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भारी घेराबंदी के बावजूद फिर उसी स्थान पर लौटा लकड़बग्घा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jan 2019 01:05 AM IST
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भारी घेराबंदी के बावजूद फिर उसी स्थान पर लौटा लकड़बग्घा
चंदौसी/जुनावई। नगला अजमेरी के मजरा करीमपुर में वन विभाग के पिंजरे में तो कोई जंगली जानवर नहीं फंसा लेकिन जो जंगली जानवर रविवार को दिन दहाड़े बच्चा उठा ले गया था, वह रात में फिर उसी स्थान पर पहुंचा, इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि सोमवार की सुबह उसी रास्ते पर स्पष्ट पंजों के निशान मिले हैं। इस बात को लेकर वन विभाग में भी खलबली मच गई है और ग्रामीणों में दहशत और बढ गई है। उप जिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर विभागीय लापरवाही पर वन विभाग को आड़े हाथों लिया।
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रविवार को नगला अजमेरी गांव के मजरा करीमपुर निवासी शेर सिंह के ढ़ाई साल के पुत्र विकेश को जंगली जानवर दिन दहाड़े उठा ले गया था। पीछा करने दौड़े ग्रामीणों को चकमा देकर दूसरी दिशा में जाकर बच्चे को खा गया था, जानवर बच्चे के मांस के साथ साथ हड्डियां तक चबा गया था।
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जिसे पकड़ने के लिए वन विभाग ने जंगल में पिंजरा लगाया था, जिसमें एक बकरी को भी बांधा था, ताकि जंगली जानवर बकरी को शिकार बनाने आए और पिंजरे में फंस जाए लेकिन सोमवार की सुबह बकरी ज्यों की त्यों थी, पिंजरे में कोई अन्य जानवर नहीं फंसा था। लेकिन तभी शोर मचा कि करीमपुर में शेर सिंह के घर के पिछवाड़े, ठीक उसी स्थान पर जहां से बच्चा उठाया गया था वहां किसी ब़डे जानवर के स्पष्ट पंजों के निशान दिखाई दे रहे थे। यह निशान रविवार को नहीं थे।
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वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, पंजों के नमूने लिए। डिप्टी रेंजर लल्लन सिंह द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर डीएफओ डीके चतुर्वेदी ने बताया कि पंजों के निशान देखकर स्पष्ट हो गया हैकि वह जंगली जानवर चीता, तेंदुआ या शेर नहीं बल्कि लकड़बग्घा है। क्योंकि लकड़बग्घा ही ऐसा जानवर हैं, जो हड्डी भी खा लेता है।
उप जिलाधिकारी ओमवीर सिंह भी मौके पर पहुंचे, वन विभाग को लापरवाही पर आड़े हाथो लेते हुए कहाकि जब जंगली पशु की आवाजाही महीनेभर से देखी जा रही है तो अब कोई ठोस उपाय क्यों नहीं किए गए। इसमें किसी तरह की कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जब तक जंगली पशु पकड़ा नहीं जाता, तब तक वन विभाग की टीम मौके पर भी कैंप करेगी।
इधर, वन क्षेत्राधिकारी गुन्नौर विशन सिंह यादव ने बताया कि लकड़बग्घा रविवार की रात को फिर वहां लौट कर आया था, जहां से बच्चा ले गया था, इसकी कल्पना भी नहीं की थी किसी ने, इसलिए अब पिंजरा उसी रास्ते में लगवाया गया है। जहां उसका आवागमन पाया गया है। मौके पर डिप्टी रेंजर लल्लन सिंह, वन दरोगा नरेंद्र सिंह यादव, विदेशपाल सिंह, टीम इंचार्ज राम निवास को भी लगाया गया है।
जंगली जानवर के भय के कारण ग्रामीणों ने जागकर बिताई सर्द रात
नगला अजमेरी के करीमपुर गांव में पूरे गांव ने जागकर रात बिताई। जिनके घरों में दरवाजे नहीं थे, दीवार कम ऊंची थी, वह अपने नौनिहालों की सुरक्षा में पूरी रात आग जलाकर रखवाली करते रहे। दहशत का आलम यह है कि सुबह चार बजे जाग कर खेत खलिहानों की ओर रख कर देने वाले गांव में करीब दस बजे के बाद ही लोग घरों से बाहर निकले। हर ग्रामीण के चेहरे पर दहशत साफ दिखाई दे रही है। यह तो शायद ग्रामीणों ने कभी नहीं सोचा था कि जंगली पशु इतनी घेराबंदी व शोर शराबे के बाद फिर उसी समय स्थान पर लौटेगा लेकिन इतना ग्रामीणों को अंदेशा है कि उसके मुंह में खून लग चुका है, इसलिए वह शीघ्र ही कहीं व कहीं हमला जरूर करेगा। यही कारण हैकि ग्रामीण बेहद सतर्क हैं। यूं तो पूरा गांव ही डरा सहमा रहा। सभी लोग अपने घरों में जागते रहे। गांव के दानवीर सिंह, विजयपाल, रघुराज सिंह, भूरे सिंह, चंद्रकेश, परमेश्वरी सिंह ने बताया कि कई लोगो के घरों के दरवाजे नहीं है, कई लोगों के घरों की बाहरी दीवारे काफी नीची है, ऐसे ग्रामीण रातभर आग जलाकर अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए जागते रहे, शोर शराबा करते रहे हैं, क्योंकि उन्हें आशंका हैकि कहीं फिर जंगली पशु उनके घर में घुसकर बच्चों को न उठा ले जाए। नगला अजमेरी, करियामई के साथ इस क्षेत्र के दर्जनभर गांवों में भारी दहशत व्याप्त है। इधर, उप जिलाधिकारी ओमवीर सिंह ने ग्रामीणों का आह्वान किया कि वन विभाग व प्रशासन जंगली पशु को पकड़ने की कवायद में जुटा है लेकिन ग्रामीण भी सावधान रहे, मसाल जलाकर व ढ़ोल नगाड़े बजाकर जंगली पशु को भगाने का प्रयास भी करते रहे।

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पहली बात तो जो पंजों के निशान मिले हैं, दूसरी बात बच्चे की हड्डी तक खा जाने की प्रवृत्ति से यह स्पष्ट होता है कि यग जंगली पशु लकड़बग्घा ही है, क्योंकि चीता, शेर या तेंदुआ कभी हड्डियां नहीं खाता है। सीसीटीवी कैमरों की जरूरत तो जानवर की पहचान के लिए होती है, पहचान हो चुकी है, अब उसे पकड़ने की कवायद की जा रही है, शीघ्र ही सार्थक परिणाम सामने आएंगे। -डीके चतुर्वेदी, प्रभागीय वनाधिकारी, संभल।
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