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संभल के 68 तीर्थ, 19 कूपों की चौबीस कोसीय परिक्रमा आज
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संभल। अयोध्या, मथुरा की तरह परम कल्याणकारी कल्कि नगरी संभल के 68 तीर्थ और 19 कूपों की चौबीस कोसीय परिक्रमा का सोमवार की भोर में वंश गोपाल तीर्थ से विधिवत शुभारंभ होगा। परिक्रमा में शामिल होने वाले हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ आस्था की डगर पर आगे बढ़ेगी। रात्रि विश्राम चंद्रेश्वर तीर्थ पर होगा। परिक्रमा समिति ने आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यूह रचना तैयार की है। पुलिस प्रशासन की भी परिक्रमा पर निगरानी रहेगी।
श्री वंश गोपाल कल्किधाम बेनीपुर चक में रविवार को सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से पुलिस क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार सिंह और हयातनगर थाने के इंस्पेक्टर राजेश सोलंकी ने जायजा लिया। साथ ही महंत स्वामी भगवत प्रिय महाराज से जानकारी हासिल की। कोविड-19 की गाइडलाइन के पालन करने पर जोर दिया। वहीं, संभल तीर्थ परिक्रमा समिति के अध्यक्ष जीतपाल यादव ने बताया कि परिक्रमा अपने दिव्य और भव्य रुप में सोमवार की भोर में श्री वंश गोपाल कल्किधाम से शुरू होगी।
परिक्रमा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्था में कई हिंदू संगठन अपना सहयोग देंगे। रास्ते में जलपान से लेकर कई तरह की व्यवस्थाएं रहेंगी। श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न आए, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
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तीर्थ यात्रियों के स्वागत को तैयार तीर्थ नीमसार
चौबीस कोसीय परिक्रमा के दौरान सबसे पहला प्राचीन तीर्थ नीमसार (क्षेमनाथ) पड़ेगा। मंदिर के महंत दीनानाथ ने बताया कि मंदिर परिसर को सजाया गया है। तीर्थ यात्रियों के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं।
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श्री वंश गोपाल कल्किधाम बेनीपुर चक में रविवार को सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से पुलिस क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार सिंह और हयातनगर थाने के इंस्पेक्टर राजेश सोलंकी ने जायजा लिया। साथ ही महंत स्वामी भगवत प्रिय महाराज से जानकारी हासिल की। कोविड-19 की गाइडलाइन के पालन करने पर जोर दिया। वहीं, संभल तीर्थ परिक्रमा समिति के अध्यक्ष जीतपाल यादव ने बताया कि परिक्रमा अपने दिव्य और भव्य रुप में सोमवार की भोर में श्री वंश गोपाल कल्किधाम से शुरू होगी।
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परिक्रमा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्था में कई हिंदू संगठन अपना सहयोग देंगे। रास्ते में जलपान से लेकर कई तरह की व्यवस्थाएं रहेंगी। श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न आए, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
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तीर्थ यात्रियों के स्वागत को तैयार तीर्थ नीमसार
चौबीस कोसीय परिक्रमा के दौरान सबसे पहला प्राचीन तीर्थ नीमसार (क्षेमनाथ) पड़ेगा। मंदिर के महंत दीनानाथ ने बताया कि मंदिर परिसर को सजाया गया है। तीर्थ यात्रियों के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं।