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59400 मीट्रिक टन क्षमता वाले छह भंडार गृहों में अब तक सिर्फ आठ सौ मीट्रिक टन गेहूं
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चंदौसी। जिले में करीब तीस सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद का दावा किया जा रहा है। इसके साथ ही जिले में छह भंडारण केंद्र (गोदाम) हैं। जिनकी क्षमता 59400 मीट्रिक टन गेहूं है। भारतीय खाद्य निगम इनमें खरीदा गया गेहूं भंडारित कर रहा है, लेकिन अभी तक जिले के गोदामों में 400 मीट्रिक टन रामपुर जिले का मिलाकर कुल 800 मिट्रिक टन गेहूं ही भंडारित हो सका है। सबसे खास बात यह है कि गोदामों पर उतराई काफी धीमी गति से हो रही है। जिसके कारण भंडार गृहों पर लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं।
संभल जिले में चंदौसी में सेंट्रल वेयर हाउस के प्रथम व द्वितीय की क्षमता क्रमश: 4900 व 11200, स्टेट वेर हाउस बबराला में 23000, जारईगेट के 4200, संभल में 8680, बहजोई में 7420 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता है। सभी छह भंडारण केंद्रों की 59400 मीट्रिक टन है। जिले में इन सभी भंडार गृहों में अब तक सिर्फ 80 हजार क्विंटल ही गेहूं भंडारित हो सका है, जिसमें आधा रामपुर जिले का है।
भंडार गृहों में लेबर की दिक्कत होने के कारण उतार की गति काफी धीमी है। जिसके कारण क्रय केंद्रों से गेहूं लेकर आने वाले ट्रकों को कई-कई घंटे लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। जिससे क्रय केंद्र एजेंसियों को अनावश्यक रूप से भाड़ा देना पड़ता है। यदि यही स्थिति रही तो न तो खरीद का लक्ष्य पूरा हो पाएगा और ना ही भंडार गृह भर पाएंगे। नियमानुसार अभी तक सिर्फ दो फीसदी का डैमेज (काला दाना) आदि को लिया जा सकता है लेकिन स्टेट वेयर हाउस के प्रभारी के मुताबिक बीते दिन तैयार गेहूं की फसल पर हुई बरसात आदि से गेहूं के अंदर दाना काला हो गया है।
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कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां से करीब पांच से दस फीसदी काला दाना निकल रहा है। हालांकि अभी आधे से अधिक क्षेत्र का गेहूं साफ है। काला दाना अधिक होने के कारण गेहूं को भंडारण के लिए रिजेक्ट कर दिया जाता है।
जिससे क्रय केंद्र प्रभारियों की मुसीबत बढ़ जाती है। स्टेट वेयर हाउस जारईगेट नखासा के इंचार्ज धीरेंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं पर बरसात का असर दिख रहा है। कई क्षेत्रों के गेहूं में पांच से दस फीसदी तक काला दाना आ रहा है। जो मानक के अनुरूप होता है, उसे तो भंडारित किया जा रहा है, शेष को रिजेक्ट कर दिया जाता है। जिसे वापस ले जाना पड़ता है।
रिजेक्ट होने पर क्रय केंद्र प्रभारियों को दिक्कत
चंदौसी। स्टेट वेयर हाउस हो या फिर सेंटर वेयर हाउस, जब क्रय केंद्रों से गेहूं को भंडारण के लिए भेजा जाता है, जो उसमें लेबर द्वारा ट्रक में भराई, ट्रक का भाड़ा आदि लगता है लेकिन जब गेहूं को भंडारण के लिए रिजेक्ट कर दिया जाता है को ट्रक वाला फिर वापस ले आता है, फिर गेहूं को उतारना पड़ता है, जिसमें फिर लेबर लगती है। यह गेहूं अब जाए कहां यह बड़ी समस्या पैदा हो जाती है। जिसका असर सीधे तौर पर गेहूं की खरीद पर पड़ता है। जब खरीद के समय गेहूं को रिजेक्ट कर दिया जाता है तो किसान आढ़तियों को बेच देते हैं।
-जिले के सभी छह भंडारण केंद्रों में अब तक 800 एमटी यानी 80 हजार क्विंटल गेहूं का भंडारण हो चुका है, अभी भंडारण के लिए काफी जगह थी। पहले तो रामपुर का गेहूं भंडारण के लिए जिले में आता था लेकिन अब नहीं आ रहा है। काला दाना आ रहा है, अभी तक सिर्फ दो फीसदी काले दाने की छूट है लेकिन खाद्य मंत्रालय को छूट को बढ़ाने के लिए लिखा गया है। -धीरेंद्र सिंह, इंचार्ज, गोदाम प्रभारी सेंट्रल वेयर हाउस जारईगेट, चंदौसी।
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संभल जिले में चंदौसी में सेंट्रल वेयर हाउस के प्रथम व द्वितीय की क्षमता क्रमश: 4900 व 11200, स्टेट वेर हाउस बबराला में 23000, जारईगेट के 4200, संभल में 8680, बहजोई में 7420 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता है। सभी छह भंडारण केंद्रों की 59400 मीट्रिक टन है। जिले में इन सभी भंडार गृहों में अब तक सिर्फ 80 हजार क्विंटल ही गेहूं भंडारित हो सका है, जिसमें आधा रामपुर जिले का है।
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भंडार गृहों में लेबर की दिक्कत होने के कारण उतार की गति काफी धीमी है। जिसके कारण क्रय केंद्रों से गेहूं लेकर आने वाले ट्रकों को कई-कई घंटे लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। जिससे क्रय केंद्र एजेंसियों को अनावश्यक रूप से भाड़ा देना पड़ता है। यदि यही स्थिति रही तो न तो खरीद का लक्ष्य पूरा हो पाएगा और ना ही भंडार गृह भर पाएंगे। नियमानुसार अभी तक सिर्फ दो फीसदी का डैमेज (काला दाना) आदि को लिया जा सकता है लेकिन स्टेट वेयर हाउस के प्रभारी के मुताबिक बीते दिन तैयार गेहूं की फसल पर हुई बरसात आदि से गेहूं के अंदर दाना काला हो गया है।
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कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां से करीब पांच से दस फीसदी काला दाना निकल रहा है। हालांकि अभी आधे से अधिक क्षेत्र का गेहूं साफ है। काला दाना अधिक होने के कारण गेहूं को भंडारण के लिए रिजेक्ट कर दिया जाता है।
जिससे क्रय केंद्र प्रभारियों की मुसीबत बढ़ जाती है। स्टेट वेयर हाउस जारईगेट नखासा के इंचार्ज धीरेंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं पर बरसात का असर दिख रहा है। कई क्षेत्रों के गेहूं में पांच से दस फीसदी तक काला दाना आ रहा है। जो मानक के अनुरूप होता है, उसे तो भंडारित किया जा रहा है, शेष को रिजेक्ट कर दिया जाता है। जिसे वापस ले जाना पड़ता है।
रिजेक्ट होने पर क्रय केंद्र प्रभारियों को दिक्कत
चंदौसी। स्टेट वेयर हाउस हो या फिर सेंटर वेयर हाउस, जब क्रय केंद्रों से गेहूं को भंडारण के लिए भेजा जाता है, जो उसमें लेबर द्वारा ट्रक में भराई, ट्रक का भाड़ा आदि लगता है लेकिन जब गेहूं को भंडारण के लिए रिजेक्ट कर दिया जाता है को ट्रक वाला फिर वापस ले आता है, फिर गेहूं को उतारना पड़ता है, जिसमें फिर लेबर लगती है। यह गेहूं अब जाए कहां यह बड़ी समस्या पैदा हो जाती है। जिसका असर सीधे तौर पर गेहूं की खरीद पर पड़ता है। जब खरीद के समय गेहूं को रिजेक्ट कर दिया जाता है तो किसान आढ़तियों को बेच देते हैं।
-जिले के सभी छह भंडारण केंद्रों में अब तक 800 एमटी यानी 80 हजार क्विंटल गेहूं का भंडारण हो चुका है, अभी भंडारण के लिए काफी जगह थी। पहले तो रामपुर का गेहूं भंडारण के लिए जिले में आता था लेकिन अब नहीं आ रहा है। काला दाना आ रहा है, अभी तक सिर्फ दो फीसदी काले दाने की छूट है लेकिन खाद्य मंत्रालय को छूट को बढ़ाने के लिए लिखा गया है। -धीरेंद्र सिंह, इंचार्ज, गोदाम प्रभारी सेंट्रल वेयर हाउस जारईगेट, चंदौसी।