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चीनी मिल बंद कराने पहुंचा प्रशासन, किसान भड़के

Tue, 27 Feb 2018 12:35 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला / संभ्ाल
ब्यूरो अमर उजाला / संभ्ाल Updated Tue, 27 Feb 2018 12:35 AM IST
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administering the sugar mill clousre
किसानों को आदेश दिखाकर समझाते नायब तहसीलदार । - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उस आदेश का किसानों ने विरोध किया है जिसमें पर्यावरण संबंधी मानक न पूरे करने का आरोप लगाते हुए धामपुर शुगर मिल की असमोली स्थित इकाई को बंद करने का आदेश दिया गया है। इस आदेश का पालन कराने पहुंचे स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को उस वक्त मुश्किलों का सामना करना पड़ा जब किसान भड़क गए और बंदी का आदेश पालन किए जाने पर आत्मदाह की चेतावनी देने लगे। मौके के हालात देख कर अधिकरियों ने  वापस आना ही उचित समझा।
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 केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अभियंता रोहित कुमार और संभल तहसील के नायब तहसीलदार नितिन तनेजा सोमवार को दोपहर 11 बजे के असमोली स्थित डीएसएम शुगर मिल के परिसर में पहुंचे। उस वक्त चीनी मिल के निरीक्षण भवन के बाहर खुले में कृषक गोष्ठी चल रही थी जैसे ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन की गाड़ियां परिसर में दाखिल हुईं, किसानों का ध्यान गया। कुछ ही देर में अधिकारी वहां पहुंच गए और किसानों को पता लगा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश पर अधिकारी चीनी मिल को सील करने पहुंचे हैं। 
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किसानों ने जानकारी मिलते ही अधिकारियो को खरी खोटी सुनाईं। किसानों का कहना था कि उनकी समस्याओं को तो कोई नहीं सुनता। खेत में गन्ना खड़ा है और अधिकारी मिल बंद कराने आ गए। किसानों ने कहा कि अगर उनके विरोध के बाद भी असमय चीनी मिल बंद की जाती है तो वे आत्मदाह करेंगे। किसानों के तेवर देख कर अधिकारी सकते में पड़ गए। कुछ देर तक उन्होंने किसानों को सुना और समझाया। नायब तहसीलदार नितिन तनेजा ने किसानों को बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण से जुड़े कुछ मानकों के पूरा न होने की वजह से चीनी मिल को बंद करने तथा मानकों को पूरा कराने का आदेश दिया है।
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आदेश जिलाधिकारी के पास आए थे और वह उन्हीं आदेशों का पालन कराने आए हैं। लेकिन किसान उनकी बात को सुनने के लिए तैयार ही न थे। उनका कहना था खेतों में अभी 50 प्रतिशत से ज्यादा गन्ना खड़ा है। अगर मिल बंद हो गई तो करोड़ों रुपये   का गन्ना खेत में सूख जाएगा। ऐसे में मध्य सत्र में चीनी मिल को बंद कराने का कोई औचित्य समझ में नहीं आता है।
 
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