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संभल में नए वर्ष पर जनता को मिलेगा बाईपास का तोहफा
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संभल। नए वर्ष में संभल नगर की जनता को बाईपास का तोहफा मिलेगा। नए वर्ष में मार्च महीने तक काम पूरा कराया जाना है। लोक निर्माण विभाग के अभियंता इसे लेकर तैयारी में जुटे हैं। संभल की शहरी आबादी को जाम से राहत देने के लिए बाईपास बनाने की मांग तो वर्षों पुरानी है लेकिन इस पर 2016 में काम शुरू हुआ था। पहले धनराशि की कमी से काम अटका पर अब ऐसा कुछ नहीं है। शासन ने पर्याप्त धन लोक निर्माण विभाग के पास भेज दिया है और अभियंताओं ने जमीन के अधिग्रहण का काम पूरा करते हुए सड़क निर्माण शुरू कर दिया है। एक हिस्से में काम इतना हो गया है कि वाहन गुजरने लगे हैं। लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं का कहना है कि 69.31 करोड़ लागत के इस बाईपास पर मार्च 2020 तक वाहन रफ्तार भरेंगे और संभल नगर की जनता को जाम से राहत मिल जाएगी।
संभल नगर से जोया और अमरोहा जाने वाले वाहन रायसत्ती होकर आबादी के बीच से गुजरते हैं। यहां हर रोज जाम लगता है क्योंकि सड़क संकरी है और वाहनों का ट्रैफिक अधिक है। जाम में लोग घंटों फंसा करते हैं।
इसलिए बाईपास का निर्माण कराने की मांग उठी थी। पहले धन आवंटन में देरी हुई। फिर काम शुरू होने में जमीन अधिग्रहण के काम में वक्त लगा। लेकिन अब कोई खास बाधा नहीं है। किसानों से अधिग्रहीत जमीन पर बाईपास के लिए सड़क का निर्माण चल रहा है। सड़क का जो हिस्सा चंदौसी-संभल मार्ग से मुरादाबाद-संभल मार्ग को जोड़ने के लिए बनना था। उसमें काम हो गया है।
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वाहन भी गुजरने लगे हैं लेकिन दूसरे हिस्से में काम बाकी है। उसके लिए प्रक्रिया चल रही है। असल में लोक निर्माण विभाग के वर्तमान अभियंता चाहते हैं कि बाईपास बिल्कुल इस तरह बने कि रफ्तार में कोई बाधा न पड़े और हादसे भी न होने पाएं। इसी मंशा से बाईपास की सड़क को बार-बार के मोड़ से बचाने की कवायद है। इसके लिए कुछ किसानों की जमीन का अधिग्रहण और करना पड़ सकता है।
अगर इस पर अभियंताओं और जिला प्रशासन ने मिलकर शासन तक पैरवी कर ली तो बाईपास की सड़क कम से कम मोड़ वाली होगी लेकिन अगर संशोधन के लिए प्रस्ताव पारित न हो सका तो भी बाईपास बनेगा पर मोड़ अधिक होंगे। लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं का प्रयास है कि हर स्थिति में मार्च 2020 तक बाईपास का निर्माण पूरा हो जाए। जाम से जनता को राहत मिल जाए। इसीलिए वह काम को जारी रखे हैं।्
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संभल नगर से जोया और अमरोहा जाने वाले वाहन रायसत्ती होकर आबादी के बीच से गुजरते हैं। यहां हर रोज जाम लगता है क्योंकि सड़क संकरी है और वाहनों का ट्रैफिक अधिक है। जाम में लोग घंटों फंसा करते हैं।
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इसलिए बाईपास का निर्माण कराने की मांग उठी थी। पहले धन आवंटन में देरी हुई। फिर काम शुरू होने में जमीन अधिग्रहण के काम में वक्त लगा। लेकिन अब कोई खास बाधा नहीं है। किसानों से अधिग्रहीत जमीन पर बाईपास के लिए सड़क का निर्माण चल रहा है। सड़क का जो हिस्सा चंदौसी-संभल मार्ग से मुरादाबाद-संभल मार्ग को जोड़ने के लिए बनना था। उसमें काम हो गया है।
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वाहन भी गुजरने लगे हैं लेकिन दूसरे हिस्से में काम बाकी है। उसके लिए प्रक्रिया चल रही है। असल में लोक निर्माण विभाग के वर्तमान अभियंता चाहते हैं कि बाईपास बिल्कुल इस तरह बने कि रफ्तार में कोई बाधा न पड़े और हादसे भी न होने पाएं। इसी मंशा से बाईपास की सड़क को बार-बार के मोड़ से बचाने की कवायद है। इसके लिए कुछ किसानों की जमीन का अधिग्रहण और करना पड़ सकता है।
अगर इस पर अभियंताओं और जिला प्रशासन ने मिलकर शासन तक पैरवी कर ली तो बाईपास की सड़क कम से कम मोड़ वाली होगी लेकिन अगर संशोधन के लिए प्रस्ताव पारित न हो सका तो भी बाईपास बनेगा पर मोड़ अधिक होंगे। लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं का प्रयास है कि हर स्थिति में मार्च 2020 तक बाईपास का निर्माण पूरा हो जाए। जाम से जनता को राहत मिल जाए। इसीलिए वह काम को जारी रखे हैं।्