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स्वच्छता पर लापरवाह संभल पालिका पर पांच लाख रुपये का जुर्माना
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चंदौसी। एक तरफ तो स्वच्छ भारत अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में है लेकिन जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से निभाने के तैयार नहीं है। आलम यह है कि अब स्वच्छता जैसे मामलों में अदालतों को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। ऐसे ही एक मामले में नगर पालिका परिषद संभल पर स्थायी लोक अदालत मुरादाबाद ने पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
संभल के मोहल्ला पंजू सराय निवासी मोहम्मद सलीम पुत्र महबूब खां का ग्राम तख्तपुर गोसाई में गाटा संख्या-407 का खेत है। पिछले सालों में नगर पालिका परिषद द्वारा मुरादाबाद रोड पर एक नाले का निर्माण कराया गया। जिसे संभल से बनाते हुए सलीम के खेत के पास ही अधूरा छोड़ दिया गया।
जिससे संभल शहर का गंदा पानी उसके खेत में एकत्र होने लगा। जिससे उसके खेत में कृषि कार्य भी बंद हो गए। गंदे पानी से आसपास के क्षेत्र में बीमारियों का प्रकोप होने लगा। कई बार पालिका से इस समस्या का निदान कराने को कहा गया लेकिन पालिका ने एक नहीं सुनी। इस पर खेत स्वामी ने क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए उपभोक्ता मामलों के अधिवक्ता देवेंद्र कुमार वार्ष्णेय के माध्यम से स्थायी लोक अदालत मुरादाबाद में वाद दायर किया। अदालत ने जवाब मांगा तो पालिका ने जवाब दिया कि उसने अपने क्षेत्राधिकार तक नाला निर्माण किया है। लेकिन खेत में पानी जाने, फसल नहीं होने पर कोई जवाब नहीं दिया।
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न्यायालय ने माना कि शहर के गंदे नालों के पानी, मल के समायोजन का कार्य पालिका का ही है। स्वच्छता पर केंद्र व राज्य सरकारें भी प्रयासरत हैं। पालिका ने अपने क्षेत्राधिकार में समायोजित नहीं करके सेवाओं में कमी की है। अस्वच्छता को बढ़ावा दिया है। न्यायालय ने नगर पालिका परिषद को आदेश दिया है कि वह याची को पांच लाख रुपये क्षतिपूर्ति अदा करें। जिसमें से 2.50 लाख रुपये जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पक्ष में देय होंगे। एक माह के अंदर भुगतान नहीं करने पर आठ प्रतिशत का वार्षिक ब्याज भी पालिका संभल को देना होगा।
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संभल के मोहल्ला पंजू सराय निवासी मोहम्मद सलीम पुत्र महबूब खां का ग्राम तख्तपुर गोसाई में गाटा संख्या-407 का खेत है। पिछले सालों में नगर पालिका परिषद द्वारा मुरादाबाद रोड पर एक नाले का निर्माण कराया गया। जिसे संभल से बनाते हुए सलीम के खेत के पास ही अधूरा छोड़ दिया गया।
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जिससे संभल शहर का गंदा पानी उसके खेत में एकत्र होने लगा। जिससे उसके खेत में कृषि कार्य भी बंद हो गए। गंदे पानी से आसपास के क्षेत्र में बीमारियों का प्रकोप होने लगा। कई बार पालिका से इस समस्या का निदान कराने को कहा गया लेकिन पालिका ने एक नहीं सुनी। इस पर खेत स्वामी ने क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए उपभोक्ता मामलों के अधिवक्ता देवेंद्र कुमार वार्ष्णेय के माध्यम से स्थायी लोक अदालत मुरादाबाद में वाद दायर किया। अदालत ने जवाब मांगा तो पालिका ने जवाब दिया कि उसने अपने क्षेत्राधिकार तक नाला निर्माण किया है। लेकिन खेत में पानी जाने, फसल नहीं होने पर कोई जवाब नहीं दिया।
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न्यायालय ने माना कि शहर के गंदे नालों के पानी, मल के समायोजन का कार्य पालिका का ही है। स्वच्छता पर केंद्र व राज्य सरकारें भी प्रयासरत हैं। पालिका ने अपने क्षेत्राधिकार में समायोजित नहीं करके सेवाओं में कमी की है। अस्वच्छता को बढ़ावा दिया है। न्यायालय ने नगर पालिका परिषद को आदेश दिया है कि वह याची को पांच लाख रुपये क्षतिपूर्ति अदा करें। जिसमें से 2.50 लाख रुपये जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पक्ष में देय होंगे। एक माह के अंदर भुगतान नहीं करने पर आठ प्रतिशत का वार्षिक ब्याज भी पालिका संभल को देना होगा।