{"_id":"5ba14a7c867a557fed5e93d2","slug":"alam-juloos-passes","type":"story","status":"publish","title_hn":"या हुसैन व या अली की सदाओं के साथ निकाला अलम का जुलूस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
या हुसैन व या अली की सदाओं के साथ निकाला अलम का जुलूस
अमर उजाला ब्यूरो/ संभल
Updated Wed, 19 Sep 2018 12:27 AM IST
विज्ञापन
अलम जुलूस।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संभल। जिले भर में मंगलवार को मुहर्रम की सातवीं तारीख पर अलम के जुलूस निकाले गए। जुलूसों में अकीदतमंदों की काफी भीड़ रही। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। बम निरोधक दस्ते ने अलम जुलूस निकलने वाले मार्ग पर जांच पड़ताल की। सुुरक्षा व्यवस्था के लिए कई थानों की फोर्स मौजूद रही। जुलूस में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन व उनके कुनबे के 72 साथियों को शहादत को याद किया गया। या हुसैन या अली की सदाएं बुलंद कर शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
विज्ञापन
मुहर्रम की सातवीं तारीख को शहर में पारंपरिक रूप से अलम-ए-मुबारक के जुलूस निकाल जाते हैं। मंगलवार को दोपहर के बाद अलम-ए-मुबारक के जुलूस का सिलसिला शुरू होकर देर शाम तक जारी रहा। अलम मुबारक का मुख्य जुलूस नगर के मियां सराय स्थित मस्जिद बंदगी शाह मियां के निकट से निकाला गया जिसमें मोहल्ला कोटगर्वी में विभिन्न स्थानों के अलम शामिल हुए। जुलूस चमन सराय, मीरनशाह, सब्जी मंडी, चक्की का पाट, महमूद खां सराय से होते हुए मोहल्ला नखासा, दीपा सराय चौक पहुंचें। एजेंटी चौराहे पर अलम संपन्न हुए। शहर के विभिन्न चौराहों पर शर्बत और तबर्रुक तकसीम किए गए। जुलूस को शांतिपूर्वक ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस व पीएसी के जवान तैनात रहे। अलम जुलूस में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी शामिल हुए। डा.शफीकुर्रहम बर्क, उनके पोते जियाउर्रहमान बर्क ने भी भागीदारी की। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की।
विज्ञापन
क्यों मनाते हैं सातवीं मुहर्रम?
संभल। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 जांनिसारों को जालिम बादशाह यजीद व उसके लश्करों ने शहीद कर दिया था। इंसानियत व सच्चाई को जिंदा रखने के लिए हजरत इमाम हुसैन ने जालिम यजीद की बात को ठुकरा कर शहादत का रास्ता चुना था। इसमें हजरत कासिम की भी शहादत हुई थी।
विज्ञापन