{"_id":"65e62b3b94b922b6bc00dafb","slug":"380-crores-spent-still-people-yearn-for-drinking-water-sambhal-news-c-204-1-smbd1003-108061-2024-03-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sambhal News: 3.80 करोड़ खर्च फिर भी पेयजल को तरसे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sambhal News: 3.80 करोड़ खर्च फिर भी पेयजल को तरसे लोग
Tue, 05 Mar 2024 01:42 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Tue, 05 Mar 2024 01:42 AM IST
विज्ञापन
बबराला (संभल)। कस्बे में 15 वर्ष पहले पेयजल व्यवस्था पर 3.80 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी 25 हजार की आबादी पेयजल को तरस रही है। 15 वर्ष से नगर पंचायत की पाइपलाइन क्षतिग्रसत पड़ी है। उसे अभी तक दुरुस्त नहीं कराया है। लापरवाही के चलते करोड़ों रुपये की पेयजल योजना जमीन में दबकर रह गई।
बबराला नगर पंचायत की आबादी करीब 25 हजार है। नगर में शुद्ध पेयजल को साल 2005 में 1200 किलोलीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया गया। जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन भी बिछाई गई। जिसमें करीब 2.30 करोड़ रुपये खर्च किया गया। शुरुआत में नियमित जलापूर्ति भी की गई, लेकिन कुछ समय बाद पाइपलाइन मेें लीकेज की समस्या आ गई। पाइपलाइन दुरुस्त कराने के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। नगर की सीमा विस्तार व आबादी बढ़ने पर एक हजार किलोलीटर का दूसरा ओवरहेड टैंक का प्रस्ताव तैयार कर 2008 में 1.50 करोड़ की लागत से पुलिस चौकी के पीछे बनवाया गया। पाइपलाइन बिछाकर पेयजल आपूर्ति की टेस्टिंग की गई। नगर पंचायत प्रशासन का दावा है कि शुरुआत से ही पाइप लाइन में लीक होने लगी थी। कुछ ही माह में पाइपलाइन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। नगर पंचायत ने उसको ठीक भी कराया। हालांकि लीकेज की समस्या बनी रही है। बाद में नगर पंचायत ने जलापूर्ति बंद कर दी। जिसके बाद नगरवासियों ने पीने के पानी के लिए स्वयं के संसाधन जुटाए। नगर में 50 फीसदी लोगों के घर में सबमर्सिबल लगे हैं, कुछ के घर पर हैंडपंप हैं। अब 15 साल से अधिक समय हो गया। लेकिन नगर पंचायत लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में सफल नहीं हो पाया।
बोले लोग...
कई बार अधिकारियों को कस्बे में बंद पड़ी पेयजल योजना को शुरू कराने के लिए कहा, लेकिन जिम्मेदारों ने संज्ञान नहीं लिया। अगर पाइपलाइन से जलापूर्ति होती है तो लोगों को निश्चित ही लाभ मिलेगा। -जगदीप कुमार
विज्ञापन
कई साल से पेयजल याेजना ध्वस्त पड़ी है। जिम्मेदारों की लापरवाही और अनदेखी के चलते ओवरहेड टैंक भी जर्जर होने लगे हैं। नगर पंचायत की अनदेखी के चलते सरकार के करोड़ों रुपये बर्बाद हो गए। -दुर्गा प्रसाद
ग्रामीण अंचलों में सरकार पेयजल के लिए ओवरहेड टैंक का निर्माण कराकर जलापूर्ति कराने के लिए प्रयासरत हैं। यहां कस्बे में दो-दो ओवरहेड टैंक लगे हैं, इसके बाद कस्बे के लोगो को जलापूर्ति नहीं मिल रही।- भोले गुप्ता
जलस्तर गिरने से हैंडपंप भी पानी कम दे रहे हैं। आर्थिक तंगी के चलते सबमर्सिबल भी नहीं लगवा सकते। नगर पंचायत पाइपलाइन को दुरुस्त कराकर जलापूर्ति शुरू करे। ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके। - चैतन्य
