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अलविदाई मजलिस के बाद शिया समुदाय में अगले साल तक थम गया गम का दौर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 16 Oct 2021 01:18 AM IST
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After the Alfai Majlis, the period of sorrow in the Shia community stopped till next year.
संभल। हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की शहादत के गम में शुक्रवार को शिया समुदाय ने गमगीन माहौल में चुप ताजिए का जुलूस निकाला। सिरसी, नूरियो सराय, इकरोटिया, बुकनाला, मढ़न आदि गांवों में जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल अजादार जियारत करते नम आंखे लिए चल रहे थे। अलविदाई मजलिस के बाद गम का यह दौर अगले साल तक के लिए थम गया। शनिवार को शिया समुदाय के लोग ईद ए जहरा का त्योहार मनाएंगे। सवा दो महीने गम में रहने के बाद महिलाएं सुहाग की निशानी चूड़ियां पहनेंगी, मर्द भी काले कपड़े की जगह खुश रंग लिबास पहनेंगे।
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मोर्हरम की पहली तारीख से मनाया जा रहा कर्बला के शहीदों का शोक शुक्रवार को अलविदाई मजलिस के बाद इमाम बाडों व घरों में स्थापित किए गए शोक के प्रतीक काले परचम उतारकर समाप्त कर दिया गया। अब शिया समुदाय के लोगों में खुशी के आयोजन शुरू हो जाएंगे। बताते चले कि शिया समुदाय के लोगों में माहे मोर्हरम का चांद नजर आने के साथ ही कर्बला में दसवीं मोर्हरम को शहीद हुए हजरत इमाम हुसैन और इनके साथियों की याद में शोक का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो दो माह आठ दिन तक जारी रहता है। इस दौरान कोई भी खुशी का आयोजन नहीं किया जाता है। शुक्रवार को नूरिया सराय स्थित इमामबाड़ा नंबरदारान में अलविदाई मजलिस हुई। अन्य इमाम बाडों में जाकर अजादारों ने मरसिया ख्वानी और नोहाख्वानी की। महिलाओं ने भी घरों में अलविदाई मजलिस की। जिसके बाद मजलिस का शोक समाप्त हो गया। इस दौरान शाने अब्बास, उरुज संभली, पैकर संभली, शहिद, रहबर हुसैन, शमाईम रजा हसन, जहीर अली, सादिक आदि रहे।
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उधर, बुकनाला में मुजफफरनगर से आए मौलाना सैयद आबिद हुसैन ने मजलिस को खिताब फरमाया। जुलूस इमामबारगाह साहेबुज्जमान से शुरू हुआ, जो इमामबारगाह बनी हाशिम पर खत्म हुआ। मौलाना ने कर्बला का जिक्र सुनाकर माहौल गमगीन बना दिया। अमारी, अलम और ताबूत का जुलूस निकाला गया। इस दौरान अब्बास हैदर,जिया अब्बास, हादी हसन आदि रहे। सिरसी में भी अलविदाई मजलिस हुई और चुप ताजिए का जुलूस निकाला गया।
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