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गेहूं क्रय केंद्र पर पर नकद खरीद से सिस्टम पर उठ रहे सवाल
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बबराला। किसानों को गेहूं की फसल का वाजिब दाम दिलाने के लिए सरकार की ओर से समर्थन मूल्य घोषित कर ठोस प्रयास किए जाते हैं। जिनके लिए अलग-अलग क्षेत्र के अनुसार क्रय केंद्र बनाकर गेहूं की खरीद कराई जाती है। जिसमें बिचौलियों की भूमिका को कम किया जा सके। सरकार की ओर से किसानों का पंजीकरण करा कर उनके गेहूं की खरीद कर भुगतान समर्थन मूल्य के हिसाब से सीधा खातों में किया जाता है, लेकिन क्रय केंद्रों पर व्याप्त अनियमितताओं के चलते किसान या तो पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्ण न होने की वजह से परेशान है या फिर नकद धनराशि लेने के लिए वह अपने गेहूं को सस्ती दरों पर बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। लिहाजा गेहूं की तोल के लिए घंटों लाइन में खड़े न रहने के लिए भी किसान बिचौलियों की मदद ले रहे हैं।
कस्बा बबराला के बदायूं रोड पर स्थित मंडी समिति परिसर में उत्तर प्रदेश राज्य आवश्यक वस्तु निगम की ओर से संचालित किए जा रहे क्रय केंद्र पर क्षेत्र के किसान गेहूं बेचने के लिए आ रहे हैं। क्रय केंद्र पर एक किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां गेहूं बेचने वाले अधिकतर किसानों को पंजीकरण के नाम पर परेशान किया जाता है और नकद बेचने के लिए प्रेरित करके उन्हें कम दरों पर भुगतान किया जाता है। जबकि जो किसान अपना पंजीकरण कराके गेहूं बेचना चाहते हैं उन्हें या तो घंटों लाइन में लगना पड़ता है या फिर भुगतान के नाम पर लेट लतीफी की जाती है।
जबकि किसान अपने गेहूं को बेचकर तत्काल नकदी प्राप्त करके अपना काम चलाना चाहता है। रसूलपुर गांव के किसान चंद्रपाल सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से घोषित समर्थन मूल्य बेशक 1840 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन उन्हें अपने घर पर बेटे की शादी के लिए नकदी की जरूरत है। इसलिए उन्होंने सौ रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाते हुए गेहूं को नकद में बेच दिया। सूत्रों की मानें तो क्रय केंद्र पर बिना पंजीकरण वाले किसानों से नकद गेहूं खरीद कर उन्हें दूसरे किसानों के नाम पर दर्ज कर लिया जाता है। जिसका मुनाफा बिचौलियों के माध्यम से अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाता है। मीरमपुर गांव के एक किसान ने बताया कि भुगतान में लेट लतीफी और घंटों के इंतजार के चलते अधिकतर किसान गेहूं को नकद बेचकर जाते हैं। उन्हें भी पिछले वर्ष तीन दिन तक लाइन में लग कर इंतजार करना पड़ा था। जिसकी वजह से वह इस बार अपना गेहूं नकद बेच रहे हैं।
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हमारे यहां पर नकद गेहूं क्रय करने का कोई प्रावधान नहीं है जिन किसानों का पंजीकरण है उन्हीं का गेहूं खरीद के सीधे खातों में भुगतान किया जाता है। अगर किसान का पंजीकरण नहीं है तो उनसे खाता संख्या और खतौनी की नकल लेते हुए तत्काल पंजीकरण करके गेहूं की खरीद की जाती है। जबकि खर्चे के नाम पर कोई वसूली नहीं की जाती है। - रूपचंद, क्रय केंद्र प्रभारी, मंडी समिति बबराला।
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कस्बा बबराला के बदायूं रोड पर स्थित मंडी समिति परिसर में उत्तर प्रदेश राज्य आवश्यक वस्तु निगम की ओर से संचालित किए जा रहे क्रय केंद्र पर क्षेत्र के किसान गेहूं बेचने के लिए आ रहे हैं। क्रय केंद्र पर एक किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां गेहूं बेचने वाले अधिकतर किसानों को पंजीकरण के नाम पर परेशान किया जाता है और नकद बेचने के लिए प्रेरित करके उन्हें कम दरों पर भुगतान किया जाता है। जबकि जो किसान अपना पंजीकरण कराके गेहूं बेचना चाहते हैं उन्हें या तो घंटों लाइन में लगना पड़ता है या फिर भुगतान के नाम पर लेट लतीफी की जाती है।
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जबकि किसान अपने गेहूं को बेचकर तत्काल नकदी प्राप्त करके अपना काम चलाना चाहता है। रसूलपुर गांव के किसान चंद्रपाल सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से घोषित समर्थन मूल्य बेशक 1840 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन उन्हें अपने घर पर बेटे की शादी के लिए नकदी की जरूरत है। इसलिए उन्होंने सौ रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाते हुए गेहूं को नकद में बेच दिया। सूत्रों की मानें तो क्रय केंद्र पर बिना पंजीकरण वाले किसानों से नकद गेहूं खरीद कर उन्हें दूसरे किसानों के नाम पर दर्ज कर लिया जाता है। जिसका मुनाफा बिचौलियों के माध्यम से अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाता है। मीरमपुर गांव के एक किसान ने बताया कि भुगतान में लेट लतीफी और घंटों के इंतजार के चलते अधिकतर किसान गेहूं को नकद बेचकर जाते हैं। उन्हें भी पिछले वर्ष तीन दिन तक लाइन में लग कर इंतजार करना पड़ा था। जिसकी वजह से वह इस बार अपना गेहूं नकद बेच रहे हैं।
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हमारे यहां पर नकद गेहूं क्रय करने का कोई प्रावधान नहीं है जिन किसानों का पंजीकरण है उन्हीं का गेहूं खरीद के सीधे खातों में भुगतान किया जाता है। अगर किसान का पंजीकरण नहीं है तो उनसे खाता संख्या और खतौनी की नकल लेते हुए तत्काल पंजीकरण करके गेहूं की खरीद की जाती है। जबकि खर्चे के नाम पर कोई वसूली नहीं की जाती है। - रूपचंद, क्रय केंद्र प्रभारी, मंडी समिति बबराला।