पेयजल योजना को दोबारा शुरू कराने के लिए जल निगम से संपर्क किया गया है। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की वजह से समस्या बनी है। उम्मीद है कि इस सप्ताह काम शुरू हो जाएगा। जल्द ही लोगों को पाइपलाइन से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।- अमरेश तिवारी, ईओ
विज्ञापन
बबराला नगर पंचायत की आबादी करीब 25 हजार है। नगर में शुद्ध पेयजल को साल 2005 में 1200 किलोलीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया गया। जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन भी बिछाई गई। जिसमें करीब 2.30 करोड़ रुपये खर्च किया गया। शुरुआत में नियमित जलापूर्ति भी की गई, लेकिन कुछ समय बाद पाइपलाइन मेें लीकेज की समस्या आ गई। पाइपलाइन दुरुस्त कराने के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। नगर की सीमा विस्तार व आबादी बढ़ने पर एक हजार किलोलीटर का दूसरा ओवरहेड टैंक का प्रस्ताव तैयार कर 2008 में 1.50 करोड़ की लागत से पुलिस चौकी के पीछे बनवाया गया। पाइपलाइन बिछाकर पेयजल आपूर्ति की टेस्टिंग की गई। नगर पंचायत प्रशासन का दावा है कि शुरुआत से ही पाइप लाइन में लीक होने लगी थी। कुछ ही माह में पाइपलाइन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। नगर पंचायत ने उसको ठीक भी कराया। हालांकि लीकेज की समस्या बनी रही है। बाद में नगर पंचायत ने जलापूर्ति बंद कर दी। जिसके बाद नगरवासियों ने पीने के पानी के लिए स्वयं के संसाधन जुटाए। नगर में 50 फीसदी लोगों के घर में सबमर्सिबल लगे हैं, कुछ के घर पर हैंडपंप हैं। अब 15 साल से अधिक समय हो गया। लेकिन नगर पंचायत लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में सफल नहीं हो पाया।
विज्ञापन
बोले लोग...
कई बार अधिकारियों को कस्बे में बंद पड़ी पेयजल योजना को शुरू कराने के लिए कहा, लेकिन जिम्मेदारों ने संज्ञान नहीं लिया। अगर पाइपलाइन से जलापूर्ति होती है तो लोगों को निश्चित ही लाभ मिलेगा। -जगदीप कुमार
विज्ञापन
कई साल से पेयजल याेजना ध्वस्त पड़ी है। जिम्मेदारों की लापरवाही और अनदेखी के चलते ओवरहेड टैंक भी जर्जर होने लगे हैं। नगर पंचायत की अनदेखी के चलते सरकार के करोड़ों रुपये बर्बाद हो गए। -दुर्गा प्रसाद
ग्रामीण अंचलों में सरकार पेयजल के लिए ओवरहेड टैंक का निर्माण कराकर जलापूर्ति कराने के लिए प्रयासरत हैं। यहां कस्बे में दो-दो ओवरहेड टैंक लगे हैं, इसके बाद कस्बे के लोगो को जलापूर्ति नहीं मिल रही।- भोले गुप्ता
जलस्तर गिरने से हैंडपंप भी पानी कम दे रहे हैं। आर्थिक तंगी के चलते सबमर्सिबल भी नहीं लगवा सकते। नगर पंचायत पाइपलाइन को दुरुस्त कराकर जलापूर्ति शुरू करे। ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके। - चैतन्य
पेयजल योजना को दोबारा शुरू कराने के लिए जल निगम से संपर्क किया गया है। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की वजह से समस्या बनी है। उम्मीद है कि इस सप्ताह काम शुरू हो जाएगा। जल्द ही लोगों को पाइपलाइन से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।- अमरेश तिवारी, ईओ