हो जाएंगे, लेकिन बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए हंसराज ने कहा कि अभी चलो, सुबह निकलेंगे तो स्कूल जाने में देर हो जाएगी। जिसके बाद हंसराज दोनों बेटों को बाइक से लेकर नरौरा चल दिया और रास्ते में हादसा हो गया।
जून माह में की थी बड़े बेटे विष्णु की शादी
मृतक किसान हंसराज के चार बेटे थे। सबसे बड़े बेटे विष्णु की शादी उसने इसी वर्ष जून माह के आखिर में की थी। अभी शादी को करीब तीन माह ही हुए हैं। घर में शादी खुशी का माहौल था।
हंसराज के व्यवहार की हर कोई कर रहा है प्रशंसा
हंसराज बहुत ही मिलनसार व व्यवहार कुशल व्यक्ति थे। वह सभी के साथ में मधुर व्यवहार करते थे। गांव के लोग भी हंसराज के व्यवहार की प्रशंसा करते दिखाई दिए। गांव के लोगों का कहना है कि हंसराज सभी के सुख-दुख में हर समय तैयार रहने वालों में से थे। वह गांव के साथ ही क्षेत्र के लोगों का हर प्रकार से सहयोग करते थे।
दूध पीने का भी नहीं किया इंतजार
हंसराज के घर पर दूध गर्म हो रहा था। सभी ने कहा था कि दूध गर्म हो रहा है दूध पीने के बाद में निकल जाना, लेकिन हंसराज ने कहा कि दूध डिब्बे में कर दो। नरौरा जाकर गर्म कर लेंगे और तीनों लोग वहीं पर पी लेंगे। इसके बाद उसने डिब्बे में दूध कर लिया और बच्चों को लेकर घर से नरौरा को निकल गया।
गांव में नहीं जले चूल्हे
गांव में एक साथ पिता-दो पुत्रों की तीन लोगों की मौत से गमगीन माहौल है। सोमवार को गांव में घरों में चूल्हे तक नहीं जले। रुक रुक रोने चीखने चिल्लाने की आवाज आती रही। जैसे ही कोई परिचित उनके घर पहुंचता, तो रुदन सुनाई देने लगा। पूरे दिन रुक रुक घरों से सिकसियां सुनाई देती रही।
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सोमवार को बिचपुरी सैलाब गांव में मृतक किसान हंसराज (45) और उनके बेटे मनोज (15) व मोहन (10) के शव पहुंचे, तो हर किसी की आंखें नम हो गई। घर के बाहर लोगों की भीड़ जुटी थी। परिजन, पड़ोसी व रिश्तेदारों का रुदन गांव के बाहर तक सुनाई दे रहा था। नरौरा बैराज पर पिता और उनके दोनों बेटे की एक ही चिता बनाई गई। मृतक के मझले बेटे लखन ने चिता का मुखाग्नि दी।
रविवार रात करीब साढ़े सात बजे आगरा-मुरादाबाद हाईवे पर नरौरा गंगा पुल पर रोडवेज की बस ने सामने से आ रही बाइक को रौंद दिया था। हादसे में बाइक सवार हंसराज व उनके बेटे मनोज व मोहन की मौत हो गई थी। हंसराज के दोनों बेटे नरौरा के इरीगेशन इंटर कॉलेज में पढ़ते थे। सोमवार सुबह दोनों को स्कूल जाना था। इसलिए हंसराज एक दिन पहले उन्हें नरौरा छोड़ने जा रहे थे। सोमवार सुबह करीब 11 बजे पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शव गांव पहुंचे, तो गांव में मातम छा गया। किसी के घर में चूल्हे नहीं जले। दोपहर में तीनों की शव को गंगाघाट नरौरा ले जाया गया, जहां तीनों पिता-पुत्रों की एक ही चिता बनाई गई। मृतक के मझले बेटे लखन ने चिता को मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में ग्रामीणों के साथ गुन्नौर विधायक राम खिलाड़ी यादव भी पहुंचे।
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हंसराज के पिता नेत्रपाल को सताने लगी नातियों की चिंता
मृतक हंसराज के पिता नेत्रपाल की उम्र 70 साल है। वह बार-बार रोते हुए यही कह रहे है कि अब घर की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। हंसराज ही घर की सभी जिम्मेदारी संभालते थे। उधर, हंसराज की पत्नी सावित्री रोते-रोते बेसुध हो गई। दो बेटे और पति की मौत से वह पूरी तरह से टूट गई। पिता की मौत से बेटे विष्ण (20), लखन (17) और प्रीति (16) के आंसू नहीं थम रहे है।
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बेटा, अभी चलो, सुबह जाने से स्कूल जाने में देर हो जाएगी
गुन्नौर। बिचपुरी सैलाब गांव निवासी किसान हंसराज ने बच्चों को पढ़ाने के लिए नरौरा में मकान ले रखा था। वह खुद भी खेत का काम कर रोजना शाम को दोनों बेटे मनोज व मोहन के पास नरौरा चले जाते थे। शनिवार को जरूरत का सामान लेने के लिए वह दोनों बच्चों को साथ लाए थे। रविवार शाम को हंसराज दोनों बेटों के साथ नरौरा जाने के लिए तैयार हो रहे थे तो मनोज व मोहन न कहा था कि पिताजी रात में घर रुक जाते हैं। सोमवार सुबह जल्दी यहां से स्कूल के लिए रवाना हो जाएंगे, लेकिन बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए हंसराज ने कहा कि अभी चलो, सुबह निकलेंगे तो स्कूल जाने में देर हो जाएगी। जिसके बाद हंसराज दोनों बेटों को बाइक से लेकर नरौरा चल दिया और रास्ते में हादसा हो गया।
जून माह में की थी बड़े बेटे विष्णु की शादी
मृतक किसान हंसराज के चार बेटे थे। सबसे बड़े बेटे विष्णु की शादी उसने इसी वर्ष जून माह के आखिर में की थी। अभी शादी को करीब तीन माह ही हुए हैं। घर में शादी खुशी का माहौल था।
हंसराज के व्यवहार की हर कोई कर रहा है प्रशंसा
हंसराज बहुत ही मिलनसार व व्यवहार कुशल व्यक्ति थे। वह सभी के साथ में मधुर व्यवहार करते थे। गांव के लोग भी हंसराज के व्यवहार की प्रशंसा करते दिखाई दिए। गांव के लोगों का कहना है कि हंसराज सभी के सुख-दुख में हर समय तैयार रहने वालों में से थे। वह गांव के साथ ही क्षेत्र के लोगों का हर प्रकार से सहयोग करते थे।
दूध पीने का भी नहीं किया इंतजार
हंसराज के घर पर दूध गर्म हो रहा था। सभी ने कहा था कि दूध गर्म हो रहा है दूध पीने के बाद में निकल जाना, लेकिन हंसराज ने कहा कि दूध डिब्बे में कर दो। नरौरा जाकर गर्म कर लेंगे और तीनों लोग वहीं पर पी लेंगे। इसके बाद उसने डिब्बे में दूध कर लिया और बच्चों को लेकर घर से नरौरा को निकल गया।
गांव में नहीं जले चूल्हे
गांव में एक साथ पिता-दो पुत्रों की तीन लोगों की मौत से गमगीन माहौल है। सोमवार को गांव में घरों में चूल्हे तक नहीं जले। रुक रुक रोने चीखने चिल्लाने की आवाज आती रही। जैसे ही कोई परिचित उनके घर पहुंचता, तो रुदन सुनाई देने लगा। पूरे दिन रुक रुक घरों से सिकसियां सुनाई देती रही।