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Sambhal News: साहित्य में वैशाली और आर्ट में संभल का नाम रोशन कर रहीं आकांक्षा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 23 Oct 2023 02:04 AM IST
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Akanksha is making name for Vaishali in literature
संभल। समाज की पुरुष प्रधान मान्यताओं को बीते कई दशकों से महिलाओं ने चुनौती देते हुए हर क्षेत्र में स्वयं को स्थापित किया है। संभल की बेटियां और महिलाएं इसकी बानगी का उदाहरण भी पेश कर रही हैं।
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फिर चाहे स्पष्ट और बेबाक टिप्पणियों के लिए साहित्य की दुनिया में धाक जमा रहीं वैशाली रस्तोगी हों या फिर पेंटिग के जरिए अलग-अलग देशों में भारत के रिश्तों को मजबूत बनाने में लगीं आकांक्षा रस्तोगी। साहित्य और कला संस्कृति में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे छोटे से जिले में वैशाली के अलावा संभल निवासी विमला रस्तोगी और चंदौसी की निवासी डॉ. रीता सिंह व डाॅ. आशा बिसारिया ने मौका मिलने पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। एनकेबीएमजी पीजी कॉलेज, चंदौसी में राजनीति विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रीता सिंह को संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की ओर से आयोजित देशभक्ति गीत प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार मिल चुका है।
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नारी सशक्तीकरण पर बल देतीं हैं वैशाली की रचनाएं
संभल की साहित्यकार (वर्तमान में जकार्ता इंडोनेशिया निवासी) वैशाली रस्तोगी ने दोहों के माध्यम से भारतीय सभ्यता, संस्कृति, रीति-रिवाजों एवं परंपराओं का सरलता के साथ सटीक वर्णन किया है। वह नारी सशक्तीकरण पर भी बल देती हैं और वर्तमान भौतिकतावादी युग में खत्म होती जा रही मानवीय संवेदनाओं और आपसी रिश्ते नातों में बिखराव पर चिंता जताती हैं। साहित्य में उन्होंने चार बार सांझा संकलन में विश्व रिकार्ड बनाया है। वैशाली बताती हैं कि अनेकों बार सम्मानित हुई हैं। मैं प्रयत्नशील हूं कि मेरी साहित्यिक यात्रा चलती रहे और में सकारात्मक रचनाओं को पाठकों तक जीवन पर्यंत पहुंचाती रहूं।
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साहित्य से जगा रहीं जन चेतना
विद्यार्थी जीवन से ही मातृभाषा की सेवा तथा राष्ट्र व समाज के प्रति कर्तव्य निर्वहन ने डॉ. रीता सिंह को लेखन की प्रेरणा दी और उन्हें साहित्यकार बना दिया। प्रकृति चित्रण, पर्यावरण संरक्षण, देशभक्ति और सामाजिक चिंतन इनकी रचनाओं के प्रमुख विषय हैं। डॉ. रीता सिंह की वीरों का वंदन, अंतर्वेदना, छाया धुंध का राज गगन में, शीर्षक से तीन काव्य संग्रह और भारतीय राजनीति में नारी की सहभागिता व तुलनात्मक राजनीति सहित पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि अनेक साहित्यिक व सामाजिक मंचों से सम्मानित हुई हूं। मेरे विचार से समाज के प्रत्येक वर्ग में जन चेतना जागृत करने सबसे सशक्त माध्यम साहित्य है।
1665 से साहित्य लिख रही हैं विमला
संभल निवासी शिव चरनदास की बेटी विमला रस्तोगी 1965 से साहित्य लिख रही हैं। इनकी लिखी सैकड़ों कविताएं, नाटक, बाल कहानियां दूरदर्शन दिल्ली व दूरदर्शन उपग्रह से प्रसारित हो रहे हैं। इन्हें बाल साहित्य का भी शौक है। अब तक वह 12 पुस्तकें लिख भी चुकी हैं। उन्हें वर्ष-2021 में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने हिंदी साहित्य सम्मान के लिए चुना था। लखनऊ में 14 सितंबर 2022 को हिंदी दिवस के अवसर पर विमला रस्तोगी को सुभद्रा कुमारी चौहान महिला बाल साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया।
इजराइल के भारतीय दूतावास में टंगी है पेंटिंग
संभल के पुराना टेलीफोन एक्सचेंज के निवासी वीरेंद्र कुमार रस्तोगी की बेटी आकांक्षा रस्तोगी आर्टिस्ट हैं। वर्ष 2022 में वह अपने साइंटिस्ट पति तपिश अग्रवाल के साथ इजराइल में रह रही थीं। भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर 20 सितंबर 2022 को उन्हें पेंटिंग बनाने के लिए भारतीय दूतावास की ओर से आमंत्रित किया गया था। आकांक्षा ने भारत की स्वतंत्रता और समृद्धि का प्रतीक भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर की पेंटिंग बनाई, जिस पर वहां के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के साथ भारतीय राजदूत संजीव सिंगला ने सराहा। पेंटिंग पर राष्ट्रपति ने खुद अपने हाथ से नमस्ते लिखा, जिसके बाद इस पेंटिंग को तेलअवीव स्थित भारतीय दूतावास की दीवार पर टांगा गया है।

प्रकृति और देशप्रेम है रचनाओं का विषय

चंदौसी निवासी आशा बिसारिया कवयित्री हैं। उनकी रचनाओं का प्रमुख विषय प्रकृति तथा देशप्रेम है और प्रमुख विधा गीत है। 90 के दशक से लेखन लगातार चल रहा है।अनेक कविताएं आकाशवाणी रामपुर से भी प्रसारित हुई हैं। अर्पण साहित्य संस्था मुरादाबाद तथा अंतरराष्ट्रीय संस्था बुलंदी से भी जुड़ी है। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। जैसे इंद्रप्रस्थ पत्रिका में व सर्वप्रिय में। आशा बिसारिया ने बताया कि शुरुआती दौर से ही रचना लिखने व पढ़ने का शौक था। पारिवारिक जिम्मेदारी के बीच में रचनाएं नहीं लिख पाई। समय निकाल दोबारा से काम शुरू किया। मेरी रचनाएं सरिता,चेतना,विनायक,संस्कार भारती, विभिन्न महाविद्यालयों की पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।
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