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Sambhal News: गर्मी बढ़ते ही याद आने लगे मिट्टी के घड़े और सुराही

Thu, 23 May 2024 02:40 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Thu, 23 May 2024 02:40 AM IST
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As the heat increased, we started remembering clay pots and jars.
चंदौसी (संभल)। मई माह में ही गर्मी का मौसम चरम पर पहुंचने लगा है। गर्मी बढ़ने से देसी फ्रिज यानी घड़ों और सुराही की डिमांड बढ़ने लगी है। गांवों के साथ ही अब शहरों में भी अधिकतर लोग प्राकृतिक फ्रिज यानी मिट्टी के घड़े में पानी पीना पसंद करते हैं। नगर के बदायूं रोड पर तरह-तरह के मिट्टी के घड़े, सुराही व अन्य सामानों की बिक्री में इजाफा हुआ है।
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चंदौसी में मिट्टी के बर्तन बेचने वाले सोनू प्रजापति ने बताया कि मिट्टी से बने घड़ों की नई-नई वैरायटी उपलब्ध है। 70 रुपयों से लेकर 250 रुपयों तक के घड़े उपलब्ध हैं। बीते दस दिनाें में घड़ों की डिमांड बढ़ गई है। लोग टोंटी वाले घड़े अधिक पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा मिट्टी की बोतल, वॉटर कूलर, सुराही भी खूब बिक रही है। मिट्टी की बोतल काफी आकर्षक है, लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं। जिसकी कीमत 30 रुपये से 40 रुपये तक है। मटका खरीदने वाले नरौली के राजेश ने बताया कि मिट्टी के घड़ों में पानी ठंडा व साफ रहता है। इसीलिए हम लोग घर में फ्रिज के बजाए टोंटी वाले मिट्टी के घड़ों का ही पानी पी रहे हैं।
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सेहत के लिए लाभदायक होता है घड़े का ठंडा पानी
जारई के सोनू शर्मा के बताया कि मिट्टी के घड़े का पानी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। वैसे तो पानी जीवन का आधार है। लेकिन पानी मिट्टी के घड़े या मटके का हो तो उसके गुण कई गुणा बढ़ जाते हैं। घड़े का पानी पीने से कई रोगों से छुटकारा मिलता है। कहा कि डॉक्टर भी फ्रिज के पानी को गले के लिए हानिकारक बताते हैं। साथ ही कहीं न कहीं लीवर पर भी इफेक्ट करता है। फ्रिज में ठंडे हुए पानी में कई गुण कम या यूं कहें कि समाप्त हो जाते हैं। वहीं मिट्टी के घड़े में रखा पानी एक तो कुदरती तौर पर शुद्ध होता है और मटके के अंदर की सतह पानी के दूषित कणों को सोख लेती है। घड़े का पानी कम से कम दो दिन तक ताजा रहता है।
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समय के साथ बदला घड़े का आकार
सोनू प्रजापति ने बताया कि समय के साथ-साथ घड़े का आकार भी बदल गया है। पहले यहां केवल खुले मुंह वाला घड़ा होता था, जिसे उलटा करके पानी निकाला जाता था। लेकिन अब कई प्रकार के घड़े मार्केट में मिल रहे हैं। जैसे कि घड़े में टोंटी लगा दी है। इसे उलटा करने की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही अलग-अलग साइज में भी घड़े मिलने लगे हैं। उनके पास पांच लीटर से 15 लीटर तक का घड़ा है।
घड़े पर न करें पेंट, बंद हो जाते हैं सूक्ष्म छिद्र
उन्होंने कहा कि कभी रंग किए गए घड़े या मटके का पानी नहीं पीना चाहिए। क्योंकि घड़े को पेंट करने उसके सूक्ष्म छिद्र बंद हो जाते हैं। यही कारण है कि पानी वाष्पीकरण नहीं होता है। जिससे न तो पानी ठंडा होता है और न ही पानी की गुणवत्ता आता है।


पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है घड़े का पानी

चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरवेंद्र सिंह ने बताया कि मिट्टी के घड़े में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी होते हैं। खासकर इसके पानी का सेवन पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करने का काम करता है। कब्ज, एसिडिटी, पेट में ऐंठन जैसी पेट संबंधित समस्याएं नहीं होती है। जिन व्यक्तियों को अक्सर पेट संबंधित समस्याएं रहती हैं उन्हें रोज मिट्टी के घड़े में रखे हुए पानी का सेवन करना चाहिए। वहीं फ्रिज के ठंडे पानी का सेवन पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। गले में इंफेक्शन और दांतों में सेंसिटिविटी बढ़ जाती है।
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