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हाइड्रोफोबिया से 13 साल के बच्चे की मौत
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कुढ़फतेहगढ़। गांव भगतपुर पहेली में कुत्ते के काटने के तीन माह बाद हाइड्रोफोबिया से 13 साल के बालक की मौत हो गई। बाल की चार दिन पहले तबियत बिगड़ी थी, परिजन इसके बाद भी झाड़फूंक से ही इलाज करा रहे थे।
थाना कुढ़फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव भगतपुर पहेली निवासी हिम्मत सिंह के 13 वर्षीय पुत्र अंश को 24 जनवरी को गांव में एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। उस दौरान सीएचसी चंदौसी में कमी के चलते एंटीरैबीज इंजेक्शन नहीं लग पाया था तथा झांड़फूंक से ही इलाज कराया था। सोमवार को बालक की हालत बिगड़ने लगी। बालक पानी को देखकर डरने लगे। हाइड्रोफोबिया के लक्षण दिखाई देने के बाद भी परिजन उसका झाड़फूंक में उपचार कराते रहे। गुुरुवार को हालत ज्यादा बिगड़ने पर परिजन बालक को बरेली उपचार के लिए लेकर जा रहे थे। रास्ते में उसकी मौत हो गई। बालक की मौत से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
तीन माह पहले सीएचसी में नहीं मिले थे इंजेक्शन
बालक के पिता हिम्मत सिंह ने बताया कि जनवरी में बेटे अंश को कुत्ते ने काट लिया था। वह एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए चंदौसी सीएचसी गए थे। पर इंजेक्शन उपलब्ध न होने के कारण एआरवी नहीं लग पाई थी। उसके एक सप्ताह बाद वह दोबारा से सीएचसी पहुंचे थे, तब भी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं थे। इसके बालक का झाड़-फूंक के जरिए उपचार कराया।
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थाना कुढ़फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव भगतपुर पहेली निवासी हिम्मत सिंह के 13 वर्षीय पुत्र अंश को 24 जनवरी को गांव में एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। उस दौरान सीएचसी चंदौसी में कमी के चलते एंटीरैबीज इंजेक्शन नहीं लग पाया था तथा झांड़फूंक से ही इलाज कराया था। सोमवार को बालक की हालत बिगड़ने लगी। बालक पानी को देखकर डरने लगे। हाइड्रोफोबिया के लक्षण दिखाई देने के बाद भी परिजन उसका झाड़फूंक में उपचार कराते रहे। गुुरुवार को हालत ज्यादा बिगड़ने पर परिजन बालक को बरेली उपचार के लिए लेकर जा रहे थे। रास्ते में उसकी मौत हो गई। बालक की मौत से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
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तीन माह पहले सीएचसी में नहीं मिले थे इंजेक्शन
बालक के पिता हिम्मत सिंह ने बताया कि जनवरी में बेटे अंश को कुत्ते ने काट लिया था। वह एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए चंदौसी सीएचसी गए थे। पर इंजेक्शन उपलब्ध न होने के कारण एआरवी नहीं लग पाई थी। उसके एक सप्ताह बाद वह दोबारा से सीएचसी पहुंचे थे, तब भी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं थे। इसके बालक का झाड़-फूंक के जरिए उपचार कराया।
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