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Sambhal News: मक्के के खेत से आई आवाज...टॉर्च जलाकर देखा तो बीस कदम पर खड़ा था तेंदुआ
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जुनावई। दबथरा व आसपास के गांवों के लोगों को तेंदुए के आतंक से निजात नहीं मिल रही है। शुक्रवार रात रखवाली के दौरान मक्के के खेत में खड़-खड़ की आवाज आई। किसानों ने टॉर्च की रोशनी में देखा तो महज बीस कदम की दूरी पर तेंदुआ था। यह देख किसानों के होश उड़ गए। जान बचाकर गांव की ओर भागे। दहशत के चलते ग्रामीणों ने अकेले खेतों में जाना बंद कर दिया है।
दबथरा हिमचल गांव निवासी राम मुकट सिंह के खेत में मक्का और उनके पड़ोसी किशनपाल के खेत में धान की फसल खड़ी है। दोनों किसान शुक्रवार रात करीब आठ बजे रोज की तरह अपने खेतों की रखवाली करने गए थे। किसानों ने बताया गया कि खेत पर पहुंचने के कुछ देर बाद ही मक्का की घनी फसल के अंदर से तेज आवाज आने लगी। शक होने पर दोनों ने अपनी टॉर्च जलाकर फसल की ओर रोशनी की।
रोशनी पड़ते ही मुकट सिंह से करीब 20 कदम की दूरी पर झाड़ियों के बीच तेंदुआ खड़ा दिखाई दिया। तेंदुए को सामने देख दोनों किसानों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, तेंदुए ने जोर से गुर्राया। दोनों किसानों ने शोर मचाते हुए गांव की ओर दौड़ लगा दी। भागते समय अंधेरे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते के कारण दोनों किसान कई बार गिरकर चोटिल हो गए। कपड़े भी फट गए, लेकिन तेंदुए के खौफ में उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। गांव के किनारे पहुंचने पर हिम्मत जुटाकर पीछे देखा तो तेंदुआ नजर नहीं आया। इसके बाद दोनों ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों को पूरी घटना बताई।
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फसल बनी तेंदुए की ढाल
ग्रामीणों का कहना है कि इस समय खेतों में मक्का और धान की फसल छह से सात फीट ऊंची और काफी घनी है। तेंदुए को छिपने और शिकार करने के लिए सुरक्षित जगह मिल रही है। दिन में भी फसल के अंदर कुछ दिखाई नहीं देता। इसलिए किसान अब पशुओं के लिए चारा लेने और खेतों में पानी लगाने से भी डर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों को खेतों की ओर जाने से रोक दिया गया है।
पहले भी कई बार दिख चुका है तेंदुआ
यह कोई पहला मामला नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार कुछ दिन पहले ही क्षेत्र के असदपुर गांव के खेत में तेंदुआ देखा गया था। करीब तीन दिन पहले गुन्नौर थाना क्षेत्र के ईसमपुर डांडा स्थित रघुवीर दास आश्रम की छत पर भी तेंदुए की चहलकदमी देखी गई। लगातार अलग-अलग स्थानों पर तेंदुए के दिखाई देने से यह आशंका जताई जा रही है कि क्षेत्र में एक से अधिक तेंदुए हो सकते हैं।
तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे
ईसमपुर डांडा क्षेत्र में तेंदुए को पकड़ने के लिए विभाग ने अलग-अलग जगहों पर पिंजरे लगा दिए हैं और कर्मचारियों की गश्त भी बढ़ा दी है। वन क्षेत्राधिकारी बृज मोहन सिंह ने बताया कि राम मुकट सिंह और ग्रामीणों की शिकायत पर शनिवार को मौके का निरीक्षण किया गया था। खेतों में तलाशी ली गई, लेकिन मौके पर तेंदुए के पंजों के निशान नहीं मिले हैं। लगातार निगरानी की जा रही है
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दबथरा हिमचल गांव निवासी राम मुकट सिंह के खेत में मक्का और उनके पड़ोसी किशनपाल के खेत में धान की फसल खड़ी है। दोनों किसान शुक्रवार रात करीब आठ बजे रोज की तरह अपने खेतों की रखवाली करने गए थे। किसानों ने बताया गया कि खेत पर पहुंचने के कुछ देर बाद ही मक्का की घनी फसल के अंदर से तेज आवाज आने लगी। शक होने पर दोनों ने अपनी टॉर्च जलाकर फसल की ओर रोशनी की।
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रोशनी पड़ते ही मुकट सिंह से करीब 20 कदम की दूरी पर झाड़ियों के बीच तेंदुआ खड़ा दिखाई दिया। तेंदुए को सामने देख दोनों किसानों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, तेंदुए ने जोर से गुर्राया। दोनों किसानों ने शोर मचाते हुए गांव की ओर दौड़ लगा दी। भागते समय अंधेरे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते के कारण दोनों किसान कई बार गिरकर चोटिल हो गए। कपड़े भी फट गए, लेकिन तेंदुए के खौफ में उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। गांव के किनारे पहुंचने पर हिम्मत जुटाकर पीछे देखा तो तेंदुआ नजर नहीं आया। इसके बाद दोनों ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों को पूरी घटना बताई।
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फसल बनी तेंदुए की ढाल
ग्रामीणों का कहना है कि इस समय खेतों में मक्का और धान की फसल छह से सात फीट ऊंची और काफी घनी है। तेंदुए को छिपने और शिकार करने के लिए सुरक्षित जगह मिल रही है। दिन में भी फसल के अंदर कुछ दिखाई नहीं देता। इसलिए किसान अब पशुओं के लिए चारा लेने और खेतों में पानी लगाने से भी डर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों को खेतों की ओर जाने से रोक दिया गया है।
पहले भी कई बार दिख चुका है तेंदुआ
यह कोई पहला मामला नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार कुछ दिन पहले ही क्षेत्र के असदपुर गांव के खेत में तेंदुआ देखा गया था। करीब तीन दिन पहले गुन्नौर थाना क्षेत्र के ईसमपुर डांडा स्थित रघुवीर दास आश्रम की छत पर भी तेंदुए की चहलकदमी देखी गई। लगातार अलग-अलग स्थानों पर तेंदुए के दिखाई देने से यह आशंका जताई जा रही है कि क्षेत्र में एक से अधिक तेंदुए हो सकते हैं।
तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे
ईसमपुर डांडा क्षेत्र में तेंदुए को पकड़ने के लिए विभाग ने अलग-अलग जगहों पर पिंजरे लगा दिए हैं और कर्मचारियों की गश्त भी बढ़ा दी है। वन क्षेत्राधिकारी बृज मोहन सिंह ने बताया कि राम मुकट सिंह और ग्रामीणों की शिकायत पर शनिवार को मौके का निरीक्षण किया गया था। खेतों में तलाशी ली गई, लेकिन मौके पर तेंदुए के पंजों के निशान नहीं मिले हैं। लगातार निगरानी की जा रही है