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Sambhal News: व्यापारी की हत्या के बाद फूंक दिया था बहजोई थाना, मुख्यमंत्री की रैली से एक दिन पहले हुई थी वारदात

Sun, 27 Apr 2025 12:22 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Sun, 27 Apr 2025 12:22 AM IST
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After the murder of the businessman, the Bahjoi police station was burnt down, the incident took place a day before the Chief Minister's rally
संभल। 17 अक्तूबर 2003 की शाम करीब पौने सात बजे बहजोई के बाजार में दरोगा और सिपाही की मौजूदगी में व्यापारी सर्वेश गुप्ता घड़ी वालों की रंगदारी नहीं देने पर तीन बदमाशों ने हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने तत्काल एक्शन नहीं लिया था। इससे आक्रोशित भीड़ ने बहजोई थाने को फूंक दिया था। पुलिसकर्मी जान बचाकर भागे थे। बाद में भीड़ पर पुलिसकर्मियों के आवासों में लूटपाट का भी आरोप लगा था। यह घटना बहजोई की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। जिसको अभी भी लोग यादकर सिहर उठते हैं। सर्वेश गुप्ता के बेटे रवि गुप्ता ने बताया कि उनके पिता का घड़ी व इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का ठीकठाक कारोबार था। बहजोई थाना क्षेत्र के गांव बहटा जयसिंह निवासी राजेश, दलवीर और राजपुर निवासी मनोज ने रंगदारी की मांग की थी। पिता ने रंगदारी देने से मना कर दिया था। जिस पर तीनों बदमाशों ने जान से मारने की धमकी दी थी। इसकी शिकायत पुलिस में की थी। 17 अक्तूबर की शाम बहजोई थाने से एक दरोगा जांच पड़ताल करने के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान तीनों बदमाश दुकान पर पहुंचे और गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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दरोगा के साथ एक सिपाही भी मौजूद थे जो उनके पिता के ताल्लुकात में बैठे थे। बीच बाजार में तीनों बदमाश घटना कर आराम से चले गए। किसी ने उनको न पकड़ने की कोशिश की और न पुलिस ही दौड़ी। थाने में शिकायत की तो पुलिस ने तत्काल कोई एक्शन नहीं लिया था।
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रवि गुप्ता बताते हैं वह उस समय 15 वर्ष के थे। गुस्साई भीड़ ने थाने में आग लगा दी थी। बताया कि घटना के अगले दिन यानी 18 अक्तूबर को संभल में उस समय के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की रैली थी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बाद अपनी मौजूदगी में अंतिम संस्कार कराया था। जिस दिन मुलायम सिंह संभल पहुंचे तो शहर में पूरी तरह नाकाबंदी कर दी थी। घर के आसपास पीएसी का पहरा था। जिससे कोई मुख्यमंत्री से मिलने न जा सके। शहर में अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात बना दिए गए थे।
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बहजोई के सभी व्यापारियों से रंगदारी लेते थे तीनों बदमाश
बहजोई के पूर्व चेयरमैन रमेश चंद्र बादशाह बताते हैं कि इन तीनों बदमाशों को शहर और आसपास के इलाके में बड़ा आतंक था। तीनों बड़े व्यापारियों से रंगदारी लेते थे। जो नहीं देता था उसको धमकाते थे। रवि गुप्ता ने बताया कि उस समय तीनों बदमाश हर महीने सभी व्यापारियों से रंगदारी लेते थे लेकिन जब उनके पिता ने मना किया तो उन्हें लगा कि एक व्यापारी नहीं देगा तो बाकी भी विरोध करेंगे। इसलिए वह बाजार में पहुंचे और हत्या कर दी थी।
दो मुठभेड़ में ढेर किए, तीसरे बदमाश को हुई उम्रकैद की सजा
रवि गुप्ता ने बताया कि मनोज और राजेश राघव को पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। जबकि दलवीर को उम्रकैद की सजा हुई थी। थाना फूंकने वाली भीड़ के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला था इसलिए सभी लोग दोषमुक्त हो गए थे। इसमें पूर्व चेयरमैन रमेश चंद्र बादशाह भी आरोपी बनाए गए थे। रमेशचंद्र बादशाह ने बताया कि जिस समय हत्या हुई और थाना फूंका गया उस समय वह गंगा पर एक परिचित के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गए थे। लौटे तो घटना की जानकारी हुई थी। हालांकि घटना के पांच वर्ष बाद सभी दोषमुक्त हो गए थे।
मुलायम सिंह ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी, शस्त्र लाइसेंस जारी कराए थे
घटना के करीब 15 दिन बाद मुलायम सिंह यादव पीड़ित परिवार से मिलने के लिए पहुंचे थे। आर्थिक मदद के साथ ही परिवार में चार शस्त्र लाइसेंस जारी कराए गए थे। यह लाइसेंस मृतक की दो बेटियों, पत्नी और छोटे भाई के नाम से जारी किए गए थे। जो अभी भी इन्हीं लोगों के नाम हैं। मृतक के बेटे रवि ने बताया कि उस समय तो सुरक्षा भी लगा दी गई थी। दो बदमाशों के ढेर होने के बाद और तीसरा बदमाश जेल जाने के बाद सुरक्षा हटाई गई थी।

पिता के नाम से ही चलता है अभी भी कारोबार
रवि ने बताया कि उनके पिता सर्वेश गुप्ता घड़ी वालों के नाम से पहचाने जाते थे। इसलिए अभी भी कारोबार उनके नाम से ही होता है। शहर के सभी लोग इस नाम से अच्छी तरह वाकिफ हैं। घड़ी के साथ अब इलेक्ट्राॅनिक्स सामान का भी काम किया जाता है। रवि ने बताया कि उनके पिता ने ही रंगदारी का विरोध शहर में किया था। उनके पिता ने हिम्मत दिखाई और अपनी जान गंवा दी लेकिन जो रंगदारी वसूली जाती थी वह भी पूरी तरह खत्म हो गई। इससे बहजोई के व्यापारियों को राहत मिल गई।
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