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मौसम में बदलाव से बढ़ रही मरीजों की तादात, बुखार, खांसी, जुकाम का प्रकोप
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संभल। रात की सर्दी और दिन में गर्मी के साथ बदल रहे मौसम के मिजाज से मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। भले ही जिला अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा हो, लेकिन मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने से यहां मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है।
प्रतिदिन करीब 600 से 800 नए मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। अगर पुराने मरीजों की संख्या को भी शामिल कर लिया जाए तो यह संख्या 1200 के करीब पहुंच जाएगी। सबसे ज्यादा मरीज बुखार, सर्दी-खांसी, जुकाम के साथ कोल्ड डायरिया के हैं।
मरीजों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है। जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी और बदहाली का आलम किसी से छिपा नहीं है। जिसका प्रमुख कारण चिकित्सकों की कमी है। आलम यह है कि फिजिशियन के साथ ही जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद खाली है। नगर के कई सामाजिक और राजनैतिक संगठन रिक्त पदों के भरने की मांग कर चुके हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग पर कोई असर नहीं होता।
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खामियाजा नगर और आसपास के गांवों से आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ता है। अब मौसम में बदलाव के दौरान बढ़ रही मरीजों की संख्या से अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सही से संचालित नहीं हो रहीं और मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों में उपचार कराना पड़ रहा है। इस संबंध में जब सीएसएम डा. एके गुप्ता से बात की तो वह जवाब देने में कतराते नजर आए।
स्वास्थ्य के प्रति बरतें सावधानी, ऐसे करें बचाव
संभल। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी जुहेब करीम ने बताया कि मौसम परिवर्तन होने के साथ ही मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़ने लगे हैं। बुखार, सर्दी, जुकाम-खांसी के साथ कोल्ड डायरिया के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। खानपान और रहन-सहन पर ध्यान दिया जाए तो मौसमी बीमारियों के प्रकोप से बचा जा सकता है। बुखार आने पर चिकित्सक के पास पहुंचे। बुखार से बचने के लिए मच्छरों से बचें और घर और आसपास सफाई रखें, जिससे मच्छर न पनपें।
लापरवाही पड़ सकती है भारी, पहने बचाव के लिए कपड़े
संभल। डा. मोहम्मद वसीम का कहना है कि दिन में तो मौसम गर्म होता है, पर रात में तापमान गिरता है। जिससे कपड़े नहीं पहनने की लापरवाही भारी पड़ जाती है। गर्मी के बाद सर्दी का असर बीमारियों को दावत देता है। इसके साथ ही ठंडी चीजों से परहेज करें। बच्चों को सुबह होते ही बेड से उठकर सीधे बाहर न जाने दें। सुबह फर्श पर नंगे पैर चलने से बचें।
खूब पीते रहें पानी
संभल। डा. प्रवेंद्र सिंह ने बताया कि गर्मी में प्यास लगती है तो लोग पानी भी खूब पीते हैं। सर्दी के मौसम में पानी कम मात्रा में पीते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। शरीर में पानी की कमी से डिहाइड्रेशन हो सकता है। कोल्ड डायरिया के भी शिकार हो सकते हैं। इसलिए सर्दी में साफ पानी जितना हो सके उतना पीयें।
अस्पताल में खांसी का सीरप खत्म
संभल। जिला अस्पताल में मिलने वाला कफ सीरप अब मरीजों को नहीं मिल रहा है। मौसम बदला, खांसी-जुकाम के मरीज बढ़े तो कफ सीरप खत्म हो गया। दर्द के लिए मिलने वाला ट्यूब भी नहीं है। कुछ अन्य दवाएं भी स्टॉक में नहीं हैं। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीज अस्पताल की बदहाली को कोसते नजर आए।
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प्रतिदिन करीब 600 से 800 नए मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। अगर पुराने मरीजों की संख्या को भी शामिल कर लिया जाए तो यह संख्या 1200 के करीब पहुंच जाएगी। सबसे ज्यादा मरीज बुखार, सर्दी-खांसी, जुकाम के साथ कोल्ड डायरिया के हैं।
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मरीजों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है। जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी और बदहाली का आलम किसी से छिपा नहीं है। जिसका प्रमुख कारण चिकित्सकों की कमी है। आलम यह है कि फिजिशियन के साथ ही जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद खाली है। नगर के कई सामाजिक और राजनैतिक संगठन रिक्त पदों के भरने की मांग कर चुके हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग पर कोई असर नहीं होता।
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खामियाजा नगर और आसपास के गांवों से आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ता है। अब मौसम में बदलाव के दौरान बढ़ रही मरीजों की संख्या से अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सही से संचालित नहीं हो रहीं और मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों में उपचार कराना पड़ रहा है। इस संबंध में जब सीएसएम डा. एके गुप्ता से बात की तो वह जवाब देने में कतराते नजर आए।
स्वास्थ्य के प्रति बरतें सावधानी, ऐसे करें बचाव
संभल। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी जुहेब करीम ने बताया कि मौसम परिवर्तन होने के साथ ही मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़ने लगे हैं। बुखार, सर्दी, जुकाम-खांसी के साथ कोल्ड डायरिया के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। खानपान और रहन-सहन पर ध्यान दिया जाए तो मौसमी बीमारियों के प्रकोप से बचा जा सकता है। बुखार आने पर चिकित्सक के पास पहुंचे। बुखार से बचने के लिए मच्छरों से बचें और घर और आसपास सफाई रखें, जिससे मच्छर न पनपें।
लापरवाही पड़ सकती है भारी, पहने बचाव के लिए कपड़े
संभल। डा. मोहम्मद वसीम का कहना है कि दिन में तो मौसम गर्म होता है, पर रात में तापमान गिरता है। जिससे कपड़े नहीं पहनने की लापरवाही भारी पड़ जाती है। गर्मी के बाद सर्दी का असर बीमारियों को दावत देता है। इसके साथ ही ठंडी चीजों से परहेज करें। बच्चों को सुबह होते ही बेड से उठकर सीधे बाहर न जाने दें। सुबह फर्श पर नंगे पैर चलने से बचें।
खूब पीते रहें पानी
संभल। डा. प्रवेंद्र सिंह ने बताया कि गर्मी में प्यास लगती है तो लोग पानी भी खूब पीते हैं। सर्दी के मौसम में पानी कम मात्रा में पीते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। शरीर में पानी की कमी से डिहाइड्रेशन हो सकता है। कोल्ड डायरिया के भी शिकार हो सकते हैं। इसलिए सर्दी में साफ पानी जितना हो सके उतना पीयें।
अस्पताल में खांसी का सीरप खत्म
संभल। जिला अस्पताल में मिलने वाला कफ सीरप अब मरीजों को नहीं मिल रहा है। मौसम बदला, खांसी-जुकाम के मरीज बढ़े तो कफ सीरप खत्म हो गया। दर्द के लिए मिलने वाला ट्यूब भी नहीं है। कुछ अन्य दवाएं भी स्टॉक में नहीं हैं। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीज अस्पताल की बदहाली को कोसते नजर आए।