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अस्थाई गो आश्रय स्थल में दम तोड़ रहे पशु, दबा नहीं रहे फेंक रहे जिम्मेदार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 26 May 2022 01:36 AM IST
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Animals dying in temporary cow shelter, are not being suppressed and thrown away
गांव घंसूरपुर में गो आश्रय स्थल के नजदीक घूमते पशु। - फोटो : SAMBHAL
संभल। असमोली क्षेत्र के गांव मंसूरपुर में बने अस्थाई गो-आश्रय स्थल पर गोवंशीय पशुओं के संरक्षण को लेकर किए जा रहे दावों की हकीकत सामने आई है। एक ओर प्रदेश सरकार गोवंशीय पशुओं के सरंक्षण को लेकर दावे कर रही है। वृहद गोवंशीय पशु सरंक्षण केंद्र बनाए जा रहे हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर लापरवाही के चलते सकारात्मक परिणाम नहीं देखने को मिले रहे हैं। मंगलवार को घंसूरपुर गोशाला में बड़ी लापरवाही दिखाई दी। गो आश्रय स्थल से कुछ ही दूरी पर 11 गोवंश मृत अवस्था में पड़े मिले। जिन्हें कुत्ते नोंच रहे थे। चिकित्साधि कारी ने पहले तो यह माना ही नहीं कि गो आश्रय स्थल के पशुओं की मौत हुई है। जबकि केयरटेकर ने तीन पशुओं के मरने की जानकारी दी थी। प्रधान के प्रतिनिधि ने तो पशुओं के मरने से पहले ही 15 गहरे गड्ढे खुदवा दिए थे लेकिन पशुओं के मरने के बाद भी उन गड्ढों में नहीं दबाया गया। सभी जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आई है। प्रधान प्रतिनिधि ने बताया कि गो आश्रय स्थल में 100 पशुओं की जगह है लेकिन 175 इस समय हैं। जो मर जाते हैं उनको दबा दिया जाता है। इससे साफ जाहिर हो गया कि पशुओं के मरने से पहले चिकित्सकीय परीक्षण और उपचार नहीं किया जाता है। जो पशु मर रहा है उसको मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।
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कोट
अस्थाई गो आश्रय स्थल में 100 पशुओं की जगह है लेकिन 175 पशु मौजूद हैं। जो पशु मर जाते हैं उनको दबा दिया जाता है। जेसीबी से 15 गड्ढे पहले से ही खुदवा दिए हैं।
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जुनैद, प्रधान प्रतिनिधि, ग्राम पंचायत घंसूरपुर।
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कोट
तीन पशुओं की मौत हुई थी। जो बीमार थे। पशु दबा दिए थे। कुत्ते गड्ढों से निकाल लाते हैं। इसलिए अवशेष दिखाई दे रहे हैं।
राजेंद्र, केयरटेकर, अस्थाई गो आश्रय स्थल, गांव घंसूरपुर।
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कोट
गो आश्रय स्थल से पशुओं के मरने की कोई जानकारी नहीं मिली। जानकारी मिलने पर मैं मौके पर गई थी। वहां कई पशुओं के अवशेष मिले हैं लेकिन वह सारे पशु गो आश्रय स्थल के नहीं है। आसपास के गांव के लोग मृत पशु फेंक जाते हैं।
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डा. दीपाक्षी, पशु चिकित्साधिकारी, असमोली।
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