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नोट बंदः मंडी में 10 करोड़ का कारोबार ठप
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Fri, 11 Nov 2016 01:56 AM IST
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मंडी समिति में काम करने वाले 1200 पल्लेदारों को दो दिन काम नहीं मिला है। किसान अनाज लेकर मंडी तो आ रहे हैं लेकिन आढ़ती पर 500 व 1000 का नोट देखकर बिना अनाज बेचे ही किसान घरों को लौट रहे हैं। इसके चलते मंडी समिति सुनसान पड़ी हुई है। गुरुवार को पल्लेदारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रदर्शन कर अपना गुस्सा जाहिर किया। वहीं आढ़ती भी नोट बंद होने से गुस्से में दिखाई पड़े।
ोने के चलते दो दिन मंडी समिति में करीब 10 करोड़ रुपये का कारोबार ठप हो गया है। किसान धान बेच रहे थे और कारोबारी धान खरीदकर अपना कारोबार कर रहे थे, लेकिन बड़े नोट बंद होने के चलते फिलहाल मंडी समिति मेें कारोबार बिल्कुल ठप हो गया है।
- मोहम्मद नवाब, मंडी एसोसिशन के अध्यक्ष।
500 व 1000 का नोट बंद करके सराहनीय कार्य किया है। बड़े नोट बंद होने से काला धन उजागर होगा। साथ ही जो बाजार में चल रहे नकली नोट बंद हो जाएंगे। केंद्र सरकार को हर पांच साल में नोट बदल देने चाहिए।
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- यामीन मलिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष जयहिंद वेलफेयर संघर्ष समिति।
केस नंबर एक- 1.30 बजे
मंडी समिति में गुरुवार को आढ़तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कहा कि हम लोगों को दो दिन से रोजगार नहीं मिला है। मंडी में पल्लेदारी करके परिवार का पालन पोषण करते है, लेंकिन 500 व 1000 का नोट बंद होने के चलते किसान मंडी में अनाज बेचने के लिए नहीं आ रहे हैं। इससे 1200 पल्लेदारों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।
केस नंबर दो- 2.00 बजे
शरीफपुर निवासी किसान पुनीत कुमार ने बताया कि इस समय गेहूं की फसल की बुआई का काम चल रहा है। ऐसे में किसान धान को बेचकर गेहूं की फसल की बुआई कर रहे हैं, लेकिन बड़े नोट बंद होने के चलते हम लोग अपनी धान की फसल को बेच नहीं पा रहे हैं। मंडी समिति में गुरुवार को मैं धान बेचने के लिए आया था, लेकिन आढ़ती के पास 500 व 1000 का नोट था। ऐसे में मैंने धान नहीं बेचे और वापस गांव लौट रहा हूूं।
केस नंबर तीन- 2.10 बजे
मंडी समिति में पल्लेदारी करने वाले मोहम्मद इकबाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस फैसले से आम लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। हम लोग रोजाना काम कर अपना व परिवार का पेट पालते हैं। बड़े नोट बंद होने के चलते दो दिन से काम नहीं मिला है।
केस नंबर चार- 1.00 बजे
अकसर किसानों से भरी रहने वाली मंडी समिति गुरुवार को खाली नजर आई। मंडी में न तो पल्लेदार ही थे और न ही किसान। खाद की दुकान पर भी किसान नजर नहीं आ रहे थे। इक्का दुक्का किसान मंडी में अनाज बेचने आए, लेकिन आढ़ती के पास 500 व 1000 हजार के नोट देखने के बाद बिना अनाज बेचे ही वापस लौट जाता रहा था।
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ोने के चलते दो दिन मंडी समिति में करीब 10 करोड़ रुपये का कारोबार ठप हो गया है। किसान धान बेच रहे थे और कारोबारी धान खरीदकर अपना कारोबार कर रहे थे, लेकिन बड़े नोट बंद होने के चलते फिलहाल मंडी समिति मेें कारोबार बिल्कुल ठप हो गया है।
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- मोहम्मद नवाब, मंडी एसोसिशन के अध्यक्ष।
500 व 1000 का नोट बंद करके सराहनीय कार्य किया है। बड़े नोट बंद होने से काला धन उजागर होगा। साथ ही जो बाजार में चल रहे नकली नोट बंद हो जाएंगे। केंद्र सरकार को हर पांच साल में नोट बदल देने चाहिए।
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- यामीन मलिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष जयहिंद वेलफेयर संघर्ष समिति।
केस नंबर एक- 1.30 बजे
मंडी समिति में गुरुवार को आढ़तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कहा कि हम लोगों को दो दिन से रोजगार नहीं मिला है। मंडी में पल्लेदारी करके परिवार का पालन पोषण करते है, लेंकिन 500 व 1000 का नोट बंद होने के चलते किसान मंडी में अनाज बेचने के लिए नहीं आ रहे हैं। इससे 1200 पल्लेदारों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।
केस नंबर दो- 2.00 बजे
शरीफपुर निवासी किसान पुनीत कुमार ने बताया कि इस समय गेहूं की फसल की बुआई का काम चल रहा है। ऐसे में किसान धान को बेचकर गेहूं की फसल की बुआई कर रहे हैं, लेकिन बड़े नोट बंद होने के चलते हम लोग अपनी धान की फसल को बेच नहीं पा रहे हैं। मंडी समिति में गुरुवार को मैं धान बेचने के लिए आया था, लेकिन आढ़ती के पास 500 व 1000 का नोट था। ऐसे में मैंने धान नहीं बेचे और वापस गांव लौट रहा हूूं।
केस नंबर तीन- 2.10 बजे
मंडी समिति में पल्लेदारी करने वाले मोहम्मद इकबाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस फैसले से आम लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। हम लोग रोजाना काम कर अपना व परिवार का पेट पालते हैं। बड़े नोट बंद होने के चलते दो दिन से काम नहीं मिला है।
केस नंबर चार- 1.00 बजे
अकसर किसानों से भरी रहने वाली मंडी समिति गुरुवार को खाली नजर आई। मंडी में न तो पल्लेदार ही थे और न ही किसान। खाद की दुकान पर भी किसान नजर नहीं आ रहे थे। इक्का दुक्का किसान मंडी में अनाज बेचने आए, लेकिन आढ़ती के पास 500 व 1000 हजार के नोट देखने के बाद बिना अनाज बेचे ही वापस लौट जाता रहा था।